घुघरी की सड़कों पर आवारा पशुओं का डेरा, आमजन की सुरक्षा से खिलवाड़!
घुघरी। तहसील मुख्यालय की मुख्य सड़कों पर इन दिनों आवारा पशुओं का जमावड़ा आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। सड़क पर जगह-जगह पशुधन के खड़े और बैठे रहने से यातायात प्रभावित हो रहा है। वाहन चालकों को अचानक सामने आने वाले पशुओं से बचने के लिए दिशा बदलनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
सड़क बनी पशुओं का ठिकाना, राहगीर परेशान
घुघरी के प्रमुख मार्गों पर आवारा पशु लंबे समय तक सड़क पर ही खड़े रहते हैं। कई बार पशु बीच सड़क पर बैठ जाते हैं, जिससे छोटे-बड़े वाहनों को निकलने में परेशानी होती है। सबसे ज्यादा जोखिम दोपहिया वाहन चालकों के लिए है। अचानक पशु सामने आने या सड़क पर दौड़ने की स्थिति में वाहन चालक का संतुलन बिगड़ सकता है।
आमजन की सुरक्षा पर आखिर कौन देगा ध्यान?
सड़क पर घूम रहे आवारा पशु केवल यातायात में बाधा नहीं हैं, बल्कि आमजन की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी हैं। इसी मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, पैदल राहगीर और दोपहिया वाहन चालक आवागमन करते हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि पशु को बचाने के प्रयास में कोई वाहन सड़क से उतर जाए या दूसरे वाहन से टकरा जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी? संभावित दुर्घटना से पहले रोकथाम के उपाय किए जाने की जरूरत है।
समस्या सामने आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय सड़कों से पशुओं को हटाने, सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करने और पशुपालकों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
रात होते ही और बढ़ जाता है खतरा
शाम और रात के समय सड़क पर बैठे या खड़े पशु दूर से स्पष्ट दिखाई नहीं देते। कम रोशनी में वाहन के सामने अचानक पशु आ जाने पर दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। सड़क सुरक्षा की दृष्टि से इस समस्या को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
जिम्मेदार व्यवस्था की भूमिका पर सवाल
जब तहसील मुख्यालय की प्रमुख सड़कों पर ही पशुओं का जमावड़ा दिखाई दे रहा है तो निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। संबंधित निकाय और प्रशासन को समन्वय बनाकर सड़क से पशुओं को हटाने तथा समस्या की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय करने की आवश्यकता है।
जनता की मांग—हादसे से पहले हो समाधान
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि प्रशासन मुख्य मार्गों का निरीक्षण कर सड़क पर घूम रहे आवारा पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था करे। इसके साथ पशुओं को खुले में छोड़ने वाले पशुपालकों की जिम्मेदारी भी तय की जाए।
आमजन की सुरक्षा किसी भी व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब सवाल यही है कि घुघरी की सड़कों पर बनी इस समस्या का समाधान कब होगा और दुर्घटना होने से पहले प्रभावी कार्रवाई कब दिखाई देगी?
