लाइसेंसी शराब दुकानों से कथित तौर पर वाहनों में भरकर गांव-गांव पहुंचाई जा रही शराब! आबकारी विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
दैनिक रेवांचल टाईम्स - मंडला। जिले में नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत संचालित शराब दुकानों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिछिया थाना क्षेत्र में लाइसेंसी शराब दुकानों से कथित तौर पर शराब को वाहनों के माध्यम से गांव-गांव और नगर-नगर पहुंचाए जाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह गतिविधि लंबे समय से जारी है, बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
सबसे गंभीर आरोप भुआ-बिछिया स्थित शराब दुकान को लेकर लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक बोलेरो, स्कॉर्पियो सहित करीब तीन-चार वाहनों और एक कार के माध्यम से सुबह लगभग 4 बजे से शराब की पेटियां गांवों की ओर भेजे जाने की बात सामने आ रही है। यदि ये आरोप सही हैं तो सवाल उठना लाजिमी है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब दुकान से बाहर कैसे निकल रही है और इसकी निगरानी करने वाला आबकारी अमला आखिर कहां है?
क्या लाइसेंसी दुकान से बाहर तक पहुंच रही शराब?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिछिया बाजार, बस स्टैंड और आसपास के इलाकों में भी कथित तौर पर बेनामी शराब बिक्री और अहाते जैसी गतिविधियों की शिकायतें सामने आती रही हैं। लोगों का कहना है कि जिस तरह शराब की बिक्री और आपूर्ति होने की बात सामने आ रही है, उसे देखकर ऐसा लगता है मानो सार्वजनिक स्थानों पर नियम-कायदों को ताक पर रखकर शराब का कारोबार किया जा रहा हो।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सब संबंधित विभाग की जानकारी के बिना संभव है? यदि आबकारी विभाग को इसकी जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं? और यदि जानकारी नहीं है तो फिर विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल क्यों न उठें?
शराबबंदी नहीं तो कम से कम नियमों का पालन कौन कराएगा?
एक ओर शासन स्तर पर युवाओं और आम नागरिकों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गांव-गांव शराब पहुंचने के आरोप इन अभियानों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
शराब की अवैध बिक्री, परिवहन अथवा निर्धारित नियमों के विपरीत बिक्री की शिकायतें यदि लगातार सामने आ रही हैं तो केवल जागरूकता अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा। जिम्मेदार विभाग को मैदान में उतरकर जांच और कार्रवाई भी करनी होगी।
आबकारी विभाग और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल
स्थानीय लोगों के आरोपों ने जिला आबकारी विभाग के साथ-साथ स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन यदि शराब दुकान से नियमित रूप से वाहनों के जरिए शराब गांवों तक पहुंचाने की बात सही पाई जाती है तो यह गंभीर जांच का विषय होना चाहिए।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और आबकारी विभाग इन शिकायतों को गंभीरता से लेकर संबंधित शराब दुकानों, वाहनों, बिक्री अभिलेखों और कथित सप्लाई नेटवर्क की जांच करता है या फिर मामला शिकायतों और चर्चाओं तक ही सीमित रह जाएगा।
जनता का सीधा सवाल है—यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा है तो फिर सुबह-सुबह वाहनों के जरिए शराब गांव-गांव पहुंचाए जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच से जिम्मेदारों को परेशानी क्यों होनी चाहिए?
