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Tuesday, March 21, 2023

खसरे का टीका जरूर लगवाएँ, यह कोई प्रकोप नहीं

 

 


मण्डला 21 मार्च 2023

                मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि खसरा एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो ज्यादातर बच्चों को प्रभावित करती है लेकिन कुछ लोग इस रोग को देवी का प्रकोप समझकर उपचार करते हैं जबकि यह एक वैक्सीन से रोके जाने वाली 12 बीमारियों से सबसे अधिक वायरस जनित बीमारी है। समस्त जिलेवासियों से अपील की गई है कि 9 से 12 माह की उम्र के बच्चों में मीजल्स रूबेला से बचाव के लिए पहला टीका लगवाएं एवं 16 से 24 माह में दूसरा टीका लगवाएं। जिला टीकाकरण अधिकारी ने बताया है कि केन्द्र सरकार ने दिसम्बर 2023 तक खसरा मुक्त भारतबनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है इसलिए खसरे की बीमारी को खत्म करने के लिए 95 प्रतिशत टीकाकरण आवश्यक है।

 

खसरा कैसे फैलता है

 

                खसरा एक वायरस के कारण होता है जो एक संक्रमित बच्चे या वयस्क के नाक और गले में उत्पन्न होता है, इसमें अत्यधिक संक्रामक होने की संभावना होती है। इसका मतलब यह है कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बात करने से वायरस पर्यावरण में हवा के द्वारा फैल जाता है।

 

2019 में आया था एम.आर. का टीका

 

                खसरे की बीमारी के रोकथाम के लिए भारत में सबसे पहले 19 नबम्बर 1985 में खसरा का टीका लगाया गया। उक्त टीके को 15 जनवरी 2019 में संशोधित करते हुए एमआर का टीकाकरण अभियान में शामिल किया गया। एमआर टीके से खसरे के अलावा रूबेला से बचाव किया जा सकता है।

 

यह है खसरे का लक्षण

 

                यह एक फ्लू का स्ट्रेन है इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते है, जिसमें तेज बुखार, थकान, गंभीर खांसी, लाल या खून वाली आंखें और नाक बहना शामिल है। खसरा से शरीर पर लाल चकत्ते होते हैं।

 

मार्च, अप्रैल, सितम्बर व अक्टूबर में फैलने की होती है सम्भावना

 

                मार्च, अप्रैल, सितम्बर व अक्टूबर के समय मौसम में परिर्वतन होता है जिस कारण संक्रमित बीमारियां भी इसी समय फैलती है। लोग खसरे की बीमारी को माता का प्रकोप समझकर उपचार नहीं कराते हैं। इस बीमारी का बचाव एकमात्र टीका है। इस बीमारी से बचने के लिए एमआर का टीका बच्चों को जरूर लगवायें। जाकरूकता अभियान के माध्यम से जिला स्तर से मैदानी स्तर तक मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता के द्वारा दीवार लेखन, ग्रुप बैठक, रैली एवं कोटवारों के माध्यम से गांव-गांव मुनादी भी कराई जा रही है।

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