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लिखित आश्वासन भी निकला ‘खोखला वादा’!



आमरण अनशन तुड़वाने के बाद नगरपालिका के वादे हवा-हवाई, अब नरेंद्र सिंह परिहार ने जनता से मांगा अगली लड़ाई का मार्गदर्शन

दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला। नगर की बदहाल सड़कों, सीवर लाइन के जानलेवा गड्ढों, मुक्तिधाम के सौंदर्यीकरण और डिवाइडर निर्माण जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर कुछ सप्ताह पूर्व आमरण अनशन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र सिंह परिहार ने नगरपालिका प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिहार का आरोप है कि आमरण अनशन समाप्त करवाने के दौरान नगरपालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) गजानन नाफड़े द्वारा तहसीलदार मंडला, समाजसेवियों और पत्रकारों की मौजूदगी में दिया गया लिखित आश्वासन अब तक धरातल पर उतरता नजर नहीं आ रहा है।

परिहार ने कहा कि जब वे आमरण अनशन पर बैठे थे, तब प्रशासन की ओर से उन्हें लिखित आश्वासन दिया गया था कि 10 से 15 दिनों के भीतर उनकी जायज मांगों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस लिखित वादे और मौके पर मौजूद वरिष्ठ नागरिकों एवं शुभचिंतकों की सलाह के बाद उन्होंने अपने अनशन को समाप्त किया था।

लेकिन निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं होने से अब उनका आक्रोश खुलकर सामने आया है।

‘मुझे लगा व्यवस्था में ईमानदारी अभी बाकी है’

नरेंद्र सिंह परिहार ने कहा कि उन्होंने प्रशासन के लिखित आश्वासन पर भरोसा इसलिए किया, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि शासन-प्रशासन जनहित के मुद्दों को गंभीरता से लेगा। लेकिन समय बीतने के बाद भी जब जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम दिखाई नहीं दिया तो उन्हें स्वयं को ठगा हुआ और अपमानित महसूस हो रहा है।

उनका कहना है कि यह केवल किसी एक व्यक्ति के साथ किया गया वादा नहीं था, बल्कि मंडला शहर की जनता से जुड़ा जनहित का मामला था। यदि सार्वजनिक रूप से और जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी में दिया गया लिखित आश्वासन ही पूरा नहीं होता, तो फिर आम नागरिक प्रशासन पर भरोसा कैसे करे?

अब जनता से पूछा—अगला कदम क्या हो?

प्रशासन के रवैये से नाराज परिहार ने अब मंडला के प्रबुद्ध नागरिकों, समाजसेवियों, विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों से सीधे मार्गदर्शन मांगा है।

उन्होंने सवाल उठाया है कि—

क्या प्रशासन के इस कथित गैर-जिम्मेदार रवैये के खिलाफ दोबारा निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाए?

क्या लिखित आश्वासन के बावजूद काम नहीं होने के मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाए?

परिहार ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि मंडला शहर की बुनियादी समस्याओं और आम जनता के अधिकारों के लिए है।

अब निगाहें नगरपालिका प्रशासन पर

आमरण अनशन के दौरान किए गए लिखित आश्वासन के बाद भी यदि संबंधित कार्य आगे नहीं बढ़े हैं, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि आखिर उस आश्वासन की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या 10 से 15 दिनों में काम पूरा करने का वादा महज आंदोलन समाप्त करवाने तक सीमित था, या नगरपालिका प्रशासन वास्तव में इन समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर था?

अब देखना यह होगा कि नरेंद्र सिंह परिहार के सवालों पर नगरपालिका प्रशासन क्या जवाब देता है और मंडला की जनता के सामने किए गए वादों को पूरा करने के लिए अगला कदम क्या उठाता है।

फिलहाल परिहार ने जनता से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर अपना मार्गदर्शन दें और तय करें कि मंडला के हक और भविष्य की इस लड़ाई को आगे किस दिशा में ले जाया जाए।

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