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Thursday, October 6, 2022

नर्मदा तटों का विकास शून्य..



रेवांचल टाईम्स - मण्डला मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश की जीवन रेखा मॉं नर्मदा की यात्रा जिस भी उद्देश्य को लेकर शुरू की गई थी। उन सभी उद्देश्यों की पूर्ति पूरी हो पाई है और इस संबंध मे कोई फीडबैक भी नहीं लिया गया है । यह बात सही है कि, मुख्यमंत्री ने जैसे ही यात्रा का ऐलान किया तो थोड़ी बहुत काम नर्मदा तटों के विकास के लिए आनन-फानन में किये गये जबकि, इस यात्रा की घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा काफी समय पहले कर दी गई थी। निर्धारित तिथि एक बार किसी कारणवष निरस्त होने के बाद पुन: निर्धारित की गई और जब यात्रा प्रांरभ हुई तो नर्मदा तट के विकास की पोल खुल गई। आज भी नर्मदा किनारे खुले में शौच किये जा रहे है जब जिला मुख्यालय में ऐसी स्थिति है तो ग्रामीण क्षेत्रों में इस सामाजिक बुराई को कैसे जड़मूल से खत्म किया जायेगा। यह जांच का विषय हो गया है। हरियाली से माँ नर्मदा का श्रृंगार करने की बात तो की गई लेकिन, बातों में दम दिखाई नहीं दिया । प्रदूषण दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है इसे रोकने की कोशिश भी नहीं की जा रही है। काफी दिनों से कहा जा रहा है कि गंदे नालों का पानी नर्मदा के जल में समाहित नहीं होने दिया जावेगा। कई तरह का प्लान अखबार में दिखाई देता या किसी नेताओं द्वारा भाषण इत्यादि में सब कुछ बताया जाता है, जिसे परिणाम मेें नहीं बदला जा रहा है। गंदे नालों का पानी आज भी नर्मदा में समा रहा है।  नर्मदा तटों में गंदगी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, नये पुराने घाटों की मरम्म्त व नवनिर्माण रंगरोगन इत्यादि का काम नहीं किया जा रहा है। फलदार, फूलदार पौंधो का रोपण नहीं किया जा रहा है। न नर्मदा तटों का विकास किया जा रहा है और न गंदगी दूर की जा रही है। सब गोलमाल है- कुल मिलाकर भ्रष्टतंत्र के शिकंजे में जिले का विकास कैद हो चुका है। गांव की संसद का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। पारित प्रस्ताव में कार्यवाही नहीं हो रही है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में वन्य प्राणी सुरक्षित नहीं है। आये दिन यहां पर वन्य प्राणियों के मारे जाने की खबर मिलती रहती है। सडक़ो की हालत बेहद खस्ता हो गई है। स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। उद्योगों ओैर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सही काम नहीं हो रहे हैं। विकास को ग्रहण लग चुका है। इस ग्रहण से मुक्त कराने के लिए नेता सक्रिय नहीं हो रहे हैं। चारों तरफ धांधली का कर रहे है।

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