घुघरी विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, उपभोक्ता बोले—बिलिंग सिस्टम में आखिर चल क्या रहा है?
रेवांचल टाइम्स, मंडला, घुघरी। विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली वैसे तो उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने और बिल वसूलने के लिए जानी जाती है, लेकिन घुघरी में सामने आया एक मामला विभागीय व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि जिस उपभोक्ता ने समय पर अपना बिजली बिल जमा किया, उसके घर की बिजली काट दी गई। वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों के नाम पर भी बिजली के बिल जारी किए जा रहे हैं, जहां कथित तौर पर न बिजली का कनेक्शन है और न ही मीटर लगा है।
मामला सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विभाग का बिलिंग सिस्टम आखिर किस आधार पर काम कर रहा है? बिल जमा करने वाले को बकायेदार समझकर बिजली काटी जा रही है और जहां कनेक्शन ही नहीं है, वहां बिल पहुंच रहा है—तो फिर विभाग के रिकॉर्ड और जमीन की हकीकत के बीच यह दूरी किसकी लापरवाही है?
बिल जमा किया, फिर भी अंधेरा!
उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली बिल समय पर जमा करने के बाद भी यदि किसी उपभोक्ता का कनेक्शन काट दिया जाता है तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि उपभोक्ता को अनावश्यक परेशानी में डालने वाला गंभीर मामला है।
बिजली कटने के बाद उपभोक्ता को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। बिल की रसीद दिखाने के बावजूद यदि समस्या का तत्काल समाधान नहीं होता तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि विभाग में भुगतान की जानकारी अपडेट करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
जहां मीटर नहीं, वहां बिल कैसे?
दूसरी ओर बिना मीटर अथवा कथित तौर पर बिना बिजली कनेक्शन वाले परिसरों के नाम पर बिल जारी होने की शिकायत ने विभाग की बिलिंग व्यवस्था पर एक और सवाल खड़ा कर दिया है।
यदि वास्तव में किसी स्थान पर कनेक्शन मौजूद नहीं है, तो उसके नाम पर विद्युत बिल किस आधार पर बनाया जा रहा है? क्या विभागीय रिकॉर्ड में ऐसे कनेक्शन दर्ज हैं जो मौके पर मौजूद ही नहीं हैं? या फिर पुराने रिकॉर्ड को अपडेट करने में लापरवाही बरती जा रही है?
विभागीय रिकॉर्ड में ‘बिजली’ है, जमीन पर नहीं!
घुघरी के इस मामले को अगर व्यंग्य की नजर से देखें तो लगता है कि विद्युत विभाग की बिजली अब केवल तारों में नहीं, बल्कि रिकॉर्ड की फाइलों में भी दौड़ रही है।
जहां मीटर नहीं है, वहां बिल पहुंच रहा है।
जहां बिल जमा है, वहां कनेक्शन कट रहा है।
और जहां उपभोक्ता शिकायत लेकर पहुंच रहा है, वहां उसे समाधान के बजाय कार्यालय के चक्कर मिल रहे हैं।
ऐसे में उपभोक्ता शायद यही सोचने को मजबूर हो जाए कि ‘बिजली का कनेक्शन लेना आसान है या विभागीय रिकॉर्ड में अपनी सही स्थिति ढूंढना?’
बिलिंग सिस्टम कमाल ‘बिजली गई तो गई, रिकॉर्ड नहीं जाना चाहिए!’
व्यवस्था पर तंज कसें तो ऐसा लगता है कि विभाग का सिस्टम कह रहा हो
“आपने बिल जमा कर दिया? बहुत अच्छी बात है। अब बिजली भी जमा कर दीजिए!”
और जिस घर में कनेक्शन ही नहीं है, वहां शायद सिस्टम का संदेश हैं
“कनेक्शन हो या न हो, बिल तो आपका अधिकार है!”
हालांकि यह महज व्यंग्य है, लेकिन वास्तविक शिकायतों का समाधान होना जरूरी है। क्योंकि बिजली विभाग की जिम्मेदारी केवल बिल बनाना और वसूली करना नहीं, बल्कि सही उपभोक्ता के नाम पर सही बिल, सही मीटर रीडिंग और सही कनेक्शन रिकॉर्ड बनाए रखना भी है।
*उठ रहे गंभीर सवाल*
- बिल जमा होने के बावजूद कनेक्शन किस आधार पर काटा गया?
- बिना मीटर या कनेक्शन के बिल जारी होने की शिकायत सही है तो ऐसा कैसे हुआ?
- उपभोक्ता के भुगतान की जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में समय पर अपडेट क्यों नहीं हुई?
- गलत बिल जारी होने पर उसे सुधारने की जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी की है?
- क्या विभाग समय-समय पर अपने कनेक्शन और बिलिंग रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन करता है?
- शिकायत मिलने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कितने समय में उसका निराकरण करते हैं?
अब विभाग की सफाई का इंतजार
घुघरी के उपभोक्ताओं की मांग है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जिन उपभोक्ताओं के बिल गलत जारी हुए हैं, उनमें सुधार किया जाए और जिन उपभोक्ताओं ने समय पर भुगतान किया है, उनके कनेक्शन काटे जाने की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जाए।
क्योंकि बिजली का बिल उपभोक्ता की जेब से जाता है, लेकिन उसकी सही जानकारी विभाग के सिस्टम में रहनी चाहिए।
अब देखना यह है कि विद्युत विभाग इन शिकायतों को महज तकनीकी त्रुटि बताकर पल्ला झाड़ता है या फिर अपने रिकॉर्ड और जमीन पर मौजूद वास्तविक कनेक्शनों का मिलान कर व्यवस्था को दुरुस्त करता है।
आखिर सवाल बिजली का ही नहीं है सवाल उस व्यवस्था की विश्वसनीयता का है, जिस पर उपभोक्ता हर महीने अपना पैसा और भरोसा दोनों जमा करता है।

