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घोटाले बाज कार्यपालन अभियंता को आख़िर किसका संरक्षण…




*घोटाले के आरोप चार्जशीट भी दाखिल इसके बाद भी नही हटे कार्यपालन अभियंता सांसद ने लिखा ऊर्जा मंत्री को पत्र* 

दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मण्डला। आदिवासी बाहुल्य जिले को देश प्रदेश में घोटाले भ्रष्टाचार ग़बन और लूट के नाम से जाना जायेगा जहाँ सरकारी योजनाओं में लूट मची हुई हैं और बेख़बर जिम्मेवार और मुखिया जाच कर जाच कार्यवाही रद्दी की टोकरी में रखें धुल खाती रहती हैं और भ्रष्ट अधिकारी अपना काम और तेज़ी से करता रहता है भय मुक़्त होकर 

         वही जानकारी के अनुसार जिले विद्युत विभाग के काले कारनामे किसी से छुपे नही हैं अधिकारियों की कार्यप्रणाली पूरी व्यवस्था पर प्रश्र चिन्ह लगा रही है। परेशान जनता जब जबावदार जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचती है और शिकायत दर्ज कराती है। ऐसे में जब कभी जनप्रतिनिधि ऐसे अधिकारियों को हटाने की मांग करते हैं या पत्राचार करते हैं तो इन पत्राचारों को भी पैसे के दम पर दबा दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला कार्यपालन अभियंता राकेश अमपुरी जो कि मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड मंडला एसटीसी में पदस्थ हैं का सामने आया है लंबे समय से पदस्थ अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल है। वहीं बीते माह ऊर्जा मंत्री के नाम सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने पत्र लिखते हुए इन्हें हटाने मांग की थी यहीं नही बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा ने भी विधानसभा में प्रश्र लगाकर ऊर्जा विभाग से सवाल किए थे जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सौभाग्य जैसी महत्वपूर्ण योजना में घपलेबाजी के साथ जांचों को प्रभावित करने में संबंधित अधिकारी की बड़ी भूमिका रही है। चार्जशीट तय होने के बाद भी जैसे तैसे जुगाड़ कर वे पुन: जिला में पदस्थ हो गए। वहीं पद स्थापना दिनांक से लेकर अब तक का कार्यकाल कोई खासा नही रहा है। ऐसे में इनकी पद स्थापना से कर्मचारियों में रोष और बिजली संबंधी समस्याएं भी जस की तस बनी हुई हैं। वहीं सूत्रों का कहना है कि संरक्षण के चलते संबंधित अधिकारी यहां से नही हट पाए हैं और तो और ऊर्जा मंत्री का पत्र भी मंडला और जबलपुर कार्यालय से गायब कर दिया गया है। सच क्या है यह तो जांच के बाद ही तय होगा लेकिन ऐसे अधिकारियों की पद स्थापना से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो जाते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि संबंधित अधिकारी ठेकेदारी से भी जुड़ चुकें हैं। जिले का बिजली विभाग इन दिनों आम लोगों के बीच लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक उपभोक्ताओं के बीच एक जैसी शिकायतें सुनाई दे रही हैं। लोगों का आरोप है कि विभाग में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के कारण व्यवस्था में पारदर्शिता कमजोर हुई है और आम उपभोक्ताओं को छोटे-छोटे कामों के लिए भी अनावश्यक रूप से परेशान होना पड़ रहा है। नया बिजली कनेक्शन, मीटर बदलवाना, गलत बिल का सुधार, ट्रांसफार्मर बदलने की मांग या लाइन सुधार जैसे सामान्य कार्य भी समय पर नहीं हो पा रहे हैं। इससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिजली विभाग का कार्यालय समस्या समाधान का केंद्र कम और चक्कर लगवाने वाला कार्यालय अधिक बनता जा रहा है। कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी दिनों तक कोई सुनवाई नहीं होती। कई बार एक टेबल से दूसरी टेबल तक फाइलें घूमती रहती हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलता। इससे उपभोक्ताओं का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। सबसे अधिक सवाल विभाग में वर्षों से जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने से विभाग में कथित रूप से ऐसी कार्यशैली विकसित हो गई है जिसमें जवाबदेही कम और मनमानी अधिक दिखाई देती है। नागरिकों का आरोप है कि कुछ मामलों में प्रभावशाली लोगों के कार्य तेजी से हो जाते हैं जबकि आम व्यक्ति को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। कई गांवों में ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद दिनों तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होती। बरसात के मौसम में बार-बार बिजली गुल होना तार टूटना और कम वोल्टेज जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। किसानों का कहना है कि सिंचाई के समय बिजली नहीं मिलने से उनकी फसल प्रभावित होती है लेकिन शिकायतों का निराकरण अपेक्षित गति से नहीं हो पाता। बिजली बिलों को लेकर भी उपभोक्ताओं में असंतोष दिखाई दे रहा है। कई लोगों का आरोप है कि वास्तविक खपत से अधिक राशि के बिल जारी हो रहे हैं। बिल सुधार के लिए आवेदन देने के बावजूद कई सप्ताह तक कार्रवाई नहीं होती। ऐसे में उपभोक्ताओं को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिले के कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभाग में काम कराने के लिए कथित रूप से सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन यदि ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो यह स्वयं में गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। यदि आरोप निराधार हैं तो विभाग को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि इनमें सच्चाई है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी विभाग में लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने से पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो सकती है। इसी कारण समय-समय पर स्थानांतरण की व्यवस्था बनाई जाती है ताकि प्रशासनिक निष्पक्षता बनी रहे। ऐसे में मंडला बिजली विभाग में भी लंबे समय से जमे अधिकारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की मांग जोर पकड़ रही है। स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि बिजली विभाग केवल बिल वसूलने तक सीमित नहीं रह सकता। उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध सेवा उपलब्ध कराना है। यदि आम नागरिक अपनी मूलभूत सुविधा के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाएंगे तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़े करेगा। बरसात के इस मौसम में बिजली व्यवस्था की परीक्षा होती है लेकिन जिले के कई हिस्सों में आए दिन होने वाली बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई-कई घंटे बिजली बंद रहने से पेयजल व्यवस्था छोटे उद्योग व्यापार और विद्यार्थियों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है।

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