मण्डला 16 मार्च 2023
कृषि विज्ञान केन्द्र
मण्डला के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. के.व्ही. सहारे के मार्गदर्शन में
केन्द्र डॉ. आर.पी. अहिरवार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन एवं आदिवासी
उपपरियोजना अंतर्गत जायद में दलहन का रकबा बढ़ाने के उद्देश्य से मूंग की एम.एच. 421 किस्म का बीज एवं जैव उर्वरकों जैसे राइजोबियम, पी.एस.बी. एवं जैव कारक ट्राईकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास का वितरण ग्राम खम्हरिया
एवं बीजेगांव तहसील नारायणगंज जिला मण्डला में आयोजित कृषक संगोष्ठी में किया गया।
कृषक संगोष्ठी में केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. आर.पी. अहिरवार ने बताया कि मूंग की
एम.एच. 421 किस्म हरियाणा विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2014 में अधिसूचित कर दिया गया था। यह किस्म बीज रोग प्रतिरोधक
सहनशील और उत्पादन देने की दृष्टि से काफी अच्छी किस्म मानी जाती है, पीला मोजेक रोग मुक्त किस्म है इसका उत्पादन 8-10 क्विंटल प्रति
एकड़ लिया जा सकता है। यह किस्म 60-65 दिन में पककर
तैयार हो जाती है बड़ी बात यह है कि गर्मियों में तैयार होने वाली इस किस्म की
फल्लियाँ फटने व तिड़कने की समस्या भी कम पाई गई है। बीज बुवाई से पूर्व बीज उपचार
अवश्य करें। इस हेतु राइजोबियम कल्चर की 10 ग्राम मात्रा
प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। राइजोबियम से बीज उपचार करने से
वायुमंडल में उपलब्ध नत्रजन पौधों को उपलब्ध कराती है। इसी तरह से पी.एस.बी. कल्चर
की 10 ग्राम प्रति कि.ग्राम बीज की दर से उपचार करें। यह मृदा
में उपलब्ध फास्फोरस पौधों को उपलब्ध करता है। साथ ही फसल सुरक्षा हेतु जैवकारक
ट्राईकोडर्मा एवं स्यूडोमोनास की 10-10 ग्राम मात्रा
प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें ताकि फसल को कवक एवं जीवाणु जनित रोगों
से बचाई जा सके। प्रशिक्षण के दौरान करके देखो, देखकर सीखों के
सिद्धांत पर कृषकों को बीज उपचार करके दिखाया गया। साथ ही कृषकों को प्राकृतिक
खेती पर विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बीजामृत, जीवामृत, अच्छादन, व्हापसा तथा फसल सुरक्षा हेतु नीमास्त्र, अग्निअस्त्र, एवं दसपर्णी अर्क दवा घर पर कैसे तैयार कर
सकते हैं और इसके क्या फायदे हैं इस पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। केन्द्र के
पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. प्रणय भारती एवं कार्यक्रम सहायक केतकी धूमकेती ने
अपने-अपने विषय पर कृषकों को जानकारी दी।
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