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मीनाक्षी मंदिर के स्वरूप में सजा गणेश जी का भव्य मंदिर, बांस-लकड़ी से कलाकार ने गढ़ी अनोखी कलाकृति

🙏 मंडला | गणेशोत्सव विशेष

मीनाक्षी मंदिर के स्वरूप में सजा गणेश जी का भव्य मंदिर, बांस-लकड़ी से कलाकार ने गढ़ी अनोखी कलाकृति

मंडला के बॉटल आर्टिस्ट त्रिलोक सिंधिया की अनूठी पहल; करीब 6 फीट ऊंचे मंदिर को तैयार करने में लगे 20 दिन

🛕 मंदिर की ऊंचाई
करीब 6 फीट
⏱️ मेहनत
20 दिन
🎨 निर्माण सामग्री
बांस + लकड़ी

रेवांचल टाइम्स, मंडला। गणेशोत्सव को लेकर शहर में जगह-जगह आकर्षक पंडाल और झांकियां सजाई गई हैं, लेकिन मंडला के बॉटल आर्टिस्ट त्रिलोक सिंधिया ने अपने घर में विराजमान भगवान गणेश के लिए इस बार कुछ अलग और अनोखा तैयार किया है। उन्होंने दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर की स्थापत्य शैली से प्रेरणा लेते हुए बांस और लकड़ी से भगवान गणेश के लिए आकर्षक मंदिर बनाया है।



🙏 आस्था • कला • रचनात्मकता
मीनाक्षी मंदिर की शैली में गणेश जी का मंदिर
साधारण बांस और लकड़ी को कलाकार ने दिया शानदार स्वरूप

🎨 20 दिनों की मेहनत से तैयार हुई कलाकृति

त्रिलोक सिंधिया द्वारा तैयार किए गए इस मंदिर को बनाने में करीब 20 दिनों का समय लगा। मंदिर के निर्माण में बांस और लकड़ी का इस्तेमाल करते हुए इसके अलग-अलग हिस्सों को बेहद बारीकी से तैयार किया गया है। संरचना के साथ सजावट पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

करीब 6 फीट ऊंचे इस मंदिर में घर में स्थापित गणेश प्रतिमा के साथ कलाकृति का स्वरूप लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

🌿 हर साल गणेशोत्सव पर कुछ नया करने की कोशिश

बताया जाता है कि त्रिलोक सिंधिया हर वर्ष गणेशोत्सव पर अपने घर में भगवान गणेश की स्थापना के लिए अलग-अलग थीम पर कुछ नया तैयार करने का प्रयास करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि धार्मिक आस्था के साथ ऐसी कलाकृति भी सामने आए जो लोगों को आकर्षित करे और रचनात्मकता का संदेश दे।

🛕 इस बार मीनाक्षी मंदिर बना प्रेरणा

इस वर्ष उन्होंने प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर की स्थापत्य शैली को आधार बनाकर गणेश मंदिर तैयार करने का फैसला किया। कई दिनों की मेहनत और बारीक कारीगरी के बाद बांस और लकड़ी को आकर्षक मंदिर का स्वरूप मिला।

✨ बारीक कलाकारी बनी आकर्षण का केंद्र

गणेश जी के दर्शन के लिए पहुंच रहे लोगों की नजर मंदिर की बारीक कलाकारी पर भी टिक रही है। संरचना में किए गए छोटे-छोटे कलात्मक कार्य इसे खास स्वरूप देते हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध साधारण सामग्री का रचनात्मक इस्तेमाल इस कलाकृति की खासियत है।

💡 सीमित संसाधन, कल्पना बड़ी

गणेशोत्सव में जहां बड़े पंडाल और भव्य सजावट आकर्षण का केंद्र बनते हैं, वहीं त्रिलोक सिंधिया की यह कोशिश बताती है कि सीमित संसाधनों के बीच कल्पना, मेहनत और कला के दम पर भी आकर्षक रचना तैयार की जा सकती है।

🙏 🎨 🛕
“आस्था और कला का अनूठा संगम”
गणेशोत्सव में मंडला के कलाकार की रचनात्मक पहल बनी आकर्षण

🙏 गणेश दर्शन के साथ कलाकृति की भी सराहना

घर में गणेश जी की स्थापना के साथ यह अनोखा मंदिर भी कौतूहल और आकर्षण का विषय बना हुआ है। श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के साथ मंदिर की कलाकारी को देख रहे हैं और कलाकार की मेहनत की सराहना कर रहे हैं। मंडला के गणेशोत्सव में यह पहल कला, आस्था और रचनात्मकता के सुंदर संगम के रूप में सामने आई है।

📌 खास बातें
🙏 घर में विराजमान हैं भगवान गणेश
🛕 मीनाक्षी मंदिर की शैली से प्रेरित डिजाइन
🎋 बांस और लकड़ी से तैयार हुआ मंदिर
📏 करीब 6 फीट ऊंची कलाकृति
⏱️ तैयार करने में लगे करीब 20 दिन
🎨 मंडला के बॉटल आर्टिस्ट त्रिलोक सिंधिया ने किया निर्माण
✨ बारीक कारीगरी बनी लोगों के आकर्षण का केंद्र
दैनिक रेवांचल टाइम्स
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