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विधानसभा के तारांकित सवाल की नस्ती गायब, RTI में खुली सरकारी रिकॉर्ड व्यवस्था की पोल



विधानसभा के तारांकित सवाल की फाइल ही गायब! RTI में खुली सरकारी रिकॉर्ड व्यवस्था की पोल

सामान्य प्रशासन विभाग ने माना—काफी खोजने के बाद भी नहीं मिली नस्ती, मिलने पर देने का भरोसा



दैनिक रेवाँचल टाईम्स - डिंडौरी। सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से सामने आया एक पत्र सरकारी रिकॉर्ड व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामला विधानसभा के तारांकित प्रश्न क्रमांक 1603 से जुड़ी महत्वपूर्ण नस्ती का है, जिसे आरटीआई के माध्यम से मांगे जाने पर विभाग ने स्वीकार किया है कि काफी खोजबीन के बावजूद संबंधित फाइल फिलहाल विभागीय कक्ष में नहीं मिल पाई।

श्री दिगंबर खांडिलकर, द्वारा श्री एस.डी. शुक्ला, वार्ड नंबर-2, सुखबार, जिला डिंडौरी के माध्यम से इस संबंध में जानकारी मांगी गई थी। इसके जवाब में मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ ने पत्र जारी कर बताया कि संबंधित नस्ती की तलाश की गई, लेकिन वह विभाग के कक्ष में उपलब्ध नहीं मिली। यही वजह बताकर फिलहाल मांगी गई नस्ती की प्रति उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई गई है।

विभागीय पत्र में यह भी कहा गया है कि नस्ती को खोजने का प्रयास जारी है और फाइल मिलते ही उसे उपलब्ध करा दिया जाएगा। पत्र पर मध्यप्रदेश शासन के अवर सचिव सचिन्द्र राव के डिजिटल हस्ताक्षर हैं।

सवाल फाइल का नहीं, जवाबदेही का है

यह मामला अब केवल एक आरटीआई आवेदन या एक सरकारी फाइल तक सीमित नहीं रह गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस नस्ती का संबंध विधानसभा के तारांकित प्रश्न से है, वह सरकारी रिकॉर्ड में सुरक्षित क्यों नहीं मिल रही? विधानसभा से जुड़े प्रश्नों की प्रक्रिया शासन के कामकाज और विभागीय जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसे में संबंधित नस्ती का विभागीय कक्ष में उपलब्ध नहीं होना अपने आप में गंभीर प्रशासनिक स्थिति को दर्शाता है।

यदि कोई सामान्य पत्र या पुराना दस्तावेज गुम हो जाए तो भी सवाल उठते हैं, लेकिन यहां मामला विधानसभा के तारांकित प्रश्न क्रमांक 1603 से जुड़ी नस्ती का है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि फाइल आखिरी बार किस अधिकारी या कर्मचारी के पास थी? उसे किस रिकॉर्ड शाखा में रखा गया था? उसकी निगरानी और संधारण की जिम्मेदारी किसकी थी? और यदि फाइल लंबे समय से उपलब्ध नहीं है तो उसे खोजने के लिए विभाग ने अब तक क्या कदम उठाए?

RTI आवेदक को इंतजार, विभाग के पास सिर्फ आश्वासन

सूचना का अधिकार कानून आम नागरिक को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार देता है। लेकिन जब मांगी गई जानकारी से संबंधित सरकारी नस्ती ही विभाग में उपलब्ध न हो तो सूचना चाहने वाले नागरिक के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि वह अपने अधिकार का इस्तेमाल आखिर कैसे करे।

विभाग ने फिलहाल यह भरोसा दिया है कि नस्ती मिलने के बाद उसकी प्रति उपलब्ध करा दी जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि फाइल कब मिलेगी और जानकारी कब मिलेगी? इसकी कोई स्पष्ट समयसीमा पत्र में सामने नहीं आती।

अब जांच की मांग उठना लाजिमी

इस पूरे मामले में यह भी जांच का विषय है कि संबंधित नस्ती वास्तव में कहीं स्थानांतरित हुई है या रिकॉर्ड संधारण में लापरवाही हुई है। यदि फाइल उपलब्ध नहीं है तो उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए विभागीय स्तर पर जांच की जरूरत है।

आरटीआई के जवाब में सरकारी विभाग का खुद यह कहना कि विधानसभा के तारांकित प्रश्न से संबंधित नस्ती काफी खोजने के बाद भी नहीं मिली, प्रशासनिक व्यवस्था के लिए असहज करने वाला खुलासा है। अब देखना होगा कि विभाग इस नस्ती को कब तक खोज पाता है और उसके बाद आरटीआई आवेदक को मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई जाती है या नहीं।

फाइल मिलेगी तो जानकारी सामने आएगी, लेकिन तब तक सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर विधानसभा के सवाल की नस्ती गई कहां?

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