वन ग्राम होने से मिर्चा खेरो गांव का ठप्प पड़ा विकास
दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला आजादी के बाद से ही जनप्रतिनिधि दिखा रहे हैं गांव के विकास का सपना
आदिवासी वन ग्राम मिर्चा खेरो का वन ग्राम होने के कारण विकास ठप्प पड़ा है।इस गांव तक पहुंचने के लिए कांक्रीट या डाम्हल किसी भी प्रकार की सड़क आजादी के बाद अब तक भी नहीं बनाई जा सकी है। जिसके कारण इस गांव के रहवासियों और इस गांव तक आने-जाने वालों को आवागमन की भारी समस्या बनती है।आवागमन का साधन नहीं होने से गांव का विकास भी पूरी तरह ठप्प पड़ा हुआ है।और तो और इस गांव में रिश्तेदारी करने में भी लोग कतराते हैं।
समाज सेवी पी.डी.खैरवार एवं सहजान परस्ते के द्वारा गांव तक पहुंचकर ग्रामीणों से भेंट के दौरान हाल-चाल जानने पर सड़क के अलावा और भी समस्याओं का पिटारा खोल दिया गया।तरह तरह की समस्याओं से ग्रस्त ग्रामीणों ने बताया,कि उनका गांव मिर्चा खेरो वन विभाग के अधीन वन ग्राम में आता है।यह मंडला जिले के मोहगांव विकासखंड अंतर्गत मचला ग्राम पंचायत का पोषक ग्राम है।इस गांव में लगभग 20 आदिवासी परिवार निवास करते आ रहे हैं।इस गांव तक पहुंचने के लिए एकमात्र रास्ता लगभग दो किलोमीटर लंबा उबड़ खाबड़ कच्चा मार्ग ही नसीब है।वन विभाग या अन्य योजनाओं के तहत् भी कंक्रीट या डाम्हल सड़क अभी तक नहीं बनवाई जा सकी है।अब तक सड़क बनवा देने का आस्वासन देकर सरपंच,जनपद,जिला सदस्य, विधायक और सांसद चुनाव जीतते आ रहे हैं।जबकि इन सभी के अलावा ग्राम पंचायत एवं वन विभाग के अधिकारियों को भी ग्रामीण अनेकों बार निवेदन-आवेदन करते थक चुके हैं। बावजूद आश्वासन के अब तक कोई भी समाधान नहीं निकाला जा सका है। ग्रामीणों की ओर से शैलू राम परते ने बताया,कि गांव में वन विभाग के द्वारा लाखों खर्च करके बनाई गई भव्य बिल्डिंग समुदायिक भवन भूत बंगला बनी खड़ी है,जिसका अभी तक किसी भी तरह से उपयोग नहीं हो पा रहा है।इस गांव में प्रधानमंत्री आवास भी कम परिवारों का बनवाया जा सका है। शेष बचे परिवारों के लिए पूछने पर चुनावों के बाद ही बन पाना जिम्मेदारों के द्वारा कहा जा रहा है।
ग्रामीणों ने इस समाचार के माध्यम से शासन प्रशासन से मांग की है,कि इस गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क जल्द बनवाई जाए ताकि प्राथमिक स्कूल की कक्षाओं के बाद की पढ़ाई के लिए पढ़ने गांव से बाहर जाने वाले बच्चों तथा ग्रामीणों की आवाजाही की तकलीफ कम हो सके और आवागमन के साधन से गांव का विकास हो सके।

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