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बच्चों का स्कूल या भैंसों का तबेला?...सरकारी अतिरिक्त कक्ष पर कथित कब्जे का खेल! स्कूल परिसर में बंध रहे गाय-भैंस, चारों तरफ गोबर और कीचड़

 बच्चों का स्कूल या भैंसों का तबेला?


सरकारी अतिरिक्त कक्ष पर कथित कब्जे का खेल! स्कूल परिसर में बंध रहे गाय-भैंस, चारों तरफ गोबर और कीचड़



जहां गूंजनी चाहिए बच्चों की किलकारी, वहां उठ रही दुर्गंध—मध्याह्न भोजन की स्वच्छता पर भी सवाल


दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला

मंडला। सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और स्वच्छ स्कूल परिसर उपलब्ध कराने के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जनपद पंचायत मंडला अंतर्गत ग्राम पंचायत मोहनिया पटपरा के शासकीय प्राथमिक शाला मोहनिया टोला की तस्वीरें सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही हैं। स्कूल परिसर में बच्चों की सुविधा के लिए बनाए गए अतिरिक्त कक्ष का कथित रूप से मवेशियों के तबेले के रूप में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। तस्वीरों में परिसर के आसपास मवेशी और गंदगी नजर आ रही है, जिससे स्कूल प्रबंधन, पंचायत और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली कटघरे में है।


स्कूल का अतिरिक्त कक्ष बना मवेशियों का ठिकाना?


जिस अतिरिक्त कक्ष में बच्चों के लिए शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होनी चाहिए थीं, वहां यदि गाय-भैंस बांधी जा रही हैं तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति के कथित निजी इस्तेमाल का गंभीर मामला है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्कूल परिसर में मवेशी बांधने की अनुमति किसने दी? यदि अनुमति नहीं दी गई तो लंबे समय से ऐसा होने की स्थिति में स्कूल प्रबंधन और पंचायत के जिम्मेदारों ने रोकने की कार्रवाई क्यों नहीं की?


बताया जा रहा है कि इस मामले में वार्ड क्रमांक 13 के पंच की भूमिका होने की चर्चा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। लेकिन यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह भी जांच का विषय होगा कि किसके संरक्षण में सरकारी भवन को मवेशियों के उपयोग में लाया गया।


बारिश में कीचड़, ऊपर से गोबर की दुर्गंध—कैसे सुरक्षित रहेंगे नौनिहाल?


फिलहाल बारिश का मौसम है। स्कूल परिसर और आसपास जहां-तहां पानी और कीचड़ की स्थिति बन रही है। ऐसे में यदि इसी परिसर में गाय-भैंस बांधी जाएं और गोबर जमा होता रहे तो बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर गंभीर चिंता होना स्वाभाविक है।


नौनिहालों को किताब-कॉपी लेकर स्कूल पहुंचना है या गोबर और कीचड़ से बचते हुए रास्ता तलाशना है?

स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों के लिए स्वच्छ वातावरण सबसे जरूरी है। लेकिन परिसर में मवेशियों की मौजूदगी, गोबर की दुर्गंध, बारिश का पानी और कीचड़ मिलकर ऐसा माहौल बना रहे हैं तो स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर सीधे सवाल उठना लाजिमी है।


मध्याह्न भोजन के पास मवेशी, स्वच्छता व्यवस्था पर बड़ा सवाल


मामला और गंभीर इसलिए हो जाता है कि जानकारी के अनुसार अतिरिक्त कक्ष के समीप ही बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि भोजन तैयार करने वाले स्थान के आसपास मवेशियों की मौजूदगी और गोबर की गंदगी की स्थिति में स्वच्छता के मानकों का पालन कैसे हो रहा है?

सरकार बच्चों को पौष्टिक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने की योजना चला रही है, लेकिन यदि भोजन स्थल के आसपास ही गंदगी और दुर्गंध का वातावरण हो तो जिम्मेदार अधिकारी इस व्यवस्था का निरीक्षण किस आधार पर कर रहे हैं?


पंचायत से लेकर स्कूल प्रबंधन तक—जवाबदेही तय हो


यह मामला केवल एक अतिरिक्त कमरे के इस्तेमाल का नहीं है। यह बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।

यदि स्कूल परिसर में मवेशी बांधे जा रहे हैं तो ग्राम पंचायत को तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। स्कूल प्रबंधन को भी बताना चाहिए कि इसकी जानकारी उन्हें कब से थी और रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए गए। वहीं शिक्षा विभाग को मौके पर पहुंचकर जांच करनी चाहिए कि सरकारी भवन का उपयोग किसके द्वारा और किस अनुमति से किया जा रहा है।


अब कार्रवाई नहीं हुई तो सवाल और तीखे होंगे


गांव के बच्चों के लिए बने स्कूल परिसर को यदि वास्तव में मवेशियों का तबेला बना दिया गया है तो जिम्मेदारों को यह समझना होगा कि सरकारी स्कूल किसी की निजी जागीर नहीं है।

बारिश के मौसम में कीचड़ और पानी के बीच पढ़ने पहुंच रहे नौनिहालों के आसपास यदि गोबर और दुर्गंध भी फैली रहे तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।

क्या पंचायत प्रशासन अतिरिक्त कक्ष को मवेशियों से मुक्त कराएगा?

क्या स्कूल प्रबंधन परिसर की सफाई और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा?

क्या शिक्षा विभाग मौके की जांच कर जिम्मेदारी तय करेगा?

और सबसे बड़ा सवाल—यदि सरकारी भवन पर कथित कब्जे का खेल चल रहा है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

बच्चों के स्कूल को तबेला बनने से रोकना पंचायत और शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी तस्वीरों में दिख रही हकीकत को देखकर भी आंखें बंद रखते हैं या नौनिहालों के सुरक्षित भविष्य के लिए ठोस कार्रवाई करते हैं।

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