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राजस्व जांच में बिना डायवर्जन प्लॉट बिक्री के तथ्य दर्ज, फिर भी जारी रजिस्ट्रियां! आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध कॉलोनियों का कारोबार?



शिकायत, नोटिस और मौका जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं; आम लोगों की जीवनभर की कमाई पर मंडरा रहा खतरा




दैनिक रेवांचल टाइम्स | निवास, मंडला मंडला जिले के निवास क्षेत्र में खेती की भूमि पर कथित रूप से अवैध कॉलोनियां विकसित कर प्लॉट बेचने का मामला अब केवल शिकायतों तक सीमित नहीं रह गया है। शिकायत, राजस्व विभाग की नोटिस कार्रवाई और मौका जांच के दस्तावेज़ों के बाद भी यदि प्लॉटों की बिक्री और रजिस्ट्रियां जारी हैं, तो यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

ग्राम आमाडोंगरी स्थित संबंधित खसरा नंबरों की भूमि को लेकर वर्ष 2025 में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बिना भूमि व्यपवर्तन (डायवर्जन) और बिना सक्षम अनुमति के कॉलोनी विकसित कर प्लॉटों का विक्रय किया जा रहा है।



शिकायत के बाद हुई जांच

शिकायत के आधार पर राजस्व विभाग ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर मौका जांच की। उपलब्ध जांच कार्यवाही में उल्लेख है कि संबंधित भूमि से कई व्यक्तियों को भूखंड बेचे जा चुके हैं। साथ ही जांच में यह भी दर्ज किया गया कि मौके पर आवश्यक कॉलोनी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं तथा भूमि व्यपवर्तन एवं TNCP लेआउट/स्वीकृति संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।

यदि जांच में ऐसे तथ्य दर्ज हैं तो प्रश्न यह उठता है कि आगे की वैधानिक कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई?

कार्रवाई रुकी या किसी ने रोक रखी है?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों और जांच के बावजूद प्लॉटों का विक्रय लगातार जारी है। यदि ऐसा है, तो आम नागरिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासनिक विभागों की जिम्मेदारी बनती है।

सबसे बड़ा खतरा खरीदारों को

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति बिना सभी वैधानिक अनुमतियों वाली कॉलोनी में प्लॉट खरीदता है, तो भविष्य में उसे सड़क, नाली, बिजली, पानी, नामांतरण अथवा अन्य कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए प्रशासन की समय पर कार्रवाई आम नागरिकों के हित में महत्वपूर्ण है।

उठ रहे हैं सवाल

शिकायत के बाद भी प्लॉटों की बिक्री क्यों जारी है? मौका जांच में दर्ज तथ्यों पर आगे क्या कार्रवाई हुई?

यदि आवश्यक अनुमतियां नहीं थीं, तो संबंधित विभागों ने क्या कदम उठाए?

क्या खरीदारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है?

प्रशासन से अपेक्षा

जिला प्रशासन को चाहिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यदि किसी प्रकार का नियम उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करे, साथ ही आम नागरिकों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।

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