रेवांचल टाईम्स - संस्कृत भारती मध्य भारत प्रांत गुना जनपद अंतर्गत आयोजित संस्कृत सप्ताह के छठवे दिवस पर व्याख्यान आयोजित किए गए। जिसमें मुख्य वक्ता डॉ उषा जैन हिंदी प्राध्यापक पीजी कॉलेज गुना ने संस्कृत भाषा के वैशिष्ट्य पर प्रकाश डाला और कहा कि संस्कृत भाषा में आचार, व्यवहार,दर्शन, कला, संस्कृति धर्म अनुशासन जीवन पद्धति,आयुर्वेद आदि समाहित है जो कि हर व्यक्ति के अनुशाषित जीवन के लिए,जीवन पद्धति के लिए बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाना चाहिये इससे उनमें संस्कार आते हैं और बचपन से ही उनके उच्चारण दोष दूर हो जाते हैं।
विद्यार्थियों के लिए तत्सम शब्दों की, सुभाषितों की, श्लोकों,सूक्तियों की प्रतियोगिता ऐं आयोजित की जाएं तो उनमें और रुचि जागृत होगी।इस अवसर पर विभाग संयोजक श्री रमेश चंद शर्मा ने मुख्य अतिथियों का स्वागत किया और स्वागत भाषण में कहा कि संस्कृत भाषा के माध्यम से हमारी मातृ भाषा के दोष दूर होते हैं,ग्राम्य जीवन मे उपयोग होने वाले शब्दों में संस्कृत की स्पष्ट झलक मिलती हैं। शिक्षाविद श्री तुलसीदास दुबे ने कहा कि संस्कृत भारत की संस्कृति की धरोहर है और आगामी पीढ़ियों तक इसको पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी है।हर सप्ताह सम्भाषण कक्षाएं आयोजित करने से सभी को इसका लाभ मिलेगा।
गोविंद मीणा ने संचालन किया।
कार्यक्रम में शिक्षक श्यामलाल धाकड़, दिलीप शर्मा, रविन्द्रशर्मा ,रामस्वरूप सेन,उदयकांत भारद्वाज, राजेश शर्मा,आशीष तिवारी,राजमणि दुबे, नरेंद्र भारद्वाज ,गोविंद मीना,राकेश शर्मा, हाकिम सिंह धाकड़, अमन साहू आदि ने सहभगिता की।विभाग संयोजक रमेश चन्द्र शर्मा ने आगन्तुकों को प्रवेश: पुस्तिका भेंट की।जनपद मंत्री नरेंद्र भारद्वाज ने आभार ज्ञापित कर कल्याण मन्त्र पाठ किया।

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