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मंडला में दबंग व्यवसाई उड़ा रहा है जिला प्रशासन के आदेशों की धज्जियां, नियमों को दिखा रहा है ठेंगा, स्टे के बाद भी कर शॉपिंग कांप्लेक्स का अबैध निर्माण.... - revanchal times new

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Thursday, September 29, 2022

मंडला में दबंग व्यवसाई उड़ा रहा है जिला प्रशासन के आदेशों की धज्जियां, नियमों को दिखा रहा है ठेंगा, स्टे के बाद भी कर शॉपिंग कांप्लेक्स का अबैध निर्माण....





रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में भ्रष्टाचार भय मुक्त हो चुका है इसी का परिणाम यह है कि आमजन को छोटे-छोटे कामों के लिए अधिकारी कर्मचारियों को सेवा शुल्क देना पड़ता है और बिना सेवा शुल्क दिए कोई काम करना आसान नही है पर सबसे आश्चर्य की बात यह है कि इस आदिवासी बाहूल्य मंडला जिले में बाहर से नौकरी करने वाला कोई आना ही नहीं चाहता है, किंतु जब वह एक बार ज्वाइन कर लेता है तो जीवन पर्यन्त इस जिले को दिमक की तरह खोट खोट कर खाते रहता है और आज इनकी चमड़ी तो अब इतनी मोटी हो चुकी है कि आज भी जिला प्रशासन के आदेश की परवाह भी नही कर रहे, जहाँ जिले की मुखिया, कलेक्टर साहिबा ने शिकायत के बाद तत्काल प्रभाव से अबैध तरीके चल रहे निर्माण कार्य को जांच करने और रोकने को अपने अधीनस्थ अधिकारियों को मौखिक आदेश दिया गया इसके बाद भी दबंग व्यवसाई आज अपने दबंग तरीके से और पैसे के धन बल पर दिन में सरेआम रुके हुए का में काम को पुनः चालू करा दिया है। आखिर अबैध निर्माण करता ने कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखा दिया वही इस रुके हुए काम चालू हो जाने से नगर में जनचर्चा हो रही है की पैसे में बहुत ताकत है अच्छा से अच्छा अधिकारी कर्मचारी या जनप्रतिनिधि अपने कर्तव्य और ईमान से ज्यादा आज पैसों को महत्व दे रहे है और देना भी चाहिए क्योंकि आज सब पैसे से ही ख़रीदे जा सकते है। अब नगर में ये भी जनचर्चा का विषय बना हुआ है कि आख़िर रुके हुए कार्य को पुनः चालू करने की किसने अनुमति दे दी जो अबैध तरीके से बनाये जा रहे इस शॉपिंग कांप्लेक्स के निर्माण कार्य चिलमन चौक मोदी पेट्रोल पंप को जो बेधड़क पुनः कार्य चालू कर दिया गया हैं इसका मतलब सीधा सीधा है कि कही न कही जिम्मेदारो ने अपनी अपना कर्तव्यों को भूलकर और अपना ईमान को बेचकर अपनी जेब भरकर मौन सहमति दे दी गई है और दूसरी तरफ शारदीय नवरात्र की छुट्टियों का फायदा लेकर अनाधिकृत रूप से निर्माण हो रहे इस शॉपिंग कंपलेक्स को खुला संरक्षण नगर पालिका के अधिकारी और नजूल, राजस्व का है आमजन यह चर्चा कर रही है की जिला प्रशासन के आदेश के सामने नगर प्रशासन के आला अधिकारियों तक कहीं धन का वजन अधिक तो नहीं रख दिया गया है आवेदक के द्वारा शॉपिंग कांप्लेक्स निर्माण करता के द्वारा किंतु शायद उन्हें यह आभास नहीं है की भारतीय प्रशासनिक सेवा से चयनित हुआ कोई भी अधिकारी कोई गफलत बाजी को स्वीकार नहीं करता है और सीधे भ्रष्ट अधिकारियों पर निलंबन या बर्खास्त की कार्यवाही करता है अनेक दैनिक समाचार पत्रों में आप सभी ने अवैध शॉपिंग निर्माण के विषय में प्रकाशित खबरों को पढ़ा होगा जो पूर्ण रूप से तथ्यात्मक थी उसके बाद भी यदि शॉपिंग कांप्लेक्स का निर्माण पुनः चालू हो रहा है तो निश्चित रूप से कहीं ना कहीं सेवा सम्मान निधि संरक्षण का रूप दे दी है अब देखना यह है कि शॉपिंग कंपलेक्स निर्माणकर्ता जैन परिवार के सामने कितना नतमस्तक दिखेगा नगर पालिका प्रशासन और नजूल, राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी वही दूसरी ओर अगर कोई गरीब किसी प्रकार का अतिक्रमण करता है तो गरीबो के लिए आधी रात को बुलडोजर लेकर खड़े हो जाते है अधिकारी और कर्मचारी और बड़े पैसो वाले के सामने नतमस्तक नजर आते है शायद कही नगर की जनचर्चा सही साबित न हो जाये। पैसे में बहुत ताकत है सब गलत भी सही बन सकता है।

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