GeM पोर्टल से खरीदी पर उठे सवाल, 50 लाख के ओपन जिम और बार-बार स्ट्रीट लाइट खरीदी जांच के घेरे में; ईओडब्ल्यू जांच की मांग तेज
दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला, नैनपुर। नगर पालिका परिषद नैनपुर में ऑनलाइन खरीदी और GeM पोर्टल के माध्यम से किए जा रहे लाखों रुपये के खरीद कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
वही नगर के नागरिकों, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि नगर पालिका में लगातार हो रही खरीदी में पारदर्शिता का अभाव है तथा परिषद के निर्वाचित पार्षदों को भी खरीदी से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज और जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती। पूरे मामले की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग जोर पकड़ रही है।
आरोपों के अनुसार नगर पालिका द्वारा लगभग ₹50 लाख की लागत से ओपन जिम स्थापित कराया गया, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मौके पर दिखाई देने वाले कार्य और सामग्री को देखकर यह विश्वास करना कठिन है कि वास्तव में ₹50 लाख की लागत का कार्य हुआ होगा। लोगों का कहना है कि यदि कार्य पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुआ है तो उसकी प्रशासकीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, माप पुस्तिका (एमबी), गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, GeM पोर्टल से खरीदी का विवरण, बिल एवं भुगतान संबंधी सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
इसी प्रकार नगर पालिका की स्ट्रीट लाइट खरीदी भी सवालों के घेरे में है।
जानकारी के अनुसार वर्तमान परिषद के कार्यकाल में पहले लगभग ₹24 लाख, उसके बाद ₹10 लाख तथा अब पुनः लगभग ₹30 लाख की स्ट्रीट लाइट खरीदी की प्रक्रिया चल रही है। नगरवासियों का कहना है कि इतनी कम अवधि में बार-बार लाखों रुपये की स्ट्रीट लाइट खरीदने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है, इसका स्पष्ट उत्तर नगर पालिका को देना चाहिए। साथ ही पूर्व में खरीदी गई स्ट्रीट लाइटों का उपयोग, उनकी वर्तमान स्थिति तथा उनका भौतिक सत्यापन भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
सबसे गंभीर आरोप यह लगाए जा रहे हैं कि 50 वॉट की एलईडी स्ट्रीट लाइट को 200 वॉट दर्शाकर बिलिंग किए जाने की आशंका है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला साबित हो सकता है। आरोपों में नगर पालिका के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों तथा तकनीकी अमले की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए नगर पालिका के कई पार्षदों का भी दावा है कि उन्हें करोड़ों रुपये की खरीदी से जुड़े प्रस्तावों की पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती। उनका कहना है कि परिषद की बैठकों में कब और किन परिस्थितियों में ऐसे प्रस्ताव पारित हो जाते हैं, इसकी जानकारी तक उन्हें नहीं मिलती। कुछ पार्षदों का आरोप है कि खरीदी से संबंधित विस्तृत दस्तावेज, तकनीकी जानकारी और भुगतान संबंधी अभिलेख भी उनके समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाते। यदि यह आरोप सही हैं तो इससे परिषद की निर्णय प्रक्रिया और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पार्षद जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं और यदि उन्हें ही करोड़ों रुपये की खरीदी की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होगी तो जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा। नागरिकों ने मांग की है कि GeM पोर्टल से की गई प्रत्येक खरीदी का ब्रांड, मॉडल, तकनीकी विनिर्देश, मात्रा, दर, आपूर्तिकर्ता का नाम, निरीक्षण रिपोर्ट, भुगतान विवरण तथा भौतिक सत्यापन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
नगर के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने पूरे मामले की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि नगर पालिका में पिछले कुछ वर्षों में GeM पोर्टल एवं अन्य माध्यमों से हुई सभी खरीदी की वित्तीय और तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। यदि जांच में फर्जी बिलिंग, गुणवत्ता में कमी, क्षमता से कम सामग्री की आपूर्ति या किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, तकनीकी अमले, आपूर्तिकर्ताओं तथा जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब नगरवासियों की निगाहें जिला प्रशासन और राज्य शासन पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका की करोड़ों रुपये की खरीदी पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है तो जांच से सत्य स्वयं सामने आ जाएगा, और यदि कहीं भी अनियमितता हुई है तो उसके दोषियों पर सख्त कार्रवाई होना जनहित और शासन की पारदर्शिता के लिए आवश्यक है।

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