जनसुनवाई में पहुंची मां ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार, आधार और समग्र आईडी में सुधार की मांग
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला।जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर माता-पिता के आपसी विवाद की सजा एक मासूम बच्चे को क्यों भुगतनी पड़े? कानूनी और दस्तावेजी प्रक्रियाओं में देरी के कारण एक बच्चे की शिक्षा और भविष्य संकट में पड़ गया है। न्याय की उम्मीद लेकर पीड़ित मां मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंची और कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की।
कानूनी रूप से गोद लेने के बाद भी दस्तावेज अधूरे
नाव घाट निवासी नेहा दीक्षित ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि उनका दूसरा विवाह सलिल दीक्षित से हुआ था। उन्होंने बताया कि उनके पूर्व पति से जन्मे पुत्र को वर्तमान पति ने विधिवत कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद लिया था। इसके बावजूद बच्चे के आधार कार्ड और समग्र आईडी में वर्तमान पिता का नाम आज तक दर्ज नहीं हो सका है, जिससे कई प्रशासनिक और शैक्षणिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
वैवाहिक विवाद बना बच्चे की पढ़ाई में बाधा
पीड़िता के अनुसार वर्तमान में उनका और उनके पति के बीच वैवाहिक विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। इसी विवाद के चलते दस्तावेजों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया अधूरी रह गई है। दूसरी ओर स्कूल प्रशासन बच्चे के शैक्षणिक रिकॉर्ड के लिए आधार एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज मांग रहा है। दस्तावेज पूरे न होने के कारण कई जरूरी प्रक्रियाएं अटक गई हैं और बच्चे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बच्चे का क्या दोष?
पीड़ित मां का कहना है कि यह विवाद पति-पत्नी के बीच है, लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान एक मासूम बच्चे को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कहा कि केवल दस्तावेजी औपचारिकताओं के कारण बच्चे का भविष्य अंधकार में नहीं जाना चाहिए। बाल हित और मानवीय दृष्टिकोण से मामले का शीघ्र समाधान किया जाए।
कलेक्टर से की त्वरित हस्तक्षेप की मांग
नेहा दीक्षित ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देकर बच्चे के आधार कार्ड और समग्र आईडी में नियमानुसार आवश्यक सुधार की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए, ताकि उसकी शिक्षा बाधित न हो और भविष्य सुरक्षित रह सके।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले में कितनी तत्परता दिखाता है। यदि दस्तावेजी बाधाएं समय रहते दूर नहीं हुईं, तो इसका सीधा असर उस मासूम के शिक्षा के अधिकार और भविष्य पर पड़ सकता है।
