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Sunday, November 6, 2022

छात्राबास में रह रहे छात्रों से अधीक्षक ले रहा है लेबरों जैसा काम छात्र बने मजदूर...



रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडौरी में छात्राबास में निवास रत छात्रो से लेबरों की तरह कराया जा रहा है कार्य,विकास खंड शिक्षा अधिकारी वी के चिचाम द्वारा मासूम बच्चों का किया जा रहा शोषण रात्रि कालीन छात्रावास से डेढ़ किलोमीटर दूर मासूम बच्चे आते हैं मजदूरों जैसा काम करने

      डिंडौरी जिले के विकास खण्ड अमरपुर, में मध्यप्रदेश शासन द्वारा अनुकरणीय पहल से अमरपुर मुख्यालय में सीएम राइज स्कूल का शुभारंभ इसी शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ किया गया हैं। जिसके लिए फर्नीचर इंदौर के किसी फर्म से क्रय किया गया हैं। जो विगत दिवस 3 नवंबर की शाम छात्रों के बैठने वाले डेस्क से भरा ट्रक शाम लगभग 7:30 बजे विद्यालय में पहुंचा। जिस सामग्री को खाली करने उत्कृष्ट छात्रावास के छात्रों को परिसर से डेढ़ किलोमीटर दूर से रात्रि में बुलाकर ट्रक से उतरवा कर कक्षों में रखवाया जा रहा था। पूछे जाने पर उपस्थित भृत्यों द्वारा किसी प्रकार की जवाब नहीं दिया गया, छात्र भी वाहन से उतरकर स्कूल परिसर में चले गए। ऐसी ठंड में छात्रों के साथ रात्रि के समय कुछ भी दुर्घटना घट सकती हैं। अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाई करने भेजते हैं जिनसे जिम्मेदार लोग छात्रों के पढ़ाई व विश्राम के समय में हमाली का कार्य करवाते हैं। जोकि उन छात्रों का शोषण किया जाना ही कहा जा सकता हैं। रात्रि के अंधेरे में जहरीले जीव जंतु या सामग्री भी गिरने की आशंका से अनदेखी भी नहीं किया जा सकता। जबकि शाम होते ही छात्रों को परिसर से बाहर निकलने की अनुमति भी नहीं रहती। इस प्रकार के कृत्यों पर अंकुश लगाना आवश्यक हैं वैसे तो सभी जानते हैं अमरपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी की लापरवाही और गैर जिम्मेदार रवैया हमेशा से ही इसी तरह से रहा है लेकिन हद तो तब हो गई जब उत्कृष्ट विद्यालय के मासूम बच्चों को रात्रि कालीन छात्रावास से  मजदूरों जैसा कार्य करने के लिए बुलाया जाता है लेकिन उससे विकास खंड शिक्षा अधिकारी को क्या फर्क पड़ता है वे तो अपने घर में आराम की नींद फरमा रहे हैं लेकिन मासूम बच्चों से भरी ठंड के समय जमकर हमाली करा रहे हैं एक जिम्मेदार पद पर पदस्थ होने के बावजूद अमरपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी के द्वारा बच्चों के प्रति इतना गैर जिम्मेदार रवैया अपनाना काफी दुखदाई है

जब इस मामले में आयुक्त संतोष शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने भी यहां कहा कि बहुत गलत बात है और इस मामले को दिखाता हूं कहकर अपना पल्ला झाड़ते नजर आए


और जब इस मामले में कुछ देर बाद अधीक्षक टेक सिंह परस्ते से बात की गई तो उन्होंने बोला कि मुझे विकास खंड शिक्षा अधिकारी ने बोला है कि 10 से 15 लड़के समान उतरवाने भेज दीजिए आदेश अनुसार मैंने भेज दिया आखिर हमारे आदिवासी बहुल जिले में आदिवासी मासूम बच्चों का गैर जिम्मेदार अधिकारी कब तक यूं ही शोषण करते रहेंगे यह तो अपने आप में एक अहम सवाल है


 इनका कहना हैं:-


यह गलत हैं दिखाता हूं फिर कुछ कहा जा सकता हैं।

 संतोष शुक्ला सहायक आयुक्त 


मुझे बीईओ साहब फोन कर बोले थे कि 10, 15 लड़के भेजो, आदेश अनुसार मैंने भेज दिया।

 अधीक्षक टेक सिंह परस्ते

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