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Tuesday, December 20, 2022

विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क का अस्तित्व खतरे में वक्त रहते ध्यान नहीं दिया गया तू प्राकृतिक बन की जगह नजर आएगे कंक्रीट के जंगल



                             


रेवांचल टाईम्स - मंडला जिले की शान के साथ साथ विश्व प्रसिद्ध कान्हा की बात की जावे तो यह नेशनल पार्क अब धीरे धीरे अपने अस्तित्व की अंतिम राह पर चल रहा है बड़े-बड़े नेता और बड़ी-बड़ी हस्तियां अधिकारी कर्मचारी सब दूर दूर घने जंगल और उनमें बसे जानवरों को देखने और  घूमने आते हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़ी तेजी से  पूंजीपतियों की भी नजर शिकारी गिद्य की तरह नेशनल पार्क पर लगी हुई नियम विरुद्ध बड़े-बड़े होटल और रिसॉर्ट का निर्माण लगातार जारी है, अब धीरे धीरे घने जंगलो से कान्हा में कंक्रीट का जंगल देखने को मिलेगा, वहीं शहर के पूंजीपति इस रिपोर्ट में अपने बच्चों की शादी संपन्न करवा कर वाहवाही लूटने में पीछे नहीं हटते इसका नतीजा यह है कि पार्क में रह रहे जानवरों को विचरण करने पड़ता सकता है कान्हा में लगातार शोरगुल और वाहनों की आवाजाही के चलते जानवरों की स्वतंत्रता में खलल पड़ता है इस तरह ना तो कान्हा प्रबंधक का ध्यान है और ना ही बुद्धिजीवियों का इसी कारण से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को जंगली जानवरों का दीदार नहीं हो पाता है यदि टाइगर की बात की जावे तो सप्ताह भर लगातार लगातार पार्क में भ्रमण करने वाले पर्यटकों को टाइगर का दीदार नहीं होता कुछ ही बड़े खुशनसीब ही पर्यटक टाइगर का दीदार करने में सफल होते हैं यदि इसी तरह से कंक्रीटो का जंगल बढ़ता गया तो कान्हा नेशनल पार्क में चार पैरों के जानवरों की जगह दो पैरों के जानवरों का साम्राज्य कायम हो जाएगा इस तरफ जनप्रतिनिधि समाजसेवी और पार्क प्रबंधक तो ध्यान देना जरूरी है। नही तो आने वाला समय केवल कान्हा पार्क में बड़े बड़े आलीशान शहरों की तर्ज में होटल और रिसॉर्ट ही नजर आइगे क्यो की जिस तेजी से कान्हा पार्क के आसपास रिसोर्ट और होटलों का घने जंगलों के बीच मे नियम विरुद्ध हो रहा है यह पर्यावरण के साथ साथ पार्क में राह रहे जानवरों के लिए भी काफी नुकसान दायक है अगर समय रहते पार्क प्रबंधन नही जगा तो केवल टाइगर ओर बाकी जानवर केवल पुस्तकों में ही दिखेंगे जैसे हम आज डायनासोर को केवल पुस्तकों में देखते है।

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