रेवांचल टाईम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी माँ ने अपनी सन्तानों की सुख शान्ति सम्रद्धि के लिए रक्षा बंधन के छठवें दिन हरछठ का व्रत रखा और पूरे दिन व्रत रहकर माँ इस परम्परा के अनुसार इस पूजा में गौ माता की पूजा न करते हुए आज के दिन यमराज के वाहन भैस से बनाई गई सभी वस्तुओं के उपयोग किया जाता साथ ही हरछठ के दिन भैस के गौबर से लेकर दूध दही घी अन्य भैस से बनने वाली सभी सामाग्री का उपयोग किया जाता है हरछठ के एक दिन रात पहले से ही माताओं बीते रात को महुआ की दातुन कर रात को सोती है और सुबह होते ही महुआ की चाय महुआ का खाना पशी के चावल का उपयोग किया करती है जहाँ माँओ ने इस व्रत के लिए पूरे साल अपने लाल के लिए भूखे प्यासे रह कर भैस की सामग्री के साथ साथ महुआ से बनी सामग्री सेवन करती है।
वही पंडित श्री मुकेश तिवारी जी ने बताया कि ये प्रतिवर्ष माँओ अपने पुत्र लाल को दुनिया मे कोई तकलीफ़ दुख न हो इस कारण हरछठ के दिन बाबा महाकाल का व्रत रखती है। वही इस व्रत रखने का महत्व है, कि वृत भाद्र पद कृष्ण पक्ष की षष्टि को किया जाता है इसे प्रायः हिन्दू महिलाएँ अपने बच्चों के लिए दीर्घ आयु हेतु करती है इसमें भगवान शिव शंकर माता पार्वती षण्मुख अर्थात कार्तिकये एंव गणेश की पूजन की जाती है और इस पूजा को पूर्ण विधि विधान से किया जाता है, इस पूजा में खेत मे निकले काशी पलाश, आदि को जमीन में स्थापित कर उसके नीचे एक पटा में पत्ते बिछाया कर या नदी में उपज कापू से चारो की प्रतिमाएं बनाकर रखते है या फिर पशी चार मुंज रखकर पूजन करते है गौरी गणेश और कलश स्थापित कर महिलाएँ पूजा करते हुए स्तापित पूजन सामग्री का परिक्रमा करते है भैस के दूध गौबर घी और बिना जुताई की गई भूमि में हुई कि चावल जिसे पशी के नाम से जाना जाता है महुये आदि का सेवन करती है इस पूजन में छै नई बॉस से बनी टोकनी में सतनाजा व सात प्रकार का अनाज भेंट करती है इसके पूजन किये गए ब्रामण से आशीर्वाद लेकर उनको यथा शक्ति भेंट कर ब्रत को तोड़ती है।


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