रेवांचल टाइम्स - विकास खंड वीजादांडी में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन आत्मा अंतर्गत फसल प्रदर्शन फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के कृषको को गेंहूं jw 3288 किस्म कि दी गई मुख्य कारण फसल का अच्छा उत्पादन होता है !यह एक ऐसी किस्म है !जिससे तेज गर्मी में भी फसल लहलहती हरी भरी नजर आएंगी कीट व्याधि का असर नहीं होगा ब्लाक टेक्नोलॉजी मैनेजर मोहित गोल्हानी ने कृषको को बताया गेंहू के बीज को बीजामृत से उपचारित कर बीज बोय एवं फसल में जीवामृत का प्रयोग 20-25 दिन बाद अवश्य करे प्राकृतिक रूप से खेती करने से फायदा ही फायदा है आगे बताया गेंहू में मुख्य रूप से पीला रतुआ गेरुआ रोग और काला कंडुआ रोग होता है जो फफूंद के रूप में फैलता है जब तापमान वृद्धि होती है तो गेंहू को पीला रतुआ रोग लग जाता है जिससे गेंहू कि उपज काफी प्रभावित होती है यह किस्म इन सब रोगो के प्रति प्रतिरोधक है !यह किस्म 110दिन में पककर तैयार हो जाती है उपज 55से 65 कुंटल प्रति हेक्टयर होती है इस मोके में ब्लाक टेक्नोलॉजी मैनेजर मोहित गोल्हानी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्रीमती सरिता पट्टा, स्वेता डहरिया, फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के सीईओ अरविंद ठाकुर एवं कृषक उपस्तिथ रहे।
रेवांचल टाइम्स - विकास खंड वीजादांडी में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन आत्मा अंतर्गत फसल प्रदर्शन फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के कृषको को गेंहूं jw 3288 किस्म कि दी गई मुख्य कारण फसल का अच्छा उत्पादन होता है !यह एक ऐसी किस्म है !जिससे तेज गर्मी में भी फसल लहलहती हरी भरी नजर आएंगी कीट व्याधि का असर नहीं होगा ब्लाक टेक्नोलॉजी मैनेजर मोहित गोल्हानी ने कृषको को बताया गेंहू के बीज को बीजामृत से उपचारित कर बीज बोय एवं फसल में जीवामृत का प्रयोग 20-25 दिन बाद अवश्य करे प्राकृतिक रूप से खेती करने से फायदा ही फायदा है आगे बताया गेंहू में मुख्य रूप से पीला रतुआ गेरुआ रोग और काला कंडुआ रोग होता है जो फफूंद के रूप में फैलता है जब तापमान वृद्धि होती है तो गेंहू को पीला रतुआ रोग लग जाता है जिससे गेंहू कि उपज काफी प्रभावित होती है यह किस्म इन सब रोगो के प्रति प्रतिरोधक है !यह किस्म 110दिन में पककर तैयार हो जाती है उपज 55से 65 कुंटल प्रति हेक्टयर होती है इस मोके में ब्लाक टेक्नोलॉजी मैनेजर मोहित गोल्हानी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्रीमती सरिता पट्टा, स्वेता डहरिया, फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के सीईओ अरविंद ठाकुर एवं कृषक उपस्तिथ रहे।
