दैनिक रेवांचल टाईम्स - मंडला, जिले के आदिवासी बहुल भुआ-बिछिया क्षेत्र में स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील व्यवस्था पर कथित झोलाछाप डॉक्टरों की सक्रियता के आरोप गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुंच और जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता अथवा पंजीयन के उपचार किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि इन शिकायतों में सच्चाई है तो यह महज नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि ग्रामीण मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का गंभीर मामला है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार दानीटोला क्षेत्र में मिंटू मलिक नामक व्यक्ति के बंगाली डॉक्टर के रूप में उपचार करने की जानकारी सामने आई है। वहीं सुहाने जी के बाजू से गुजरने वाली सड़क के आसपास कथित रूप से कई झोलाछाप डॉक्टरों के एक साथ बैठकर उपचार करने की भी स्थानीय स्तर पर चर्चा है। इसी तरह मांझीपुर क्षेत्र में भी एक व्यक्ति द्वारा कथित रूप से चिकित्सा किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन लोगों के पास मान्य चिकित्सकीय डिग्री, मेडिकल पंजीयन और उपचार की वैधानिक अनुमति है या नहीं? यदि है तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक अथवा सक्षम विभाग द्वारा सत्यापित क्यों नहीं किए जाते और यदि नहीं है तो स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक मरीजों से उपचार के नाम पर भारी-भरकम राशि लिए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में साधारण बीमारी समझकर यदि कोई मरीज गंभीर बीमारी का उपचार ऐसे कथित चिकित्सकों से करवाता रहा और समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक तक नहीं पहुंच पाया, तो स्थिति जानलेवा तक हो सकती है। ऐसे में किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा गलत दवा, गलत मात्रा या गलत उपचार किए जाने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?
कागजों में स्वास्थ्य व्यवस्था, जमीन पर कौन कर रहा इलाज?
भुआ-बिछिया क्षेत्र में यदि वास्तव में बिना वैध योग्यता और पंजीयन के लोग चिकित्सा कर रहे हैं तो यह स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सीधा सवाल है। आखिर विभागीय अमला क्षेत्र में संचालित निजी क्लीनिकों और उपचार केंद्रों का नियमित सत्यापन करता है या फिर सब कुछ शिकायत आने के बाद ही दिखाई देता है?
क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से भुआ-बिछिया के संपूर्ण क्षेत्र में संचालित निजी क्लीनिकों एवं कथित झोलाछाप उपचार केंद्रों का व्यापक अभियान चलाकर सत्यापन कराने की मांग की है। संबंधित व्यक्तियों की शैक्षणिक योग्यता, चिकित्सकीय पंजीयन, क्लीनिक संचालन की अनुमति, दवाओं के उपयोग एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की गई है।
जांच होगी या फिर शिकायतें भी फाइलों में दब जाएंगी?
अब सवाल सीधे स्वास्थ्य विभाग से है—क्या विभाग इन शिकायतों का संज्ञान लेकर मौके पर जांच करेगा, या चिकित्सा के नाम पर चल रही कथित गतिविधियां यूं ही जारी रहेंगी? यदि संबंधित लोगों के पास वैध योग्यता और पंजीयन है तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई होना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि चिकित्सा कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां अनुभव या अंदाज के आधार पर मरीजों की जिंदगी के साथ प्रयोग किया जा सके। इसलिए निष्पक्ष और व्यापक जांच जरूरी है, ताकि यह साफ हो सके कि भुआ-बिछिया क्षेत्र में कौन वैध रूप से चिकित्सा कर रहा है और कौन चिकित्सा के नाम पर ग्रामीणों की मजबूरी का फायदा उठा रहा है।
