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चाबी में ‘कागजों का खेत तालाब’? खसरा 85/2 पर निर्माण नहीं मिलने का आरोप, ₹4.5 लाख के काम की जांच की मांग

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मोहगांव/मंडला

चाबी में ‘कागजों का खेत तालाब’? खसरा 85/2 पर निर्माण नहीं मिलने का आरोप, ₹4.5 लाख के काम की जांच की मांग

सरपंच के भाई को लाभ पहुंचाने का आरोप; मस्टर रोल से जियो टैगिंग तक रिकॉर्ड और मौके की स्थिति मिलाने की मांग

मोहगांव/मंडला। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खेत तालाब जैसे कार्य कराए जाते हैं, लेकिन जनपद पंचायत मोहगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत चाबी के बगली मोहल्ले में एक कथित खेत तालाब को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय स्तर से मिली जानकारी में दावा किया जा रहा है कि करीब चार से साढ़े चार लाख रुपये की लागत का खेत तालाब स्वीकृत और रिकॉर्ड में दर्शाया गया, लेकिन संबंधित स्थान पर तालाब दिखाई नहीं दे रहा।



बड़ा सवाल—यदि काम पूरा हुआ तो तालाब कहां है?

आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण सरकारी रिकॉर्ड और मौके के संयुक्त भौतिक सत्यापन से ही हो सकता है। यदि रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण दर्शाया गया है तो स्वीकृत स्थल, माप, मजदूरी भुगतान और जियो टैगिंग का मौके की स्थिति से मिलान महत्वपूर्ण होगा।

सरपंच के भाई को लाभ देने का आरोप

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि संबंधित योजना का लाभ पंचायत के सरपंच के भाई को दिया गया। उपलब्ध कराई गई जानकारी में हितग्राही के रूप में सेवकराम धुर्वे पिता देवी सिंह धुर्वे का नाम बताया गया है। इसी जानकारी के अनुसार खसरा नंबर 85/2, रकबा करीब 0.29 हेक्टेयर भूमि उनके नाम दर्ज बताई जा रही है।

इन विवरणों की राजस्व अभिलेख और योजना के मूल स्वीकृति दस्तावेजों से आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। यदि इसी भूमि पर खेत तालाब स्वीकृत और पूर्ण दर्शाया गया है, तो स्थल पर संरचना की वर्तमान स्थिति का सत्यापन जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु होगा।

मस्टर रोल से जियो टैगिंग तक उठे सवाल

मामले में यह जांच किए जाने की मांग उठ रही है कि कार्य की माप किस आधार पर दर्ज हुई, मस्टर रोल में किन मजदूरों की उपस्थिति दर्ज है, मजदूरी का भुगतान किसे और कितने दिनों का किया गया तथा कार्यस्थल की तस्वीरें और जियो टैगिंग किस स्थान की हैं।

जांच में इन रिकॉर्ड का मिलान अहम

स्वीकृति आदेश • तकनीकी स्वीकृति • माप पुस्तिका • मस्टर रोल • मजदूरी भुगतान • सामग्री भुगतान • कार्य पूर्णता संबंधी रिकॉर्ड • कार्यस्थल की तस्वीरें • GPS लोकेशन और जियो टैगिंग • राजस्व नक्शा और खसरा रिकॉर्ड

मजदूरों से भी हो सत्यापन

यदि आधिकारिक जांच में स्वीकृत स्थल पर तालाब नहीं मिलता है तो मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों से भी सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। उनसे यह जानकारी ली जा सकती है कि उन्होंने किस स्थान पर, कितने दिनों तक और किस कार्य में मजदूरी की तथा उन्हें कितना भुगतान मिला। इसके बाद संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और भुगतान विवरण से इन तथ्यों का मिलान किया जा सकता है।

तकनीकी अमले की भूमिका भी जांच का विषय

पंचायत एवं ग्रामीण रोजगार से जुड़े कार्यों में अलग-अलग स्तर पर प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं होती हैं। इसलिए यदि जांच में सरकारी रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर मिलता है तो संबंधित पंचायत पदाधिकारियों के साथ कार्य की माप, सत्यापन, जियो टैगिंग और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच आवश्यक होगी।

‘हवा में तालाब’ या रिकॉर्ड में कोई और हकीकत?

फिलहाल उपलब्ध आरोपों के आधार पर किसी वित्तीय अनियमितता को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। यह भी जांच से ही स्पष्ट होगा कि स्वीकृत कार्य किस योजना के तहत था, उसकी वास्तविक लागत कितनी थी, कार्य की वर्तमान स्थिति क्या है और रिकॉर्ड में उसे किस स्तर तक पूर्ण दिखाया गया है। इसलिए मौके का भौतिक सत्यापन और मूल दस्तावेजों की जांच सबसे अहम है।

CEO बोले—शिकायत दीजिए, टीम भेजकर जांच करा लेंगे

मामले को लेकर जनपद पंचायत मोहगांव के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कमल रंधावा से संपर्क किए जाने पर उन्होंने कहा— “आप लिखित में शिकायत कीजिए, टीम भेजकर जांच करा ली जाएगी।”

एक अन्य प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी अभी तक उनके पास नहीं थी और शिकायत प्राप्त होने के बाद यदि कुछ गलत पाया जाता है तो जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

पंचायत सचिव बोले—नई पदस्थापना, जानकारी लेकर बताएंगे

ग्राम पंचायत चाबी के सचिव बताए गए ढोकल मरकाम ने कहा— “मैं ग्राम पंचायत में नया-नया आया हूं। मेरी जानकारी में नहीं है, कल बता पाऊंगा।”

अब सवाल—आखिर तालाब बना कहां?

यदि स्वीकृत खसरे पर तालाब बना है तो उसका स्थल और वर्तमान स्थिति सार्वजनिक होनी चाहिए। यदि काम अधूरा है तो रिकॉर्ड में उसकी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि जांच में रिकॉर्ड तथा जमीन की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर मिलता है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।

चाबी पंचायत के इस मामले में अब निर्णायक तथ्य आरोपों से नहीं, बल्कि खसरा 85/2 के भौतिक सत्यापन, मस्टर रोल, माप पुस्तिका, भुगतान रिकॉर्ड और जियो टैगिंग के मिलान से सामने आएंगे। ग्रामीणों की निगाह अब इस बात पर है कि लिखित शिकायत के बाद जांच टीम मौके तक कब पहुंचती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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मोहगांव | ग्राम पंचायत चाबी | खेत तालाब | जांच की मांग

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