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Monday, December 19, 2022

मांद पंचायत सचिव ने बनाया पंचायत को भ्रष्टाचार का अड्डा निर्माण कार्यों जम कर किया जा रहा है भ्रष्टाचार...




रेवांचल टाईम्स - मंडला जिले की ग्राम पंचायतों में नही थम रहा योजनाओं में भ्रष्टाचार केन्द्र और राज्य सरकारें द्वारा संचालित योजनाएं आज जिम्मदारों के द्वारा अपने निजी स्वार्थ के चलते बंदरबांट मचा रखा है और जिन्हें इन्हें रोकने की जिम्मेदारी दी वह भी इन्हें रोकने में आज नाकाम हो रहे है और जाँच के नाम पर खुला भ्रष्टाचार किया जा रहा है जिस कारण आज पंचायतों में भ्रष्टाचार का खुला खेल चल रहा है

        वही जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत मांद से हुआ अन्य पंचायतों के बिलों का भुगतान 

मण्डला जिले में ग्राम पंचायत सरपंच-सचिव द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।जिले में एक-दो अथवा दर्जनों नहीं बल्कि लगभग सभी पंचायतों में खुलेआम भ्रष्टाचार किया जा रहा है वहीं भ्रष्टाचारीयों का एक ही जवाब है कोई जांच अथवा कार्यवाही होगी तो अधिकारियों को ले-देकर सेट कर लेंगे,इसी तर्ज पर भ्रष्टाचारीयों के हौंसले बुलंद होते जा रहे हैं और जिम्मेदारों के संरक्षण के चलते पंचायत सचिव-सरपंच खुलेआम फर्जी बिल-बाऊचर के जरिए अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। मामला जनपद पंचायत भुआ-बिछिया अंतर्गत ग्राम पंचायत मांद का है जहां सचिव रोजगार सहायक और उपयंत्री के द्वारा ग्राम पंचायत कांसखेडा, ग्राम पंचायत मानिकपुर के बिलों का भुगतान ग्राम पंचायत मांद के शासकीय कोषालय से किया गया है।अब यह कैसे हो सकता है कि दूसरे पंचायत के नाम पर दिए गए बिलो का भुगतान किसी दूसरे पंचायत के मद से भुगतान किया जा सकता है,परन्तु यह अनहोनी भ्रष्टाचार को ग्राम पंचायत मांद के सचिव गणेश आर्मो द्वारा अंजाम दिया गया है जहां शासन-प्रशासन के लाखों रुपए का गबन किया गया है।

सचिव गणेश आर्मो भ्रष्टाचार को लेकर सदा सुर्खियों पर

जनपद पंचायत बिछिया अंतर्गत ग्राम पंचायत मांद, ग्राम पंचायत मानिकपुर, ग्राम पंचायत कांसखेडा, ग्राम पंचायत बंटवार या फिर हम कहें शासन-प्रशासन ने सचिव गणेश आर्मो को जहां-जहां की जिम्मेदारी सौंपी है,वह पंचायत भ्रष्टाचार से अछुता नहीं रहा है। मामला यह है कि यादव मटेरियल सप्लायर द्वारा सरपंच ग्राम पंचायत मानिकपुर के नाम पर दिनांक 15/1/2021 को राशि 13000/- का बिल दिया गया जिसका भुगतान सचिव द्वारा बगैर सरपंच की अनुमति के ग्राम पंचायत मांद की आवंटित राशि से भुगतान कर दिया गया। वहीं यादव मटेरियल सप्लायर द्वारा एक बार फिर दिनांक 09/05/2021 को सरपंच ग्राम पंचायत मानिकपुर माल के नाम पर बिल दिया गया जिसका भुगतान ग्राम पंचायत मांद के आवंटित राशि से कर दिया गया। ग्राम पंचायत मानिकपुर माल में हुए अतिरिक्त कक्ष निर्माण की पुताई कार्य का भुगतान भूरालाल/चमरा मरावी को ग्राम पंचायत मांद के ब्याज राशि से 3500/- का भुगतान किया गया है।इसी तरह एस.एस.कम्प्युटर्स का बिल सरपंच ग्राम पंचायत मानिकपुर के नाम पर दिया गया है परन्तु उस बिल का भुगतान ग्राम पंचायत मांद द्वारा किया गया है। वहीं मयूर इलेक्ट्रिक वर्क द्वारा दिनांक 30/10/2020 को ग्राम पंचायत कांसखेडा के नाम पर राशि 7000/- का बिल दिया गया जिसका भुगतान भी ग्राम पंचायत मांद से किया गया इस भुगतान करने के समय सचिव गणेश आर्मो की पत्नी बीना आर्मो कांसखेडा सरपंच थी।बात वही कि "जिस थाने का दारोगा घरवाले तो क्या करेंगे ऊपर वाले"। ग्राम पंचायत मांद द्वारा किए गए भ्रष्टाचार यहीं तक नहीं थमता जहां एक तरफ शासकीय राशि का गबन-घोटाला कर खुलेआम भ्रष्टाचारी अपनी तिजोरियां भरने में लगे हैं तो वहीं वर्षों पहले सरकार और न्यायालय द्वारा निरस्त टिन नम्बरों के बिलों पर शासकीय भुगतान कर वाणिज्य कर विभाग अंतर्गत टैक्स चोरी कर सरकार को लाखों का चूना लगाया जा रहा है यादव मटेरियल सप्लायर के बिल में टिन नंबर 23869142450 जो 11 अंको का पहले हुआ करता था जिसे मौजूदा सरकार द्वारा वाणिज्य कर अधिनियम के तहत संशोधन कर देश को काले धन के चोरों से मुक्त कराने तथा भ्रष्टाचारीयों के तिजोरियों से काली कमाई बाहर निकालने की तर्ज पर 01/07/2017 से 16 अंको का जीएसटी नम्बर लागू किया गया है ताकि सरकार को वाणिज्य कर एक्ट के तहत देश के विकास को लेकर मिलने वाली राशि को भ्रष्टाचारीयों द्वारा गबन नहीं किया जा सके परन्तु  शासकीय कुर्सी पर बैठे ग्राम पंचायत सचिव द्वारा टैक्स चोरी के मामले को अंजाम दिया गया है।

सचिव द्वारा अपने बेटे के नाम पर किया गया भुगतान

जनपद पंचायत बिछिया अंतर्गत ग्राम पंचायत मांद सचिव गणेश आर्मो द्वारा किया गया भ्रष्टाचार-लापरवाही और शासकीय राशि गबन-घोटाला का मामला यहीं पर आकर नहीं थमता सचिव गणेश आर्मो एवं पूर्व सरपंच बीना आर्मो का पुत्र अभिषेक आर्मो ठेकेदारी एवं मटेरियल सप्लायर का काम करता है। जहां सरकार की योजनांतर्गत शासन-प्रशासन की नियमावली अनुसार सिविल सेवा प्राधिकरण 1965 अंतर्गत जिस शासकीय दफ्तर में कोई शासकीय कर्मचारी अथवा जनप्रतिनिधि पदस्थ है उस दफ्तर के द्वारा संबंधित शासकीय कर्मचारी अथवा जनप्रतिनिधि के रक्त संबंधियों को कोई शासकीय कार्य का भुगतान नहीं किया जा सकता है, परन्तु सचिव गणेश आर्मो ने सिविल सेवा के आदेशों को दरकिनार करते हुए खुलेआम न्यायालय की नियमावली को चुनौती देते हुए अपने ही पंचायत से अपने बेटे अभिषेक आर्मो को लाखों रुपए का भुगतान कर दिया। जब इस मामले को लेकर जब सचिव से बात की उनके द्वारा साफ कह दिया कि आपको जो करना है कर लो मेरी सेटिंग यहां के सभी नेताओं और अधिकारियों से है मैं ले-देकर सब मामला सेट कर लेता हूं, में कोई अकेला यह कमाई नहीं रखता ऊपर तक बराबर बंटवारा करता हूं, और मैं चाहु़ं तो महिला को छेड़ने के मामले में अथवा आदिवासी एक्ट के तहत में जब चाहुं किसी भी को फसा सकता हूं। जहां शासकीय राशियों का फर्जी तरीके से आहरण करने वाले दोषियों द्वारा ऊपर तक बंटवारे की बात करते हैं वहां पर हम संबंधित भ्रष्टाचारीयों पर कार्यवाही को लेकर कितना उम्मीद कर सकते हैं। वही इनके द्वारा बनाई गई पुलिया जो भ्रष्टाचार की शिकार हो चुकी जगह जगह से उसकी बाल फट चुकी है कही न कही गुणवत्ता हीन बनाई गई पुलिया में जिम्मेदार उपयंत्री है जो ऐसे घटिया निर्माण का मूल्यांकन कर राशि निकाल कर बंदरबांट कर दी और जब इस संबद्ध में उपयंत्री से बात की तो उनका कहना था कि पहले देख ले फिर बताते है कि लागत कितनी है और कैसे बाल फट गई इसका मतलब ये के मेडम जी घर मे ही बैठ कर सब गुणवत्ता की जांच कर देती है और मूल्यांकन कर सरकारी पैसे में अपना हिस्सा लेकर सब ठीक कर देती है।

इनका कहना है---

01-इस तरह किसी और पंचायत के बिलो का भुगतान किसी दूसरे पंचायत से किए जाने का मामला आपके द्वारा संज्ञान में आया है मामले की जांच कर संबंधित के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही किया जावेगा।

                          विनोद मरावी 

                        मुख्य कार्यपालन अधिकारी

                जनपद पंचायत बिछिया मण्डला।

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