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Wednesday, November 16, 2022

बच्चों के लिए मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी सभी का कुल स्क्रीन टाइम 2 घंटे तक सीमित करना जरूरी




आज के डिजिटल युग में हमारी जिंदगी के अहम पल स्मार्टफोन में झांकते हुए, टीवी देखते हुए या कंप्यूटर पर आंखें गड़ाते हुए बीतते हैं. अगर आप अपनी आंखों को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो अपना स्क्रीन टाइम 2 घंटे तक सीमित कर लें. अगर आपको काम की मजबूरियों के वजह से ऐसा करना पड़ता है तो बच्चों को 2 घंटे से ज्यादा किसी भी तरह की स्क्रीन के सामने न रहने दें. यह उनकी आंखों की सेहत के लिए बहुत जरूरी है.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मानव विज्ञान विभाग के एक रिसर्च स्कॉलर द्वारा किए गए एक अध्ययन में सिफारिश की गई है कि स्क्रीन का समय प्रति दिन दो घंटे से कम किया जाना चाहिए, खासकर बचपन के दौरान. अध्ययन ने टीवी, लैपटॉप और स्मार्टफोन जैसे डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल को रेगुलेट करने के लिए माता-पिता की निगरानी और नीति तैयार करने के महत्व को रेखांकित किया है.

अध्ययन को सेज द्वारा अंतरराष्ट्रीय पत्रिका, ‘बुलेटिन ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी’ में प्रकाशित किया गया था और शोध विद्वान माधवी त्रिपाठी द्वारा संचालित किया गया था, जिन्होंने सहायक प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार मिश्रा के तहत पीएचडी की है. यह डिजिटल उपकरणों के स्वामित्व को विनियमित करने के लिए माता-पिता की निगरानी और नीति तैयार करने के महत्व को रेखांकित करता है.

‘यह देखते हुए कि प्रयागराज राज्य में सबसे बड़ी आबादी (जनगणना 2011) रखता है, 2 चरणों वाली रेंडम नमूना पद्धति का उपयोग करके 400 बच्चों पर एक क्रॉस-सेक्शनल अध्ययन किया गया था. पहले चरण में, प्रयागराज शहर में 10 नगरपालिका वार्डों को रेंडम तरीके से चुना गया था. इनमें से प्रत्येक वार्ड की कुल जनसंख्या 11 हजार से 22 हजार के बीच है. दूसरे चरण में, प्रत्येक चयनित वार्ड से उनकी जनसंख्या के अनुपात में बच्चों का चयन किया गया था, ताकि एक नमूना आकार प्राप्त किया जा सके.’

निष्कर्षों से पता चला कि अधिकांश घरों में टेलीविजन के बाद डिजिटल कैमरा, लैपटॉप, टैबलेट, किंडल और वीडियो गेम हैं. त्रिपाठी ने कहा, ‘इससे बच्चे अधिक स्क्रीन समय व्यतीत करते हैं, जो न केवल उन्हें शारीरिक रूप से प्रभावित करता है और आंखों की दृष्टि को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.’

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