GCF में सुरक्षा गार्डों का विवाद गहराया, JWM ने लगाया मारपीट का आरोप; घमापुर पुलिस ने शुरू की जांच
ड्यूटी टाइमिंग में बदलाव को बताया जा रहा विवाद की बड़ी वजह; PSG जवानों ने अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना और शराब मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए, वेतन भुगतान में देरी से भी नाराजगी
दैनिक रेवांचल टाइम्स | जबलपुर। गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) में सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे निजी सुरक्षाकर्मियों के आंदोलन से शुरू हुआ विवाद अब कथित मारपीट और पुलिस जांच तक पहुंच गया है। सुरक्षा कर्मियों के आरोपों से घिरे एक जेडब्ल्यूएम (JWM) की ओर से मारपीट की शिकायत घमापुर थाने तक पहुंचने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार पुलिस टीम घायल बताए जा रहे जेडब्ल्यूएम का बयान दर्ज करने के लिए सतपुला अस्पताल भी पहुंची। दूसरी ओर निर्माणी प्रशासन ने भी पूरे घटनाक्रम की अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है। ऐसे में अब दोनों पक्षों के आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही वास्तविक घटनाक्रम स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सतपुला अस्पताल पहुंची पुलिस, JWM का बयान दर्ज करने की कवायद
जेडब्ल्यूएम की ओर से मारपीट संबंधी शिकायत सामने आने के बाद घमापुर थाना पुलिस ने घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में पुलिस टीम सतपुला अस्पताल पहुंची और घायल बताए जा रहे अधिकारी से घटना के संबंध में जानकारी जुटाने की कार्रवाई की।
फिलहाल मारपीट किन परिस्थितियों में हुई, इसमें कौन-कौन शामिल था और विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई, इन बिंदुओं पर आधिकारिक जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
निर्माणी प्रशासन ने भी शुरू की अपने स्तर पर जांच
पुलिस जांच के साथ जीसीएफ प्रशासन भी घटनाक्रम की विभागीय स्तर पर पड़ताल कर रहा है। निर्माणी परिसर की सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच विवाद को देखते हुए प्रशासन के सामने दोनों पक्षों के आरोपों की वास्तविकता पता लगाने की चुनौती है।
सोमवार को अचानक GCF गेट पर एकत्रित हुए थे सुरक्षा गार्ड
उल्लेखनीय है कि सोमवार दोपहर निजी सुरक्षा गार्ड (पीएसजी) अचानक जीसीएफ गेट पर एकत्रित हो गए थे। प्रदर्शन कर रहे सुरक्षाकर्मियों ने सुरक्षा विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों रंजीत प्रजापति और एपी सिंह पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
सुरक्षाकर्मियों का आरोप था कि अधिकारियों के व्यवहार और ड्यूटी संबंधी व्यवस्था के कारण वे लगातार तनाव में हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।
शराब की बोतल मांगने का भी लगाया गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी सुरक्षाकर्मियों ने अधिकारियों पर एक और गंभीर आरोप लगाया। उनका दावा है कि विभिन्न चेक पोस्टों पर तैनात कर्मचारियों से कथित रूप से शराब की बोतलों की मांग की जाती थी और इसके लिए यह कहा जाता था कि इन्हें ऊपर के अधिकारियों तक पहुंचाना है।
वेतन नहीं मिलने से भी नाराज थे सुरक्षा गार्ड
प्रदर्शनकारी जवानों ने वेतन भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि महीने की 14 तारीख गुजर जाने के बावजूद पिछले महीने का भुगतान उनके खातों में नहीं आया था, जिससे परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने में परेशानी हो रही है।
सुरक्षा गार्डों का आरोप था कि नए अधिकारियों की पदस्थापना के बाद व्यवस्था प्रभावित हुई है और उन्हें लगातार मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने एकत्रित होकर वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने मांग की कि उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव के शांतिपूर्ण तरीके से अपनी ड्यूटी कर सकें।
दोनों तरफ आरोप, जांच से सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
पूरे घटनाक्रम में अब दो पक्ष सामने हैं। एक ओर निजी सुरक्षा गार्ड अधिकारियों पर उत्पीड़न सहित कई गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जेडब्ल्यूएम की ओर से कथित मारपीट की शिकायत पुलिस तक पहुंची है।
ऐसे में पुलिस और निर्माणी प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। बयान, उपलब्ध साक्ष्य और विभागीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि विवाद के दौरान वास्तव में क्या हुआ और किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है।
