दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।जिला अस्पताल मंडला में 29 जुलाई को बेहोशी की हालत में लाई गई एक युवती के मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार युवती की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे वार्ड क्रमांक 50 में भर्ती किया गया था।
वही अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार युवती का ब्लड प्रेशर सामान्य, शुगर सामान्य तथा हीमोग्लोबिन लगभग 14 ग्राम दर्ज किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि युवती आखिर किन परिस्थितियों में बेहोश हुई थी। इस संबंध में चिकित्सकीय कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
बताया जा रहा है कि युवती के साथ कुछ युवतियां और युवक भी अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि वार्ड के भीतर ही युवती के कपड़े बदले गए तथा साथ आई कुछ युवतियों ने भी अपने कपड़े बदले। यह सब किन परिस्थितियों में हुआ और इसकी अनुमति किसने दी, यह जांच का विषय है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करीब दो घंटे बाद जब युवती को आंशिक होश आया तो वह रोने लगी और कथित रूप से अपने साथ आए युवकों से सवाल करते हुए अपने पिता से बात कराने की बात कहने लगी। इसके बाद रात लगभग 10 बजे साथ आए युवक युवती को अस्पताल से लेकर चले गए।
सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि अस्पताल प्रबंधन के पास मरीज के अस्पताल छोड़ने की कोई विधिवत जानकारी दर्ज नहीं है। आरोप है कि न तो तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, न ही ड्यूटी स्टाफ द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया और मरीज की फाइल बंद कर दी गई।
घटना के चार दिन बाद भी अस्पताल स्तर पर कोई जांच शुरू नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। मंगलवार को आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने सिविल सर्जन को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने तथा संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की। शिकायत मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आई है।
इधर जिले में ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और छात्र-छात्राओं को कथित रूप से रोजगार, प्रशिक्षण अथवा बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर विभिन्न निजी या तथाकथित कंपनियों के माध्यम से जोड़ने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि इस मामले का किसी विशेष कंपनी से संबंध है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
उठ रहे प्रमुख सवाल
युवती के बेहोश होने का वास्तविक कारण क्या था?
वार्ड के भीतर कपड़े बदलने की अनुमति किसने दी? अस्पताल से मरीज को ले जाते समय आवश्यक औपचारिकताएं क्यों नहीं पूरी की गईं?
मरीज के अस्पताल छोड़ने की सूचना तत्काल पुलिस को क्यों नहीं दी गई?
चार दिन तक अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू क्यों नहीं की?
क्या इस पूरे मामले में किसी संगठित गिरोह या अन्य व्यक्तियों की भूमिका है?
अब इस पूरे मामले में पुलिस जांच और अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।


