रेवांचल टाईम्स - मंडला खनिज विभाग की सुस्त कार्य प्रणाली के चलते खनिज माफिया रात दिन उठा रहे फायदा। खैरी स्थित आरडी कॉलेज के सामने सिद्ध टेकरी के आसपास खनिज माफियाओं के द्वारा दिन दहाड़े जेसीबी मशीन लगाकर पत्थर और मुर्रम की खुदाई कर ट्रैक्टर और डम्पर में भरकर जिला मुख्यालय के आसपास बन रहें नव निर्मित पेट्रोल पम्प और वेयर हाउस में विक्रय कर रहे हैं। खनिज विभाग को सूचना देने के बाद भी फोन रिसीव नहीं किया जाता या फिर स्टाफ नहीं है का हवाला देते हुए मौके स्थल पर नहीं आते, जिसके चलते खनिज माफिया खनिज सम्पदा का निरंतर दोहन करते जा रहे हैं। जिसके चलते राजस्व विभाग को प्रतिदिन लाखों की छति पहुंचाई जा रही है। इसी तरह मंडला की उपनगरी महाराजपुर से मोहन टोला रोड़ से लगी मुर्रम, पत्थर की चट्टानों को स्टोन क्रेशर के मालिकों के द्वारा अवैध रूप से अपनी सीमा से हटकर अवैध उत्खनन कर गिट्टी बनाकर बगैर लायल्टी के विक्रय कर रहे हैं। इसी तरह मुर्रम का भी अवैध उत्खनन चल रहा है।
जिला मुख्यालय से दौड़ रहे हैं वाहन
उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय के अलावा उपनगरीय महाराजपुर के तिराहे और चौराहे में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और जिला मुख्यालय से लेकर उपनगरी महाराजपुर के तिराहे और चौराहे में यातायात विभाग के पुलिसकर्मी तैनात होने के बाद भी उनकी नजरों के सामने से खनिज सम्पदा को डम्फर और ट्रैक्टर में भरकर ले जाया जाता है, इसके बाद भी इन वाहनों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जाती न ही रॉयल्टी पूछी जाती, जिससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि तिराहे और चौराहे में ड्यूटी में तैनात पुलिस कर्मियों का क्या कर्तव्य बनता है। ऐसा तो नहीं कहीं इनके वरिष्ठ अधिकारियों का आदेशानुसार खनिज सम्पदा से भरे वाहनों की जांच न की जाए न ही रॉयल्टी से सम्बंधित दस्तावेज देखे जाएं। जब जिला मुख्यालय से खनिज सम्पदा लादकर चार पहिया वाहन फर्राटे से दौड़ रहे हैं और वाहनों की जांच न करना जनमानस में अनेक संदेश को पैदा करता है और पुलिस विभाग से लेकर खनिज विभाग के ऊपर आरोप लगाना कहीं गलत न होगा।
खनिज की मौन सहमति से मानादेही और खैरी स्थित पहाड़ी से भरमार रूप से निकाली जा रही है मुर्रम
बता दें कि सूर्य के निकलने और सूर्य के ढलने के बाद देर रात्रि तक निडर होकर खनिज सम्पदा मुर्रम और पत्थर का अवैध उत्खनन कर जिला मुख्यालय की सड़कें और नेशनल हाईवे से अनेक डम्फर और ट्रैक्टर मुर्रम और पत्थर भरकर अवैध रूप से विक्रय कर रहे हैं और खनिज विभाग गहरी नींद में खामोशी की चादर ओढ़े हुए सोए हुए हैं। एक खनिज माफिया के द्वारा नाम न बताने की शर्त में बताया गया कि पुलिस विभाग से लेकर राजस्व व खनिज विभाग को महीने और सप्ताह में रुपयों का नजराना भेंट किया जाता है। जिससे स्पष्ट होता है कि सूचना देने के बाद भी सम्बन्धित विभाग इन खनिज माफियाओं के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं करते।


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