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कियोस्क सेंटरों पर आखिर किसकी मेहरबानी? गांव के नाम पर मंजूरी, घुघरी मुख्यालय में संचालन के आरोप

घुघरी में कियोस्क व्यवस्था पर सवाल

कियोस्क सेंटरों पर आखिर किसकी मेहरबानी? गांव के नाम पर मंजूरी, घुघरी मुख्यालय में संचालन के आरोप

अनेक शिकायतें और लगातार उठते सवाल—ग्रामीणों के लिए निर्धारित बैंकिंग सुविधा आखिर गांव तक क्यों नहीं पहुंच रही?
दैनिक रेवांचल टाइम्स | घुघरी

घुघरी। ग्रामीणों को उनके गांव और आसपास ही सामान्य बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित कियोस्क व्यवस्था पर घुघरी में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सेंट्रल बैंक से जुड़े कुछ कियोस्क सेंटर जिन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निर्धारित किए गए हैं, वहां संचालन करने के बजाय घुघरी मुख्यालय में संचालित किए जा रहे हैं। यदि शिकायतें सही हैं तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि गांव तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाने के लिए बनाई गई व्यवस्था आखिर मुख्यालय में क्यों सिमट रही है?



सवाल सीधा है—
जब कियोस्क गांव के लिए है तो गांव में क्यों नहीं?

कागजों में गांव, हकीकत में घुघरी? जांच से सामने आएगा सच

कियोस्क व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को छोटी रकम की निकासी, जमा और अन्य सामान्य बैंकिंग सेवाओं के लिए बार-बार बैंक शाखा तक आने की परेशानी कम करना है।

लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार यदि ग्रामीण क्षेत्र के लिए निर्धारित कियोस्क भी तहसील मुख्यालय में बैठकर संचालित हो रहे हैं, तो उस सुविधा का लाभ संबंधित गांव के लोगों तक किस तरह पहुंच रहा है—यह सवाल जांच की मांग करता है।

अनेक शिकायतें... लगातार सवाल... फिर भी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं?

कियोस्क सेंटरों के संचालन को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में बैंक प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

◆ क्या अधिकारियों ने संबंधित कियोस्क सेंटरों का मौके पर सत्यापन किया?
◆ किस कियोस्क को किस गांव या क्षेत्र के लिए अनुमति दी गई है?
◆ वर्तमान में संबंधित कियोस्क वास्तव में कहां संचालित हो रहा है?
◆ नियमों से अलग संचालन मिलने पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?
◆ शिकायतों के निस्तारण का रिकॉर्ड क्या कहता है?

ग्रामीण सुविधा या मुख्यालय का केंद्र?

कियोस्क जैसी व्यवस्था का वास्तविक लाभ तभी है जब बैंकिंग सेवाएं लक्षित क्षेत्र के उपभोक्ताओं के नजदीक उपलब्ध हों। यदि ग्रामीण उपभोक्ता को कियोस्क सेवा के लिए भी घुघरी मुख्यालय आना पड़े तो स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध कराने का उद्देश्य प्रभावित होता है। यही वजह है कि शिकायतकर्ता प्रत्येक सेंटर के स्वीकृत स्थान और वास्तविक संचालन स्थल का भौतिक सत्यापन कराने की मांग कर रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल—निगरानी आखिर कौन कर रहा है?

कियोस्क सेंटर बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े सेवा केंद्र हैं। ऐसे में उनके निर्धारित स्थान, संचालन और सेवाओं की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

बैंक प्रबंधन से यह स्पष्ट होना चाहिए कि सेंटरों का निरीक्षण कितनी बार किया गया, निरीक्षण के दौरान स्वीकृत पते और वास्तविक संचालन स्थल का मिलान किया गया या नहीं और शिकायत मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई।

निजी लाभ के आरोप भी, लेकिन जांच से ही साफ होगी तस्वीर

कुछ शिकायतों में यह आशंका भी जताई जा रही है कि कियोस्क सेंटरों को मुख्यालय में संचालित करने से किसी को निजी लाभ मिल रहा है। हालांकि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच के बिना इन्हें तथ्य नहीं माना जा सकता। इसीलिए संबंधित रिकॉर्ड और वास्तविक संचालन स्थल का सत्यापन इस मामले में महत्वपूर्ण हो जाता है।

जनता पूछ रही है—जवाब कौन देगा?

1. प्रत्येक कियोस्क सेंटर किस स्थान के लिए स्वीकृत है?
2. वर्तमान में उसका वास्तविक संचालन कहां हो रहा है?
3. पिछले वर्षों में कितनी बार निरीक्षण किया गया?
4. शिकायतों पर बैंक ने क्या कार्रवाई की?
5. ग्रामीणों को उनके निर्धारित क्षेत्र में सुविधा क्यों नहीं मिल रही?
6. नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी?

रिकॉर्ड खोलिए, तस्वीर खुद साफ हो जाएगी

मामले की वास्तविक स्थिति जानने का सबसे सीधा तरीका रिकॉर्ड और मौके का मिलान है। प्रत्येक संबंधित कियोस्क सेंटर की स्वीकृति, निर्धारित पता, वर्तमान संचालन स्थल, निरीक्षण रिपोर्ट और प्राप्त शिकायतों पर हुई कार्रवाई सामने आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

यदि सभी सेंटर निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हो रहे हैं तो बैंक प्रबंधन सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट कर सकता है। वहीं जांच में नियमों से अलग संचालन सामने आता है तो जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब सवाल सिर्फ कियोस्क का नहीं, जवाबदेही का है!

ग्रामीणों के नाम पर उपलब्ध कराई गई बैंकिंग सुविधा ग्रामीणों तक पहुंच रही है या मुख्यालय तक सिमट गई है—इसका जवाब संबंधित बैंक प्रबंधन के सत्यापन और आधिकारिक रिकॉर्ड से सामने आना चाहिए। घुघरी में उठ रहे इन सवालों पर अब जिम्मेदार अधिकारियों के स्पष्ट जवाब का इंतजार है।

स्पष्टीकरण: खबर में कियोस्क सेंटरों के स्थान और संचालन से संबंधित बातें शिकायतकर्ताओं द्वारा उठाए गए आरोपों और सवालों के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। संबंधित बैंक प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

दैनिक रेवांचल टाइम्स | घुघरी

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