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बड़े भाई की जमीन छोटे भाई के नाम कैसे हुई? रिकॉर्ड बदला, उसी जमीन पर बैंक का कर्ज भी!

दैनिक रेवाँचल टाइम्स | मंडला

बड़े भाई की जमीन पर छोटे भाई की नजर! राजस्व रिकॉर्ड बदला, उसी जमीन पर बैंक से कर्ज भी उठा

वृद्ध का आरोप—2003 से 2015-16 तक उनके नाम दर्ज थी जमीन, 2016-17 से छोटे भाई का नाम आया सामने; ₹82,300 दिलाने के बाद भी कर्ज नहीं चुकने का दावा

मंडला। उपतहसील बम्हनी के ग्राम ग्वारा में जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन और उसी भूमि के आधार पर बैंक ऋण लिए जाने का मामला सामने आया है। गनपत लाल साहू पिता गुलाबचंद साहू का आरोप है कि उनकी पैतृक जमीन पुराने राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम दर्ज होने और कब्जे में रहने के बावजूद बाद के वर्षों में उनके छोटे भाई राजकुमार साहू के नाम कैसे दर्ज हो गई, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उपलब्ध बताए जा रहे दस्तावेजों के अनुसार ग्राम ग्वारा स्थित खसरा नंबर 776/3, 779 एवं 906/1 की भूमि वर्ष 2003 से 2015-16 तक हस्तलिखित खसरा पांचसाला एवं बही में गनपत लाल साहू के नाम दर्ज बताई गई है। दस्तावेजों में उक्त भूमि पर आवेदक का कब्जा और कृषि कार्य होना भी बताया गया है।

वहीं वर्ष 2016-17 से संबंधित भूमि राजकुमार साहू के नाम दर्ज दिखाई देने का दावा किया गया है। ऐसे में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि राजस्व रिकॉर्ड में यह परिवर्तन किस आदेश, आवेदन और दस्तावेज के आधार पर किया गया।

2003–2015-16
गनपत लाल के नाम दर्ज होने का दावा
2016-17
राजकुमार का नाम दर्ज दिखाई देने का दावा
18 अक्टूबर 2022
पंचनामा में त्रुटि सुधार का उल्लेख

राजस्व रिकॉर्ड बदला तो जमीन पर बैंक का कर्ज कैसे?

मामले में जमीन के रिकॉर्ड के साथ बैंक ऋण का पहलू भी सामने आया है। संबंधित पटवारी प्रतिवेदन एवं अनुविभागीय अधिकारी द्वारा बैंक को लिखे गए बताए जा रहे पत्र में उक्त खसरा भूमि पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बम्हनी बंजर से ऋण लिए जाने और भूमि के बंधक होने का उल्लेख बताया गया है।

पीड़ित का सवाल
गनपत लाल साहू का कहना है कि उन्होंने स्वयं उक्त भूमि पर कोई कर्ज नहीं लिया। ऐसे में उनके मुताबिक यह जांच जरूरी है कि जमीन के आधार पर ऋण किसके नाम स्वीकृत हुआ, उस समय राजस्व रिकॉर्ड में स्वामी कौन था और बैंक द्वारा भूमि संबंधी दस्तावेजों का किस स्तर पर सत्यापन किया गया।

₹82,300 दिलाने का दावा, फिर भी कर्ज नहीं हुआ खत्म

गनपत लाल साहू का दावा है कि उन्होंने अपने दामाद कृष्णा साहू के माध्यम से छोटे भाई राजकुमार साहू के खाते में बैंक ऋण की अदायगी के उद्देश्य से अलग-अलग समय पर राशि दिलाई थी।

राशि को लेकर पीड़ित का दावा
₹10,000 + ₹10,000 + ₹10,000 + ₹52,300
कुल ₹82,300

पीड़ित का कहना है कि यह राशि कर्ज चुकाने के लिए दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद ऋण का निपटारा नहीं हुआ। इस दावे की पुष्टि के लिए बैंक खाते की स्टेटमेंट, ऋण खाता, जमा राशि के लेन-देन और उसके समायोजन का मिलान जरूरी होगा।

पंचनामा में त्रुटि सुधार पर आपत्ति नहीं होने का उल्लेख

मामले में 18 अक्टूबर 2022 के एक पंचनामा का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि इसमें भूमि के रिकॉर्ड में त्रुटि सुधार किए जाने पर राजकुमार साहू को आपत्ति नहीं होने तथा उनके हस्ताक्षर होने का उल्लेख है।

ऐसे में सवाल उठता है कि यदि संबंधित पक्ष की ओर से त्रुटि सुधार पर आपत्ति नहीं होने की स्थिति दर्ज की गई थी तो उसके बाद राजस्व रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया किस स्तर पर पहुंची और मामला अब तक क्यों लंबित है।

राजनीतिक दबाव का भी आरोप
पीड़ित ने जमीन को दूसरे नाम पर बनाए रखने के लिए राजस्व विभाग पर राजनीतिक दबाव डालने का आरोप लगाया है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों तथा विभाग का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

अब राजस्व विभाग और बैंक से ये सवाल

  • 2003 से 2015-16 तक जमीन गनपत लाल के नाम दर्ज थी तो 2016-17 में नाम किस आधार पर बदला?
  • नाम परिवर्तन के लिए कौन-सा आवेदन, आदेश और दस्तावेज प्रस्तुत किया गया?
  • क्या नामांतरण से पहले संबंधित पक्ष को विधिवत सूचना और सुनवाई का अवसर दिया गया?
  • बैंक ने भूमि बंधक रखने से पहले स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन कैसे किया?
  • ऋण की वर्तमान बकाया राशि और भुगतान की वास्तविक स्थिति क्या है?
  • ₹82,300 की कथित जमा राशि का ऋण खाते में समायोजन हुआ या नहीं?
  • 2022 के पंचनामा के बाद रिकॉर्ड सुधार की कार्रवाई किस स्तर पर लंबित रही?

रिकॉर्ड की जांच बताएगी गलती हुई या अनियमितता

वृद्ध गनपत लाल साहू का कहना है कि वह जमीन पर अपने अधिकार को लेकर अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगा चुके हैं। मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुराने और वर्तमान खसरा, बी-1, नामांतरण पंजी, आदेश पत्रक, पंचनामा, पटवारी प्रतिवेदन, बैंक मॉर्गेज दस्तावेज, ऋण स्वीकृति पत्र और ऋण खाते का आपस में मिलान महत्वपूर्ण होगा।

राजस्व रिकॉर्ड में सामान्य त्रुटि हुई, प्रक्रिया संबंधी लापरवाही हुई या किसी स्तर पर अनियमितता हुई—इसका निष्कर्ष दस्तावेजों और सक्षम विभागीय जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। फिलहाल पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों को जांच का विषय माना जाना चाहिए।
जमीन किसकी, कर्ज किसका और रिकॉर्ड कैसे बदला?
ग्राम ग्वारा के इस मामले में पुराने राजस्व रिकॉर्ड से लेकर नामांतरण और बैंक ऋण तक की पूरी दस्तावेजी कड़ी की जांच से ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति।

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