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कृषि अधिकारियों की हड़ताल से अन्नदाता बेहाल, नैनपुर कृषि कार्यालय में खाली कुर्सियां बनीं किसानों की परेशानी का प्रतीक




तीन सूत्रीय मांगों को लेकर अधिकारी हड़ताल पर, मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी — कार्यालय पहुंचे किसान हुए निराश, बोले- हमारी समस्या कौन सुनेगा?


दैनिक रेवांचल टाईम्स - मंडला, नैनपुर के किसानों को खेती-किसानी के दौरान हर कदम पर कृषि विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की जरूरत होती है। लेकिन नैनपुर में इन दिनों कृषि विभाग के अधिकारियों की हड़ताल के कारण किसानों की परेशानी बढ़ती दिखाई दे रही है। अपनी समस्याओं और विभागीय कार्यों को लेकर कृषि विभाग के कार्यालय पहुंच रहे किसानों को अधिकारी नहीं मिल रहे हैं। कार्यालय का दरवाजा खुला है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। कार्यालय के अंदर दिखाई दे रही खाली कुर्सियां किसानों की परेशानी की तस्वीर बयां कर रही हैं।

कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा तीन सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल की जा रही है। अधिकारियों की प्रमुख मांगों में समय वेतनमान 2400 से बढ़ाकर 2800 करना, अतिरिक्त मुख्यालय के लिए 5000 रुपये मानदेय तथा eHMRS व्यवस्था को पूर्णतः बंद करना शामिल है। अधिकारियों ने अपनी मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी है और मांगें जल्द पूरी नहीं होने की स्थिति में हड़ताल को अनिश्चितकालीन करने का अल्टीमेटम भी दिया है।


कृषि कार्यालय में किसान लगा रहे चक्कर, अधिकारी नदारद

नैनपुर कृषि विभाग कार्यालय में किसान अपनी कृषि संबंधी समस्याओं, योजनाओं, बीज, खाद, फसल संबंधी जानकारी और अन्य विभागीय कार्यों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन हड़ताल के चलते अधिकारियों के कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने से किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

किसानों का कहना है कि वे दूर-दराज के गांवों से समय और पैसा खर्च कर कृषि विभाग के कार्यालय पहुंचते हैं। उन्हें उम्मीद रहती है कि अधिकारी उनकी समस्या सुनेंगे और समाधान का रास्ता बताएंगे। लेकिन कार्यालय पहुंचने के बाद जब जिम्मेदार अधिकारी ही नहीं मिलते तो किसान निराश होकर वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।


खाली कुर्सियों को देखकर किसानों के सामने बड़ा सवाल

कृषि कार्यालय में अधिकारी नहीं होने से किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि आखिर उनकी समस्या कौन सुनेगा? किसानों का कहना है कि खेती का मौसम किसी का इंतजार नहीं करता। समय पर खाद, बीज, फसल संबंधी सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं मिलने से किसान को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

एक तरफ कृषि विभाग के अधिकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ खेतों में मेहनत कर देश का पेट भरने वाला अन्नदाता सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है। ऐसे में शासन-प्रशासन के सामने किसानों की परेशानी को नजरअंदाज न करने की चुनौती है।

हड़ताल लंबी चली तो बढ़ सकती है किसानों की मुश्किल

यदि अधिकारियों की हड़ताल जल्द समाप्त नहीं होती और आंदोलन अनिश्चितकालीन रूप लेता है तो ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। कृषि विभाग किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं और सेवाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों की अनुपस्थिति का असर जमीनी स्तर पर दिखाई देना स्वाभाविक है।

      वही स्थानीय किसानों का कहना है कि अधिकारियों की मांगों पर शासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए और जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि हड़ताल समाप्त हो और कृषि विभाग की सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो सकें।


शासन से किसान और अधिकारी दोनों को उम्मीद

कृषि अधिकारियों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन का समाधान निकालना अब शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी बन गई है। अधिकारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि किसानों को विभागीय सेवाओं के लिए परेशान न होना पड़े।

नैनपुर के किसानों का कहना है कि अधिकारी अपनी मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं तो उनकी मांगों का समाधान शासन करे, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा परेशानी देश के अन्नदाता को नहीं होनी चाहिए।


अन्नदाता पूछ रहा सवाल—कब खत्म होगी परेशानी?

नैनपुर कृषि विभाग कार्यालय में खाली पड़ी कुर्सियां सिर्फ कार्यालय की स्थिति नहीं, बल्कि किसानों के सामने खड़ी समस्या की तस्वीर भी दिखाई दे रही हैं। किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शासन जल्द अधिकारियों की मांगों पर फैसला करेगा और हड़ताल समाप्त होगी।

      वही अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन कृषि अधिकारियों की तीन सूत्रीय मांगों पर कब तक निर्णय लेता है और नैनपुर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को कृषि विभाग की सेवाओं का लाभ दोबारा सुचारु रूप से कब मिल पाता है।

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