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रेवांचल टाईम्स - इन ग्रामो मे हुआ भेजा कब्ज़ा सावरी, थावड़ी, चन्दनवाड़ा, सिलखनी, पाल्हरी, हसनपुर, गोपालपुर, आमगांव,
ग्राम बादगाँव में शासकीय स्कूल स्टेडियम से लगी करोडो की जमीन
लालगाँव में मेन रोड के किनारे पहाड़ी से लगी करोडो की जमीन पर भी अवैध कब्जा
इत्यादि दर्जनों ग्रामो मे दवंगो द्वारा शासकीय ज़मीनो मे कब्ज़ा कर लाखो की फ़सल ली जा रही है.
चौरई, इसे प्रशासनिक मशीनरी की विफलता ही कहेंगे कि चौरई तहसील में हर तरफ अतिक्रमणकारियों और अवैध कब्जेदारों के हौसले बुलंद हैं। शहर हो या देहात। सड़क, नाली या जमीन। हर जगह बेधड़क जमीनें कब्जाई जा रहीं और कब्जेदारों की हनक ऐसी कि सरकारी टीमों को बैरंग लौटा दे। बीते दिनों ग्राम पंचायत की कई बीघा जमीन पर अवैध कब्जे करने का मामला सामने आया तो अब चौरई में नगर परिषद की जमीन पर। दोनों मामलों में सबसे बड़ी नाकामी जिला प्रशासन और पुलिस समेत राजस्व एवं नगर पालिका की रही। पहले तो कब्जेदारों को रोका नहीं गया और जब नींद टूटी तो विरोध मुंह ताने सामने खड़ा रहा। यही वजह शेष जगह हो रहे अतिक्रमण पर भी हावी रहती है।
अतिक्रमण को हटाने को लेकर नगर पालिका प्रशासन ने साफ कर दिया कि चौरई में अतिक्रमणकारी बेखौफ शेष जमीन पर भूमाफिया का कब्जा है। हालात ये हैं कि अफसरों की कमजोर इच्छाशक्ति, राजनीतिक दखलंदाजी और अन्य कारणों के चलते करोड़ों की संपत्ति पर अवैध कब्जा हो चुका है। कहीं माफिया ने दबंगई से कब्जे कर लिए तो कहीं नेताओं ने वोट बैंक की खातिर जिसे चाहे उसे जमीनों पर बसा डाला। छोटे-मोटे भूमाफिया के साथ ही अब बिल्डरों ने भी परिषद की संपत्तियों पर कब्जा शुरू कर दिया है। अपने प्रोजेक्ट के आसपास निगम की जमीनों पर बिल्डर भी कब्जा करने में देर नहीं लगा रहे। ग्रामो में कई जगह ऐसी हैं, जहां प्राइम लोकेशन पर ग्राम पंचायत की जमीनें हैं। इनकी कीमत भी उसी तर्ज पर है लेकिन खुलेआम चल रहे कब्जे के 'खेल' के बावजूद नगर पालिका ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। हां, महज खानापूर्ति के लिए कभी-कभार अतिक्रमण हटाने का ड्रामा जरूर किया, मगर जमीनें खाली नहीं हुई। अफसरों का अगर यही रवैया रहा तो इस शेष जमीन पर भी कब-किसकी नजर पड़ जाए, कहा नहीं जा सकता।

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