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Wednesday, July 5, 2023

नये भवन से अधिक स्टीमेट बना मरम्मत कार्य का स्टीमेट फर्जी स्टीमेट बनाने वालो पर होगी कार्यवाही या फिर दिया जायेगा इनाम....




जितने का भवन नही उस से ज्यादा का बना दिया स्टीमेट

रेवांचल टाईम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में भ्रष्टाचार ग़बन सरकारी धन में लूट आज आम बात हो गई है सरकारी योजनाओं में कमीशन ख़ोरी आज इस कदर बढ़ गई है कि जितने का काम होना है उससे चार गुना स्टीमेट बना कर सरकारी धन में जनजातीय कार्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी अपनी जेबें भर रहे है और जनता और जिला प्रशासन की आँखों मे धूल झोख रहे है और सरकार धन में खुली लूट मचा रखी है इन जिम्मेदारो को पता है कि मंडला जिले में अंधे पीसे और कुत्ते खायें जैसे राज चल रहा हैं। सहायक आदिवासी जनजाति विभाग में सालों से लूट का कारोबार चल रहा है कभी खरीदी के नाम पर तो कभी ट्रासफर के नाम पर तो कभी योजनाओं में काम देने के नाम पर और अब खुलेआम स्कूलों के मरम्मती कारण के नाम पर लूट मचा रखी है। 

         आज तक अपने ग्राम पंचायतों व लोक निर्माण विभाग में और ग्रामीण यांत्रिकी विभाग में निर्माण के नाम पर काफी भ्रष्टाचार देखा और सुना होगा लेकिन क्या आपने आदिवासी जनजातीय विभाग द्वारा वर्षो से मरम्मत के नाम पर किए जारहें भ्रष्टाचार के बारे में सुना है-? 

        आज हम आपको बताएंगे कि किस कदर सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग मंडला के अंतर्गत अधिकारी की मिलीभगत से वर्षो से नये भवन निर्माण व मरम्मत के नाम से भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इसकी बानगी आप सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग मंडला द्वारा हाल में जिले के शासकीय संस्थाओं में कराए जारहें मरम्मत कार्यो में देख सक्ते है। बतादें कि जनजातीय कार्य विकास विभाग मंडला द्वारा जिले के समस्त विकासखंडों की 51 शैक्षणिक संस्थाओं के लिए करीब 11 करोड़ के आसपास मरम्मत कार्य का निर्माण विभिन्न ठेकेदारों को दिया है जिनके नाम इस प्रकार है। 1- शैलेन्द्र मिश्रा जो कि पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष के भाई है 2- जाकिर हुसैन 3- विश्वास पटेल 4- दिनेश भगेल 5- संदीप कुमार दुबे 6- पवन शर्मा 7- अनिरूद्ध शर्मा जैसे दिगज्ज ठेकेदारों को उक्त विभाग से मरम्मत कार्य मिला है। 


कमीशन ख़ोरी के चलते विभाग और ठेकेदार की साठगांठ के चलते जितने का भवन नही उस से ज्यादा का बना दिया स्टीमेट 


वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जनजातीय कार्य विकास विभाग मंडला के अनुरोध पर जिले की शासकीय शैक्षणिक संस्थाओं की मरम्मत के लिए करोड़ो रुपये की राशि जारी की गई है जिनका ठेका विभाग के चहेते ठेकेदारो को मिला है लेकिन सवाल यह उठता है कि जिन जिन शासकीय शैक्षणिक संस्थानों की मरम्मत होनी है उन में बहुत से भवन ऐसे है कि जिस समय वो बने थे उस समय भी उक्त भवनों की लागत उतनी नही थी जितनी राशि अब उन्ही भवनों की मरम्मत के लिए जारी की गई है। जबकि उससे कम राशि में नया भवन बनके तैयार हो सक्ता था लेकिन उसके बाउजूद कमीशन और चहेते ठेकेदारो को फ़ायदा पहुँचाने के चक्कर में अधिकारियों ने आँखे बंद करके मरम्मत के नाम पर लाखों करोड़ों रुपये जारी कर दिए जो कही न कही ठेकेदारों, अधिकारी व कर्मचारियों की संलिप्तता को दर्शाते हुए एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। इसके पहले भी विभाग में खुला भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा था पर ये सब अंदर ही अंदर चल रहा था 


शैक्षणिक संस्थाओं की मरम्मत का स्टीमेट बनाने वालो पर क्या होगी कार्यवाही या फिर दिया जायेगा अभयदान 


वैसे तो मंडला जिले की जनजातीय कार्य विकास विभाग ने शैक्षणिक संस्थाओं में मरम्मत व निर्माण के नाम पर वर्षो से भ्रष्टाचार होते आरहा है लेकिन अगर बीते पाँच वर्षों के मरम्मत कार्य या निर्माण की जाँच बारीकी से हो जाए तो करोड़ो अरबों का भ्रष्टाचार सामने आ सकता है। वही हम वर्ष 2022-23 में जो मरम्मत कार्य हो रहे है उन्ही की जाँच हो जाए तो एस्टीमेट बनाने वाले सहित उक्त कार्यो के लिए राशि स्वीकृत करता सहित तमाम आला अधिकारी संलिप्त मिलेगे वही हमें शैक्षणिक संस्थाओं के जिम्मेदारों ने बताया उक्त मरम्मत कार्य का स्टीमेट उपयंत्री रमेश परमार द्वारा बनाया गया जो वर्तमान भवनों की लागत से कई गुना ज्यादा बनाया गया है। वही स्थानीय शिक्षा समिति के अध्यक्ष व सदस्यों द्वारा उक्त मरम्मत कार्यो की जाँच की मांग की है। साथ ही कहाँ है अगर जल्द से जल्द स्टीमेट बनाने वालों और जिम्मेदारो सहित उक्त कार्यो को स्वीकृति देने वालो पर कार्यवाही नही हुई तो हम धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगें। और न्यायालय तक जाकर हो रहे भ्रस्टाचार और भ्रस्ट अधिकारियों के ख़िलाफ़ याचिका दायक करने की बात कही है वही आये दिन उक्त मरम्मत कार्य मे साठगांठ की ख़बरे लगातार दैनिक रेवांचल समाचार पत्र में प्रकाशित की जा रही हैं इसके बाद भी न जिला प्रशासन और न जिम्मेदार जन प्रतिनिधि अपनी प्रतिक्रिया जाहिर कर रहे है इससे यह प्रतीत होता है कही न कही हो रहे इस भ्रष्टाचार और ग़बन में सब की हिस्सेदारी बनी हुई नजर आ रही जो नन्हे मुन्ने बच्चों के भविष्य बनाने के स्थान तक को अपने निजी स्वार्थ के चलते भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रहे है।

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