रेवांचल टाईम्स – वैसे तो मुख्यमंत्री मंचों से चिल्ला चिल्ला के कह रहे थे की आवारा पशु यदि सड़क पर आवारा घूमते पाए जाते हैं तो मालिकों में जुर्माना होगा मगर उनके अफसर को तो शहरों में घूमते आवारा पशु नजर ही नहीं आते। नेताओं की बात ही नही कर सकते इनकी गाड़ी के शीशे से कुछ दिखता तो शहर की यह स्थिति नहीं होती नेता तो नेता है।
यहां तो सड़क में चालान बनाने का काम चलते रहता है और बाजू में आवारा पशु उनको देख पूछ हिलाते रहते हैं। कई बार तो होमगार्ड के सिपाही आवारा पशुओं को ट्रेफिक जाम करते देखते रहते हैं, मगर उनको भगाने तक की कोशिश नही करते, पूछने में जवाब मिलता है की यह काम नगर पालिका की हका गैंग का है।
अब तो शहर की स्थिति ऐसी हो गई है कि आवारा पशु घरों के आंगन में, दुकानों में और सड़क में रात के समय शरण लेते हैं और वहां पर गोबर कर देते हैं सुबह के समय शहर कोठा ही नजर आता है और नगरवासी सुबह उठकर और दुकानदार दुकान पहुंच कर सबसे पहला काम गोबर उठाने का ही करते हैं, जैसे वे ही गौ सेवक हो। गाय पाले कोई सेवा करे कोई, गौपालक तो अपने पशु की चिंता तभी करता है जब वह जनती है और दूध देने लगती है या किसी गाड़ी वाले से वह टकरा जाती है तो यह पशुपालक 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं।
सभी पशुओं के आधार कार्ड बने हुए हैं आधार कार्ड से मालिक का पता लगाकर पशु पालकों पर कार्रवाई की जानी चाहिए है। मगर सिवनी तो सिवनी है।
गाय को माता मानने वालों और गोरक्षक समिति को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि मालिक के आवारा छोड़ने के कारण ही गौ माता पन्नी जैसी जान लेवा चीज खा रही है, नागरिक भी गोबर करने के कारण उन्हें मरते नजर आ जाते है।

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