दैनिक रेवांचल टाईम्स - इंडियन पोटाश लिमिटेड ICRO एवं NPC द्वारा युवाओं की कृषि संबंधित युवाओं की ग्रामीण पहुंच और क्षमता विकास को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र सिवनी के सभागार में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम इंडियन पोटाश लिमिटेड तथा राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से आयोजित हो रहा है। सेन्टर फॉर रूरल आउटरीच (ICRO) के अमृत इंटरशिप प्रोग्राम का लोकापर्ण किया गया। इस अवसर पर मोरिश नाथ उपसंचालक, कृषि विभाग, डॉ. एन. के. सिंह सीनियर साइंटिस्ट, कृषि विज्ञान केन्द्र, डॉ. के. के. देशमुख, सीनियर साइंटिस्ट कृषि विज्ञान केन्द्र, नीतेश शर्मा राज्य प्रबंधक, इंडियन पोटाश लिमिटेड, आशीष कुमार वर्मा, सहायक निर्देशक राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद उद्योग एवं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के अंतर्गत, वरून शिवहरे सहायक प्रबंधक इंडियन पोटाश लिमिटेड, निधि सिंह, संतोष कुमार कार्यक्रम कार्यकारी एवं कृषि विभाग के तकनीकी सहायक डॉ. अखिलेश कुल्हाडे उपस्थित थे। जिन्होंने कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर जैसे कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के तौर तरीके मृदा स्वस्थ प्रबन्ध, फसल चक्र की विस्तृत जानकारी दी इस कार्यक्रम के माध्यम से जोड़ा जायेगा इस कार्यक्रम के लिए सिवनी जनपद के पचास छात्रों का चयन 3 महीने के लिए अमृत इंटरशिप प्रोग्राम के तहत किया जायेगा इस कार्यक्रम के प्रथम चरण में भारत के चार राज्यों का चयन किया गया है जिसमें कि पहला राज्य मध्यप्रदेश चुना गया है। दिनांक १८ अगस्त २०२२ को तकरीवन ५० अग्रीण किसानों को जागरुकता प्रदान किया जायेगा।
कृषकों को एवं इंटरशिप में आये ५० छात्र- छात्राओं को उपसंचालक मोरिश नाथ द्वारा संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग करने की सलाह दी कृषि विभाग की कृषक जन कल्याणकारी योजनाओं को प्रसारित करने एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जो ग्रामीण अंचलों में कृषकों को सेवायें प्रदाय कर रहे है उनसे इंटरशिप करने आये छात्रों का टाईअप कराकर, प्राकतिक खेती के माध्यम से एक एकड़ में खेती करने और उत्पन्न अनाज का उपयोग कृषक के परिवार में करने की सलाह दिया ताकि वर्तमान में होने वाली खतरनाक रासायनिक से उत्पन्न बीमारियों की रोकथाम कर सकते है और आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते है। कृषि विभाग की नवीन योजनाओं का संचार कृषकों तक करेगे एवं नवीन बीजों का उपयोग खेती में अवश्य करें, बीजोपचार भी अवश्य करें, साथ ही उर्वरक का उपयोग भी खेती में संतुलित व अनुसंशित मात्रा के रूप में ही करें। डॉ. अखिलेश कुल्हाडे तकनीकि सहायक द्वारा मृदा नमूना परिक्षण करके मृदा कार्ड बनवाकर अनुसंशित मात्रा में ही उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी गयी । कृषकों के विशेष अनुरोध पर आयस्टर मशरूम उत्पादन तकनीक को विस्तृत से समझाया गया।



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