अरबों की खनिज संपदा पर माफिया की नजर! गोसलपुर-मझौली से सिहोरा तक अवैध उत्खनन के गंभीर आरोप
जबलपुर। जिले के गोसलपुर, मझौली, सिहोरा और मझगवां क्षेत्र में खनिज संपदा के कथित अवैध दोहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि डोलामाइट, कच्चा पत्थर, बॉक्साइट, हार्डस्टोन, आयरन ओर, ब्लू डस्ट, गिट्टी और मुरम जैसी खनिज संपदा का निर्धारित नियमों और स्वीकृत सीमाओं से इतर उत्खनन किया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि और जिम्मेदार पक्षों का जवाब सामने आना अभी आवश्यक है।
खनिज संपदा से भरपूर इलाका, निगरानी पर सवाल
क्षेत्र में मेजर और गौण खनिज से जुड़ी बड़ी संख्या में खदानें संचालित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में स्वीकृत लीज क्षेत्र, वास्तविक उत्पादन, परिवहन और रॉयल्टी की नियमित निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि निगरानी की इसी व्यवस्था में खामियों का फायदा उठाकर नियमों से अधिक उत्खनन किया जा रहा है।
खदानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल
खनन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था, चेतावनी संकेत, स्वीकृत लीज से संबंधित जानकारी और श्रमिक सुरक्षा के उपाय महत्वपूर्ण होते हैं। क्षेत्र की कई खदानों में इन व्यवस्थाओं के पालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
यदि किसी खदान में निर्धारित सुरक्षा और सूचना संबंधी प्रावधान पूरे नहीं किए जा रहे हैं तो संबंधित विभाग द्वारा स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है।
कितना खनिज निकला? घनमीटर पैमाइश पर बड़ा सवाल
सबसे महत्वपूर्ण सवाल वास्तविक उत्पादन की पैमाइश को लेकर है। किसी स्वीकृत खदान से कितनी मात्रा में खनिज निकाला गया और उसके अनुपात में कितनी रॉयल्टी जमा हुई, इसकी सटीक निगरानी ही अवैध उत्खनन और राजस्व चोरी रोकने का प्रमुख आधार है।
आरोप है कि कुछ क्षेत्रों में वास्तविक उत्खनन और अभिलेखों में दर्ज मात्रा के बीच प्रभावी मिलान नहीं होने से शासन को राजस्व नुकसान की आशंका बनी हुई है। वास्तविक नुकसान का आंकड़ा विभागीय जांच और रिकॉर्ड मिलान से ही स्पष्ट हो सकता है।
रात के अंधेरे में भारी मशीनों से पहाड़ी काटने का आरोप
मझौली तहसील के गोसलपुर थाना क्षेत्र की एक पहाड़ी को लेकर फिर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि इसी क्षेत्र में करीब दो माह पहले भी कथित अवैध खनन का मामला सामने आया था।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय हिताची और जेसीबी जैसी भारी मशीनों से पत्थर निकालकर बड़ी मात्रा में सामग्री खुले स्थान पर जमा की गई है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि इसे बाद में भारी वाहनों से परिवहन किया जा सकता है। इन दावों की प्रशासनिक जांच आवश्यक है।
इन सवालों के जवाब जरूरी
◆ खनिज की मात्रा और जमा रॉयल्टी का मिलान कब हुआ?
◆ खदानों का अंतिम भौतिक निरीक्षण कब किया गया?
◆ रात में चलने वाली भारी मशीनों और वाहनों की जांच कौन कर रहा है?
◆ कथित अवैध भंडारण की पैमाइश और सत्यापन कराया गया या नहीं?
स्पेशल टास्क फोर्स की सक्रियता पर भी सवाल
अवैध खनन और परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए पूर्व में बनाई गई विशेष व्यवस्था की मौजूदा सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लगातार शिकायतें सामने आने की स्थिति में खनिज, राजस्व, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
अब प्रशासनिक जांच पर निगाह
इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित खदानों की लीज सीमा, उत्खनित खनिज की मात्रा, ई-रॉयल्टी/परिवहन दस्तावेज, मशीनों की मौजूदगी और मौके पर जमा सामग्री की भौतिक पैमाइश कराई जाए तो स्थिति साफ हो सकती है। आरोप सही पाए जाने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना और नियमानुसार कार्रवाई करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
नोट: खबर में अवैध उत्खनन, सांठगांठ और राजस्व नुकसान से संबंधित बिंदु शिकायतों/आरोपों के रूप में सामने आए हैं। संबंधित खनिज विभाग एवं अन्य पक्षों का आधिकारिक पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
