रेवांचल टाईम्स - मंडला शहर में लगातार नगरपालिका की उदासीनता के चलते हर मोहल्लों में आवारा कुत्तों का झुंड नजर बडी आसानी आ जाएंगे जिले के लगातार जागरूक नागरिक के द्वारा विरोध के चलते कुत्तों को पकड़ने के लिए कुछ लोगों की टीम बनाई गई है जो कि नाकाफी साबित हो रही है जिस रफ्तार से कुत्ते को पकड़ने का काम चल रहा है, उतनी ही तेजी से कुत्तों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है आए दिन किसी न किसी मोहल्ले में कुत्ते के द्वारा काटने की खबर सुनने को मिलती है सिर्फ कुत्ते ही नहीं आवारा जानवर की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है नगर के हर मुख्य चौराहा मैं जानवरों को बीच सड़क में आराम फरमाते हुए देखा जा सकता है, नगर के बड़ चौराहा हो चिलमन चौक हो या बस स्टैंड लालीपुर, बिंझिया, नेहरू स्मारक नगर में सभी जगह आवारा जानवर और कुत्तों की फौज जगह जगह और मोहल्ले मोहल्ले नजर आ जाएगी इनकी लगातार बढ़ती हुई जनसंख्या को देखकर बाहर से आने वाले पर्यटक शायद मंडला शहर को कुत्तों का शहर के रूप में ना जानने लगे नवनिर्वाचित अध्यक्ष और पार्षद को इस तरफ ध्यान देना जरूरी है, इस तरफ जनप्रतिनिधियों का ध्यान ना देना उनकी काबिलियत पर प्रश्नचिन्ह लगाता है वैसे भी मंडला जिले का का दुर्भाग्य ही है कि चाहे विधायक हो या सांसद हर मोर्चे पर कुभकरणीं नींद में सोते हुए नजर आते हैं इन्हें तो कुछ बोलना भी लोग अपनी तोहीन समझ रहे है और नगर में जनचर्चा का विषय बना है कि मंडला जिले में विधायक और सांसद जैसे नेता भी होते है क्योंकि ये केवल लोगों से वोट मांगने या फिर मंच में लोगो को सपने दिखाने का बहुत ही अच्छी से करते आता है इसके बाद जनता कहा है कैसी है क्या परेशानी है इन्हें कोई मतलब नही वही अब दबी जुवा से लोग यह भी कह रहे कि उनका वक्त जाने वाला है और उनका वक्त आने वाला है फिर देखते है हमारी चौखट में क्या कह कर वोट माँगते है, अब देखना यह है कि मंडला नगर वासियों को कुत्ते और आवारा जानवरों से कब आखिर कब तक मुक्ति मिलेगी। या फिर सब ऐसे ही चलता रहेगा।
क्या मंडला शहर को आवारा पशु ओर कुत्तों के शहर के नाम से जाना जाएगा...
bydigital bharat
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