रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य मंडला नगरी जिसे महिष्मति नगरी के नाम से भी जाना जाता है। वही इस नगर के तीनों ओर से मां नर्मदा अपने गोद मे लिए हुये है। और माँ नर्मदा के किनारे किनारे मंडला शहर बसा हुआ है जिससे यहां की प्राकृतिक सुंदरता में चार-चांद लग जाते हैं वैसे तो नर्मदा तट के किनारे बहुत से तपस्वियों मुनियों के आश्रम व घाट बने हुए हैं।
मां नर्मदा के तटो के किनारे अब बड़ी तेजी से भू माफियाओं के साथ सरकारी निर्माण एजेंसी और अतिक्रमणकारियों की बाढ़ सी आ गई है साथ ही दोनों तटों के किनारों पर कच्चे पक्के मकानों और सरकारी भवनों का निर्माण बदस्तूर जारी है। जबकि हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपनी दूरदर्शिता व भारत की नदियों के प्रति प्रेम के चलते उन्होंने समस्त अविरल बहने वाली नदियों की सुंदरता को बढ़ाने व अक्षुण्य रखने के लिए नदियों के किनारे विशाल घाटों का निर्माण कराया गया है व सुंदर बनाया गया है ताकि लोगों का इन पवित्र नदियों के प्रति आस्था व विश्वास बना रहे जिसका नतीजा यह है कि घाटों के सुंदर निर्माण होने के चलते सुबह शाम जनमानस का हुजूम बना रहता है व संध्या आरती के समय सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पूजन अर्चन हेतु मां नर्मदा के तट पर पहुंचते हैं। इस पवित्र नदियों को प्रदूषण से मुक्त कराने के किये जगह-जगह सीवर प्लांटों का निर्माण कराया गया है। साथ सही शहर के गंदे नालों का पानी नर्मदा नदी में समाहित होता है जिससे प्रदूषण बंद गया है जिसे रोकने हेतु सरकार के अनेको प्रयास किये जा रहे हैं अब सवाल यह उठता है कि मध्य प्रदेश संस्कृति एवं पर्यटन विकास विभाग के द्वारा नर्मदा नदी पर विशेष जोर दिया जा रहा है व नर्मदा तटों के दोनों किनारे पर पक्के भवनों का निर्माणों का पर रोक लगनी चाहिये जिससे नर्मदा तटों के किनारे की हरियाली व प्राकृतिक सुंदरता कायम रहे पर ऐसा देखने को नहीं मिल पा रहा है माँ नर्मदा के तटों के किनारे बड़े बड़े बहुमंजिला पक्के मकानों का निर्माण किया जा रहा है जिससे भविष्य में मां नर्मदा की सुंदरता पर ग्रहण लगते नजर आ रहा है इन दिनों वैध-अवैध निर्माण पर अंकुश लग सके जिसका उदाहरण मंडला से लगे डिंडौरी जिला में देखने को मिला है।
पूरा मामला है यह है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देशित किया है कि राज्य सरकार ऐसे नव भवन निर्माणों को अनुमति प्रदाय न करे जो कि की नर्मदा के तट से 300 मीटर की दूरी पर निर्माण कार्य न किये जायें किंतु आज बड़ा आश्चर्य हो रहा है यह देख कर कि मध्य प्रदेश की उच्च न्यायालय के निर्णय को ताक में रखकर जिला न्यायालय परिसर मंडला की बहुमंजिला इमारत का निर्माण संपन्न हो रहा है जो विधिविरुद्ध है माँ नर्मदा पर आस्था रखने वाले धर्म प्रेमियों बन्धुओं के लिये भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने जैसा प्रतीत होता है माँनर्मदा के तटों पर नए पर निर्माण पर पूर्णतया रोक लगे व गंदे नालो का भी माँ नर्मदा में समावेश होना पूर्णतः बंद ही इस विषय को लेकर लगभग 700 दिनों से निराहार रहकर परम तपस्वी श्री भैय्यूजी सरकार केवल मात्र नर्मदा जलग्रहण कर राज्य सरकार को जगाने का प्रयास कर रहे हैं किंतु मंडला न्यायालय परिसर में नवनिर्मित आलीशान बहुमंजिला बिल्डिंग बनने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मननीय उच्च नायालय के आदेश की अवहेलना एव धार्मिक आस्थाओं से साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. इस अत्यंत गंभीर विषय पर तत्काल मध्य प्रदेश की सरकार कोई उचित निर्णय ले ताकि अमरकंटक से खम्बात की खाड़ी तक मां नर्मदा तट पर हुए अवैध अतिक्रमण धराशायी हो सकें।
प्रतिक्रिया
वही जनहित याचिका की सुनवाई के दौरात माननीय उच्चयायालय ने स्पष्ट कहा है कि नर्मदा नदी के किनारे '75 आतिक्रमण पाये गये कोर्ट ने अवैध निर्माणों को गिराने का निर्देश दिया था जो 1 अक्टू बर 2008 के बाद बने थे वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंड पीठ ने नर्मदा नदी के 300 मीटर के दायरे में ही रहे निर्माण पर लगी रोक से इंकार कर दिया था। और नई निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंधित कर दिया है इसके बाद भी आज मंडला के न्यायालय परिसर में आज बहुमंजिला ईमारत बन रही है जहाँ पर हाई कोर्ट ने रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है वही आज मंडला में बहुमंजिला बन कर तैयार होने को है और वो भी माँ नर्मदा के तट से मात्र 200 मीटर की दूरी के अंदर निर्माण कर चल रहा है।

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