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Friday, March 3, 2023

जागरूक कर बहरेपन से दिलाया जा सकता है निजात,जिला चिकित्सालय में मनाया विश्व श्रवण दिवस...



रेवांचल टाईम्स - मंडला 03 मार्च नभाप्र. विश्व में बहरेपन और श्रवण हानि रोकने कान और सुनने की देखभाल को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष विश्व श्रवण दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर मंडला जिला चिकित्सालय परिषर मेंं राष्ट्रीय बाधिरता नियंत्रण एवं रोकथाम कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सांसद प्रतिनिधि जयदत्त झा, सीएमएचओ डॉ. श्रीनाथ सिंह, शिशु रोग विशेषज्ञ व सिविल सर्जन डॉ. विजय धुर्वे, विषय विशेषज्ञ ईएनटी डॉ. संजय चौकसे, आरबीएसके जिला समन्वयक अर्जुन सिंह, आडियोलॉजिस्ट विरेन्द्र पाटिल, एसएनसीयू स्टाफ, मिटरनिटी स्टाफ समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों का स्वागत पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत एक पौधे का गमला भेंट कर किया गया। 

कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. श्रीनाथ सिंह ने बहरेपन की समस्या के बारे में बताते हुए कहां कि मीसल्स, मम्स, रूबेला, मेंनिनजाईटिस, कान का संक्रमण है, प्रसव के दौरान कठिनाई, प्रीमेंच्योरिटी, कम वजन, ओटोटोक्सिक मेडिसिन समेत अन्य चोट, दुर्घटना, तेज आवाज से सुनने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है।  इनमें से  60 प्रतिशत प्रकरणों में बधिरता को रोका जा सकता है। 

आरबीएसके जिला समन्वयक अर्जुन सिंह ने बहरेपन की समस्या के बारें में बताते हुए कहा कि 50 के उम्र आते तक बहुत से लोग बहरेपन की समस्या से ग्रसित हो रहे है। बच्चों और युवाओं का एक बड़ा वर्ग सुनाई कम देने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं, जो कि एक भयावह स्थिति है।  शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय धुर्वे ने बताया कि अधिक शोर से निरंतर मोबाईल एवं हेडफोन से गाना सुनने या बात करने से कान के पर्दे को नुकसान पहुंच रहा है। इससे कान में दर्द, खुजली एवं पानी बहने की की समस्या उत्पन्ना हो रही है जिससे कम उम्र में ही बहरेपन की समस्या सामने आ रहे हैं।

जानकारी अनुसार राष्ट्रीय बाधिरता नियंत्रण एवं रोकथाम कार्यक्रम ब्लाक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। जिसमें आरबीएसके स्वास्थ्य टीम पीडि़त मरीजों का जांच परीक्षण कर जिला चिकित्सालय उपचार के लिए भेज रही है। बता दे कि लोगों में बहरेपन या कम सुनने के मामले को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब तत्पर है। जिसके लिए समुदाय एवं संस्था पर कार्यरत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है। जिससे जन समुदाय में जागरूकता फैलाकर इस श्रवण संबंधी समस्या से निजात दिलाया जा सके। निर्धारित प्रोटोकॉल के आधार पर संभावित आवश्यक उपचार प्रदान कराकर इस समस्या से पीडि़त को लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। 

संस्था स्तर पर चल रही गतिविधियाँ :

जिला एवं ब्लाक स्तर पर स्वास्थ्य संस्थाएं सीएचसी, सीएच, पीएचसी, एसएचसी, एचडब्ल्यूसी में आने वाले समस्त व्यक्तिओं का उम्र के आधार पर परिक्षण किया जा रहा है। इसके लिए आरबीएसके चिकित्सकों को भी तैनात किया गया है। जिसमें आरबीएसके चिकित्सक पूर्ण सहयोग कर रहे है। श्रवण संबंधी बचाव रोकथाम के संबंध में आईपीडी व्यक्तिओं एवं परिजनों को जानकारी दी जा रही है। उपचार के लिए आवश्यक दवाइयों एवं कन्ज्यूमेबल की उपलब्धता कराई जा रही है। शिविर में आने वाले मरीजों को आवश्यक होने पर चिकित्सकीय, हियरिंग एड सामाजिक न्याय विभाग से समन्वय कर एवं सर्जिकल उपचार दिलाया जा रहा है।  इसके लिए आरबीएसके, आयुष्मान भारत अंतर्गत पात्र हितग्राही को पॅकेज अनुसार आवश्यक उपचार दिया जा रहा है।  

बच्चों में बधिरता के कारण :

विषय विशेषज्ञ डॉ. संजय चौकसे ने बताया कि 31 प्रतिशत संक्रमण के कारण जिसमें मीसल्स, मम्स, रूबेला, मेंनिनजाईटिस, कान का संक्रमण है, प्रसव के दौरान कठिनाई, प्रीमेंच्योरिटी, कम वजन, ओटोटोक्सिक मेडिसिन समेत अन्य चोट, दुर्घटना, तेज आवाज से सुनने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। यदि हम समय पर इसका उपचार कराए तो इनमें से  60 प्रतिशत प्रकरणों में बधिरता को रोका जा सकता है। 

अभियान का उद्देश्य : 

समुदाय एवं संस्था स्तर पर श्रवण संबंधी जानकारी एवं देख रेख के लिए जागरूकता लाना, अभियान के दौरान श्रवण संबंधी समस्या से ग्रषित व्यक्तियों (विशेषकर बच्चे) का चिन्हांकन करना। चिन्हित किये गए व्यक्तियों का उपचार चिकित्सकीय, इंटरवेंशन, हियरिंग एड, सर्जिकल प्रदाय करना है।

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