एक मकान, पांच हितग्राही! प्रधानमंत्री जनमन आवास में लाखों के खेल का आरोप
भौड़ियापानी में आवास योजना की सूची ने खड़े किए गंभीर सवाल, 133 हितग्राहियों के नाम दर्ज—मौके की जांच से खुलेगा राज
दैनिक रेवांचल टाइम्स | छिंदवाड़ा। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का उद्देश्य पात्र एवं विशेष रूप से कमजोर परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन ग्राम पंचायत भौड़ियापानी, जनपद पंचायत तामिया की एक सूची सामने आने के बाद योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उपलब्ध दस्तावेज में कुल 133 हितग्राहियों के नाम दर्ज बताए गए हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि एक ही मकान को कथित रूप से पांच अलग-अलग हितग्राहियों के आवास के रूप में दर्शाया गया। साथ ही यह भी आरोप है कि इनमें से चार हितग्राहियों के नाम पर स्वीकृत राशि का वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिला।
यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी आवास योजना की राशि के उपयोग में संभावित वित्तीय अनियमितता का गंभीर प्रश्न खड़ा हो सकता है।
133 नामों की सूची, फिर भी जमीन पर सत्यापन जरूरी
उपलब्ध दस्तावेज में क्रमवार हितग्राहियों के नाम और पंजीयन क्रमांक दर्ज हैं। सूची में उमेश भारती, राजेश भारती, गणेश भारती सहित बड़ी संख्या में नाम शामिल बताए गए हैं।
तीसरे पृष्ठ तक सूची में हितग्राहियों की संख्या 133 तक पहुंचती है। लेकिन असली प्रश्न सूची में दर्ज नामों का नहीं, बल्कि प्रत्येक हितग्राही के नाम पर स्वीकृत आवास और जमीन पर बने वास्तविक निर्माण के मिलान का है।
यदि एक ही निर्माण को एक से अधिक हितग्राहियों से जोड़ा गया है, तो प्रत्येक हितग्राही का जियो-टैग, निर्माण स्थल, स्वीकृति आदेश, किस्तवार भुगतान, बैंक खाते और निर्माण की वास्तविक स्थिति का दस्तावेजी व भौतिक सत्यापन जरूरी है।
भुगतान प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल
यदि किसी हितग्राही के नाम से राशि स्वीकृत हुई लेकिन उसे वास्तविक लाभ नहीं मिला, तो यह भी जांच का विषय है कि भुगतान किस खाते में हुआ, किस स्तर पर निर्माण सत्यापन किया गया और संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों ने प्रगति की पुष्टि किस आधार पर की।
आरोपों की पुष्टि या खंडन केवल आधिकारिक रिकॉर्ड, बैंक भुगतान विवरण और मौके के भौतिक सत्यापन से ही संभव है।
जनमन के नाम पर खेल तो नहीं?
प्रधानमंत्री जनमन जैसी महत्वपूर्ण योजना का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचना चाहिए। ऐसे में यदि एक ही निर्माण को कई हितग्राहियों के नाम से दर्शाने का आरोप सामने आता है, तो यह योजना की निगरानी और सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
● क्या कागजों में कई आवास पूर्ण दिखाए गए, जबकि जमीन पर स्थिति अलग है?
● क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने प्रत्येक आवास का मौके पर जाकर सत्यापन किया?
● कथित रूप से लाभ से वंचित चार हितग्राहियों की स्वीकृत राशि आखिर कहां गई?
निष्पक्ष स्थल जांच और रिकॉर्ड मिलान की मांग
मामले में उच्च अधिकारियों से ग्राम पंचायत भौड़ियापानी के आवासों का स्थल निरीक्षण कराने और दस्तावेजों का मिलान किए जाने की मांग उठ रही है। प्रत्येक हितग्राही के नाम पर स्वीकृत राशि, बैंक भुगतान और वास्तविक निर्माण की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अब देखना यह है कि प्रशासन मामले को केवल कागजी जांच तक सीमित रखता है या मौके पर जाकर एक-एक आवास का सत्यापन कर जवाबदेही तय करता है।
जियो-टैग, भुगतान रिकॉर्ड और मौके की जांच बताएगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई
उपलब्ध सूची में 133 हितग्राहियों के नाम दर्ज बताए गए हैं। एक मकान पर पांच हितग्राहियों और चार हितग्राहियों की राशि हड़पने संबंधी दावा आरोप के रूप में सामने आया है। इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।
