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Saturday, December 17, 2022

समीपस्थ ग्राम पिढाय बुजुर्ग एव बिसनपुरी की महिला मण्डल द्वारा श्री रेवा गुर्जर मांगलिक परिसर आयोजित श्री राम कथा के तीसरे दिवस



 दैनिक रेवांचल टाइम्स - खरगोन कथावाचक पंडित श्याम शर्मा ने भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।भये प्रकट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी आदि पंक्तियों से पूरे माहौल को राममय बना दिया।उन्होंने कहा कि इस जगत में भगवान श्रीराम जैसा दूसरा चरित्र नहीं है। प्रभु श्रीराम की कथा के श्रवण मात्र से ही जीव के तमाम सांसारिक पाप नष्ट हो जाते हैं।इसलिए उन्हें पुरुषोत्तम राम कहा गया है। संसार के प्रत्येक प्राणी को भगवान श्रीराम का अनुसरण करना चाहिए।

अयोध्या के महाराज दशरथ के घर पुत्र रुप में जन्म लिया है

तत्पश्चात पंडित श्याम शर्मा ने द्वारा एवं भक्तों द्वारा भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाया गया।साथ ही भगवान के जन्मोत्सव पर बधाई गीतों का गायन किया गया।इस दौरान जन्मोत्सव के बाद भगवान श्रीराम गुरु वशिष्ठ द्वारा नामकरण एवं शिक्षा दीक्षा के साथ समस्त विद्याओं में पारंगत होकर गुरु के साथ वापस अयोध्या आ गए। उसी समय महात्मा विश्वामित्र की समाधि से ज्ञात हुआ कि ब्रह्म श्रीराम मनुष्य रुप लेकर अयोध्या के महाराज दशरथ के घर पुत्र रुप में जन्म लिया है।श्रीराम जगत कल्याण के लिए यज्ञ कर शुभाऊ और मारीच राक्षसों का संघार कर जगत की रक्षा करेंगे।

कैकेयी ने राम से कहा था कि तुम मेरे मैं तुम्हें अगले जन्म में पुत्र रूप में प्राप्त करूं

पंडित श्याम शर्मा ने कहकि राजा दशरथ एवं माता कौशल्या के पूर्व जन्म की कथा सुनाई।उन्होंने कहा कि पुराणों के अनुसार राजा दशरथ पूर्व जन्म में स्वायम्भु मनु थे।जबकि माता कौशल्या पूर्व जन्म में स्वायम्भु मनु की पद्यी शतरूपा थी। दोनों ने भगवान विष्णु को पुत्र रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की।उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट होकर जब वरदान मांगने के लिए कहा तो स्वंयम्भू मनु और शतरूपा ने भगवान से वरदान स्वरूप भगवान विष्णु को पुत्र रूप में पाने की इच्छा जताई।भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान देते हुए कहा कि त्रेतायुग में आप दोनों अयोध्या के महाराजा और महारानी बनेंगे।आपदोंनो के पुत्र के रूप में रामचंद्र मेरा सातवां अवतार होगा।इसी वरदान को पूरा करने के लिए भगवान राम दशरथ और कौशल्या के पुत्र के रूप में जन्म लिए।राजा दशरथ ही कृष्ण अवतार के समय वासुदेव और कौशल्या देवकी बने थे।कैकेयी ने राम से कहा था कि तुम मेरे मैं तुम्हें अगले जन्म में पुत्र रूप में प्राप्त करूंए इसलिए कैकेयी यशोदा बनीं और उन्हें भी कृष्ण की माता बनने का सौभाग्य मिला।

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