दैनिक रेवांचल टाइम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में स्वच्छता अभियान की पोल खुल रही जगह जगह गंदगी और जिले से लेकर गांव गांव में बनाये गए समग्र स्वच्छता अभियान के तहत बनाये गए लाखों के शौचालायो की शोभा उनमे लगे ताले बढ़ा रहे केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार खुले में शौच मुक्त के लिए अभियान चलाया की एक भी व्यक्ति खुले में शौच न जाये जिसके लिए करोड़ों रुपये खर्च कर दिया है पर क्या आज उस योजनाओं का सही किर्यान्वन हो रहा है या फिर सरकार से जारी राशि की होली खेली जा रही है ये कौन देखागा जिनको ये जिम्मेदारी सौपी गई वो केवल खाना पूर्ति कर कागज़ो का पेट भर रहे हैं और सरकार द्वारा जारी पोर्टल में सभी पूर्ण ओर चालू दिख रहे है पर उनकी जमी हकीकत कुछ और ही व्या करती है।
मंडला विकास खण्ड सहित समस्त विकास खंडों में संचालित शौचालय की शोभा एक 10 रुपये का ताला बढ़ा रहा है और लोग आज भी खुले में शौच करने को मजबूर है और अगर कुछ शौचालय के ताले खुल भी गए है तो उनमें केवल गंदगी ही गन्दगी बजबजा रही है न पानी न साफ सफाई वही जानकारी के अनुसार विकास खंड मवई जिले का दूरस्थ इलाका मुख्यालय मवई जहां पर 52 पंचायतों का जनपद है । यहां बस स्टैंड स्थित स्वच्छता परिसर सुलभ शौचालय अपने आप में एक नमूना है । यह नमूना है हमारे मुख्यालय की पहचान का यह उदाहरण है मवई के विकास का यह उदाहरण है स्वच्छ भारत अभियान का यह उदाहरण है बस स्टैंड की सुंदरता का । जहां निस्तार के लिए किसी को लेट बाथ का उपयोग करना हो तो यहां पर लटक रहे तालों से ही उनका स्वागत हो जाता है । प्रतिदिन सैकड़ों अधिकारी 'कर्मचारी और मुसाफिरों का आना जाना लगा रहता है लेकिन मजाल है किसी को कोई सुलभ कांप्लेक्स की सुविधा मिल जाए ' इमरजेंसी में फंसे मुसाफिर महिला पुरुष गंदगी में ही मल मूत्र का त्याग करने विवश हैं पूर्व निर्मित शौचालय के सभी दरवाजे खिड़की 'दीवार 'सीट आदि अनुपयोगी हो चुके हैं यहां पर बाहर तक उत्सर्जित अपशिष्ट बह रहा है |लोग नाक भौं सिकोड़ते इन्हीं में अपना निस्तार कर रहे हैं जिले से आने वाले वीआईपी माननीयों की व्यवस्था रेस्ट हाउस जैसे आलीशान बंगलों में की जाती है ' ताकि इन वीआईपी मंत्री नेता और प्रशासनिक अधिकारियों की नजर इस तरफ ना पड़ सके । बजबजाती गंदगियों से गुजरने के लिए राहगीर मुसाफिर और आम आदमी ही बने हैं
गांव की पूर्व सरकार द्वारा निर्मित सुलभ शौचालय स्वच्छता परिसर आज तक उपयोगी नहीं हो सका है । इसके आसपास फैले कचरे गंदगी और इन गंदगी के बीच बिचरते आवारा पशु इन्हें फैला रहे हैं ।मदहोश जिंदगी में जीने के शौकीन इनकी सीढ़ियों में बैठकर सांझ - रात जाम छलकाते लुफ्त उठाते शीशिओं को तोड़ते फेंकते रहते हैं अब यह भी इन्हीं शौकीनों का अड्डा बन गया है ।शासन की इस कल्याणकारी योजना को साकार करने में गांव की सरकार ही सफल नहीं हो सकी है तो फिर किसे बताएं स्वच्छता का महत्व ?गांधी जयंती जैसे मौके पर 1 दिन के लिए हमारे जागृत प्रतिनिधि और नेता झाड़ू लेकर फोटो खिचाते भी दिखाई देते हैं ।अब सुलभ शौचालय स्वच्छता परिसर के पास खड़े होकर क्यों नहीं ?
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