रेवांचल टाइम्स:- शास.प्राथमिक विद्यालय तिघरा में 26 जनवरी को नव भारत साक्षरता अभियान के अंतर्गत महिला क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन हेमलता राहंगडाले की अध्यक्षता एवं शीला भालेकर जनपद सदस्य के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुई।
विदित हो कि नव भारत साक्षरता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में गैर साक्षर लोगों के बीच साक्षरता को बढ़ावा देने में सहायता करना है जिसके तहत 2022-23 से 2026-27 तक कि कार्यान्वयन अवधि के दौरान पूरे देश में 5 करोड़ गैर साक्षरों को कवर किया जाएगा।इस कार्यक्रम के तहत संस्कृति में समग्र वयस्क शिक्षा पाठ्यक्रमो को शामिल करने व निरन्तर शिक्षा सहित महत्वपूर्ण जीवन कौशल शामिल हैं।खेल और मनोरंजन के साथ साथ रुचि के अन्य विषयों या स्थानीय शिक्षार्थियो के लिये उपयोग जैसे कि महत्वपूर्ण जीवन कौशल पर अधिक उन्नत सामग्री शामिल है। शासन की इसी मंशा को पूर्ण करने हेतु शास.प्राथमिक विद्यालय ने एक अनूठी पहल कर महिला क्रीड़ा प्रतियोगिता संपन्न कराया।महिला प्रतियोगिता में 100मी.दौड़,मेढ़क दौड़,साईकिल दौड़,कुर्सी दौड़, मटकी फोड़,एवं कब्बडी आदि प्रतियोगिता संपन्न हुई जिसमें लगभग गांव की 70 महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया।प्रतियोगिता में प्रथम,द्वतीय व तृतीय स्थान अर्जित करने वाली महिलाओं को कार्यक्रम की अध्यक्ष हेमलता राहंगडाले एवं मुख्य अतिथि शीला भालेकर जनपद सदस्य द्वारा ईनाम वितरण किया गया। उपस्थित विद्यालय की शिक्षिकाओं द्वारा महिला पढ़ना-बढ़ना विषय पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा गया कि जो गैर साक्षर महिलाएं है उन्हें आधारभूत शिक्षा से जोड़ने का यह एक प्रयास था और ऐसे प्रयास निरन्तर होते रहेंगे।कार्यक्रम के अंत मे स्वल्पाहार की व्यवस्था के साथ संस्था प्रमुख प्रभा ठाकुर द्वारा उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों का आभार व्यक्त कर भविष्य में ऐसे ही सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की गई।उक्त कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था की शिक्षिकाए हेमलता टेकाम,सावित्री हनवत,संगीता कटरे,खेमेश्वरी पटले, धुरवन्ता बोपचे,हँसा राहंगडाले आदि का सहयोग सराहनीय रहा।
कार्यक्रम संपन्न होने के पश्चात गांव की महिलाओं में एक विशेष प्रकार का उत्साह व कुछ कर गुजरने की ललक स्पष्ट देखी गई।
और अंत में
भारत वर्ष की महिलाओं को समर्पित कुछ पंक्तियों के साथ।
मैं अबला नादान नही हूं,दबी हुई पहचान नही हूँ
मैं स्वाभिमान से जीती हूँ
रखती अंदर खुद्दारी हूँ।
मैं आधुनिक नारी हूँ
पुरूष प्रधान जगत में मैंने, अपना लोहा मनवाया।
जो काम मर्द करते आये,हर काम वो करके दिखलाया।
मैं आज स्वर्णिम अतीत सदृश,फिर से पुरुषों पर भारी हूँ।
मैं आधुनिक नारी हूँ
मैं सीमा से हिमालय तक हूँ और खेल मैदानों तक हूँ।
मैं माता बहन और पुत्री हूँ ,मैं लेखक और कवियित्री हूँ।
अपने भुजबल से जीती हूँ,बिजनेस लेडी,व्यापारी हूँ।
मैं आधुनिक नारी हूँ
जिस युग मे दोनों नर-नारी,कदम मिला चलते होंगे
मैं उस भविष्य स्वर्णिम युग की,एक आशा की चिंगारी हूँ।
मैं आधुनिक नारी हूँ
मैं आधुनिक नारी हूँ

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