डुमना की आबोहवा बिगाड़ने पर IIITDM नपा: नगर निगम ने ठोका ₹1 लाख का जुर्माना, देखें वीडियो
जबलपुर। शहर के प्रमुख वन क्षेत्र डुमना नेचर पार्क की ओर दूषित पानी छोड़े जाने की शिकायत पर नगर निगम जबलपुर ने कार्रवाई की है। निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार के निर्देश पर जल, अमृत योजना, सीवेज, स्वास्थ्य और उद्यान शाखा की संयुक्त टीम ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी अभिकल्पन एवं विनिर्माण संस्थान (IIITDM) पहुंचकर व्यवस्थाओं की जांच की।
जांच में मिली खामी, मौके पर शुरू कराया सुधार
जांच के दौरान अपर आयुक्त सौरभ मिश्रा, अधीक्षण यंत्री कमलेश श्रीवास्तव, स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा और उद्यान अधिकारी मनीष तड़से सहित संस्थान के डिप्टी रजिस्ट्रार, सुरक्षा अधिकारी, हॉस्टल वार्डन और सिविल इंजीनियर मौजूद रहे।
नगर निगम के मुताबिक जांच में दूषित जल निकासी व्यवस्था में खामी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने संस्थान पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया। साथ ही मौके पर नालियों की मरम्मत और सुधार का काम शुरू कराया गया।
परिसर में लगाना होगा आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
अधिकारियों ने परिसर के भीतर दूषित जल की निकासी को लेकर संस्थान प्रबंधन को नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। संस्थान से निर्धारित समय सीमा में कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा गया है।
संस्थान को अपने स्तर पर आधुनिक क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित करना होगा, जिससे परिसर से निकलने वाले गंदे पानी का शोधन कर उसका पुन: उपयोग किया जा सके।
लक्ष्य—परिसर से बाहर न जाए दूषित पानी
नई व्यवस्था का उद्देश्य संस्थान परिसर से निकलने वाले दूषित पानी को उपचारित और पुनर्चक्रित करना है, ताकि अनुपचारित गंदा पानी परिसर से बाहर न पहुंचे। इससे डुमना क्षेत्र के आसपास जल प्रदूषण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
डुमना के वन्यजीव और पर्यावरण की सुरक्षा अहम
डुमना का वन क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। दूषित पानी का अनियंत्रित प्रवाह मिट्टी और जलस्रोतों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सीवेज के उचित उपचार और निकासी की व्यवस्था वन क्षेत्र तथा वहां मौजूद जीव-जंतुओं के संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
बड़े संस्थानों के लिए भी संदेश
नगर निगम की यह कार्रवाई शहर के बड़े परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों, होटल और अन्य प्रतिष्ठानों के लिए भी संकेत है कि सीवेज और दूषित जल के निस्तारण की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप रखनी होगी। पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी मिलने पर संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।
