नौरादेही की रानी राधा की संघर्ष की कहानी जहरखुरानी बाघिन ने चार सालों में बढ़ावा बाघों का कुनबा अब दस बाघों की दहाड़ से गूंज रहा नौरादेही अभ्यारण्य... - revanchal times new

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Thursday, July 28, 2022

नौरादेही की रानी राधा की संघर्ष की कहानी जहरखुरानी बाघिन ने चार सालों में बढ़ावा बाघों का कुनबा अब दस बाघों की दहाड़ से गूंज रहा नौरादेही अभ्यारण्य...

 अंतरराष्ट्रीय विश्व बाघ दिवस आज 


नौरादेही की रानी राधा की संघर्ष की कहानी जहरखुरानी बाघिन ने चार सालों में बढ़ावा बाघों का कुनबा अब दस बाघों की दहाड़ से गूंज रहा नौरादेही अभ्यारण्य...



रेवांचल टाईम्स डेस्क- भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के लिए पहचाना जाने वाला नौरादेही अभ्यारण्य में अब बाघों की दहाड़ सुनाई दे रही

        नौरादेही अभ्यारण्य बाघों के लिए स्वर्ग चार साल में चार कुनबा बढ़ा जंगली जानवरों व बाघों का कुनबा- बुंदेलखंड में बाघों की दूसरी नगरी बन रहा है यह क्षेत्र और विकसित करने किए जा रहे प्रयास...







विशाल रजक तेन्दूखेडा/दमोह!-दरअसल तीन जिले की सीमा में फैले हुए सागर दमोह और नरसिंहपुर जिले के 1197 वर्ग किमी भू भाग पर फैले नौरादेही वन्यप्राणी अभ्यारण्य का जंगली क्षेत्र पहले भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के लिए जाना जाता था लेकिन 19 अप्रैल2018 को यहा कान्हा के बाघिन एन-1को लाया गया जिसे राधा नाम दिया गया  राधा के रमने के बाद अभ्यारण्य में बांधवगढ़ से एन-2बाघ लाया गया जिसका नाम किशन रखा गया नौरादेही अभ्यारण्य बाघों के लिए मुफीद साबित हो रहा है यहा की आबोहवा ऐसी है कि पिछले चार सालों में बाघों का कुनबा चार गुना तक बढ़ गया है चार सालों में नौरादेही अभ्यारण्य मे बाघों की 2से बढ़कर 10 हो गई है वर्ष 2018 से अब तक ऐसा एक भी मौका नहीं आया है जब बाघों को लेकर कोई परेशानी अभ्यारण्य से सामने आई हो


नौरादेही की जहरखुरानी मां की संघर्ष की कहानी


नौरादेही की रानी बाघिन राधा के साथ बचपन में जहरखुरानी की कहानी बेहद रोमांचक और संघर्ष से भरी है जब वह 7 माह की थी तब उसके पूरे परिवार को शिकारियों ने जहरीला पदार्थ खिला दिया था ज्यादा जहर न निगल पाने से बाघिन को बचा लिया गया था बाद में इसे कान्हा अभ्यारण्य में रखा गया जब इसे नौरादेही अभ्यारण्य लाया गया तब बाघिन के शरीर पर जहर के असर को देखते हुए उम्मीद कम थी कि यह मां बन सकेगी लेकिन 9 मई 2019 को राधा ने तीन शावकों को जन्म देकर सबको चौंका दिया इसके बाद दूसरी बार भी जहरखुरानी बाघिन राधा ने नंवबर माह 2021 में दो शावकों को जन्म दिया तीन साल में बाघिन राधा ने पांच शावकों जन्म देकर पूरे वन विभाग को चौंका दिया इसके बाद नौरादेही अभ्यारण्य में बाघ की तीसरी पीढ़ी ने जन्म लिया है यहां बाघिन राधा की बेटी एन-112 बाघिन ने 2022 अप्रैल माह में 2 शावकों जन्म दिया था जो कि नौरादेही अभ्यारण्य में बाघिन राधा की तीसरी पीढ़ी है नौरादेही अभ्यारण्य में वंशवृद्धि से बाघों का कुनबा बढ़कर 9 हो गया है एक अन्य बाघ आसपास के टाइगर रिजर्व से आकर यहां बस गया है यह प्रदेश का सबसे बड़ा अभ्यारण्य है नौरादेही अभ्यारण्य पन्ना टाइगर रिजर्व तथा रातापानी अभ्यारण्य के मध्य कॉरिडोर बनाता है यहीं कहीं से बाघ एन-3अभ्यारण्य में आकार बस गया है वह पिछले 1साल से यहा विचरण कर रहा है नौरादेही अभ्यारण्य में चार सालों में बाघों की संख्या 2से बढ़कर 10पहुंच गई है नौरादेही अभ्यारण्य बाघों के बसेरे के लिए काफी अनुकूल है यहां विविध प्राकृतिक संरचनाएं है जो कि इसे नेशनल पार्क बनाने की दिशा में आगे बढ़ाती है बाघ-बाघिन से शावकों का जन्म सेंचुरी की वन्यजीवों के प्राकृतिक वांस के लिए तमाम संभावनाओं को दर्शाता है यहा बाघ पुर्नस्थापना प्रोजेक्ट का सक्सेस होना देश के लिए गौरव की बात है जो कि चार साल में अभ्यारण्य में बाघों की संख्या 10 है


नौरादेही व रानी दुर्गावती अभ्यारण्य को मिलाकर बनेगा टाइगर रिजर्व


वहीं नौरादेही अभ्यारण्य को पन्ना टाइगर रिजर्व की तरह विकसित करने प्रयास किए जा रहे हैं यहां नौरादेही अभ्यारण्य की डायवर्सिटी बाघों के अनुकूल है सागर के नौरादेही अभ्यारण्य और सिंग्रामपुर के रानी दुर्गावती अभ्यारण्य को मिलाकर 1500 वर्ग किलोमीटर में टाइगर रिजर्व बनाया जाएगा ईको सेंसिटिव जोर भी शामिल रहेगा नौरादेही के अधिकारियों ने इसका प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को जनवरी माह में भेज दिया है केबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसी को भेजा जाएगा फिर वहां से एक टीम आएगी जो नौरादेही अभ्यारण्य और रानी दुर्गावती अभ्यारण्य का निरीक्षण करेगी यदि सबकुछ ठीक रहा तो नौरादेही को टाइगर रिजर्व का दर्ज मिल जाएगा


राधा की दूसरी बेटी एन-111के भी प्रेग्नेंट होने की आंशका


बाघिन राधा की दूसरी बेटी यानी बाघिन एन-112की बहन एन-111से भी वंशवृद्धि की उम्मीद बढ़ गई है इसके प्रेग्नेंट होने की संभावना जताई जा रही है वाइल्ड लाइफ से जुड़े जानकारों के अनुसार बाघिन 2 साल की आयु में मां का साथ छोड़ देती है और 3 साल की आयु में मां बन सकती है वर्तमान में यहा  3बाघिन इस आयु को पार कर चुकी है बाघिन राधा से 6 महीने पहले और एन-112 से हाल ही में जन्में 2-2 शावकों में से एक-एक बाघिन होने का अनुमान है इस तरह बाघिन की संख्या 5 तक पहुंच सकती है यहां इतने ही बाघ है अभ्यारण्य में बाघों की वंशवृद्धि का क्रम इसी तरह चलता रहा तो अगले 3 सालों में यहां बाघों की संख्या 25 तक पहुंच सकती है नौरादेही अभ्यारण्य का बड़ा क्षेत्रफल पहाड़ गुफाएं नदी पोखर घास के मैदान पेड़ वनस्पति के कारण यहां बाघ शिफ्टिंग प्रोजेक्ट सफलता की ओर है चार साल पहले तक यहां बाघों की संख्या शून्य थी अब बाघों का बसेरा है



खान पान सहित ठहरने की सुविधा टूरिस्ट वाहन चलाने प्लानिंग


अब नौरादेही अभ्यारण्य में पन्ना टाइगर रिजर्व की तरह पर्यटकों के लिए सुविधाएं मिलेंगी ईको टूरिज्म बोर्ड के सहयोग से यहां टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा देने पर काम चल रहा है टूरिज्म को सैर सपाटे ठहरने खान पान और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी डोंगरपुर गांव के सरसैला पंचवटी एरिया में कैफेटेरिया व रुकने के लिए 2 कॉटेज बनाए जा रहे हैं वहीं दो नए प्रवेश द्वार का काम चल रहा है अभ्यारण्य के बीच से निकले सागर जबलपुर रोड़ पर एक द्वार हिनौती और दूसरा झापन में बनाया जा रहा है यहीं से टिकट और  2सरकारी टूरिस्ट वाहन(जिप्सी)की की व्यवस्था रहेगी वहीं आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार देने के लिए प्राइवेट टूरिस्ट वाहन चलाने की भी प्लानिंग चल रही है


जंगल के रास्ते पन्ना से पहले भी आते रहे हैं बाघ-बाघिन


पन्ना टाइगर रिजर्व से पहले भी बाघ बाघिन का दक्षिण वन मंडल और नौरादेही में मूवमेंट रहा है पन्ना से बाघ हटा के आगे चोरग होते हुए बटियागढ़ गढ़ाकोटा के रमना जंगल से कुड़ई बलेह होते हुए नौरादेही से बाघ तेन्दूखेडा तक पहुचते रहे हैं नौरादेही के अधिकारी ने बताया 2014 में यहां आखरी टाइगर मुहली रेंज के आंखिखेड़ा बीट में मृत अवस्था में मिला था नौरादेही अभ्यारण्य की सोमखेड़ा रेंज पहले भी बाघों का विचरण क्षेत्र रहा है जहां बाघों को देखा जाता था नौरादेही अभ्यारण्य में पन्ना व अन्य स्थानों से बाघों का मूवमेंट तो रहा है लेकिन यहां बाघों का जन्म अमूमन पहली बार हुआ है यह जंगल देश की दो बड़ी नदियों गंगा और नर्मदा का कछार होने के कारण यहां पानी की कमी नहीं है यहां नदी पहाड़ घास के मैदान और शाकाहारी वन्यजीव बड़ी संख्या में है जिससे बाघों के लिए अनुकूल है अभ्यारण्य के बीचों बीच 23 किलोमीटर में बहनें वाली बमनेर नदी और  अभ्यारण्य के आखिरी  तट पर व्यारमा नदी यहां की लाइफ लाइन है


तीन जिला के1200वर्ग किमी में फैला है अभ्यारण्य  भेड़ियों का प्राकृतिक आवास है नौरादेही


        नौरादेही अभ्यारण्य तीन जिले की सीमा में फैला हुआ है और प्रदेश का सबसे बड़ा अभ्यारण्य कहलाता है बता दें कि नौरादेही वन्यजीव सेंचुरी का स्थान सबसे अलग माना जाता है सागर दमोह एवं नरसिंहपुर जिले में फैला है नौरादेही अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1975 में की गई थी यह करीब 1200 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है इस अभ्यारण्य में वन्यजीवों की भरमार है जिनमें तेंदुआ मुख्य है ऐसा माना जाता है कि नौरादेही अभ्यारण्य प्राकृतिक और भौगोलिक कारणों से भेड़ियों का प्राकृतिक आवास है एक समय था जब इस इलाके में भेड़ियों की बड़ी संख्या मौजूद थी इसी कारण अभ्यारण्य को भेड़ियों के आवास का दर्जा दिया गया है अभ्यारण्य में बाघों का बढ़ता कुनबा साथ ही अन्य वन्यजीव और छेबला तालाब अभ्यारण्य का मुख्य आकर्षण का केंद्र है विविध प्रकार के सुंदर पक्षी वन्यजीवों की अटखेलियां आसानी से देखी जा सकती है


इनका कहना

            नौरादेही में बाघों की.वंशवृद्धि से प्रदेश में एक और टाइगर रिजर्व की संभावनाएं प्रबल हो रही है अगले कुछ सालों में यहां बाघों की अच्छी खासी तादाद होगी अभ्यारण्य में टूरिज्म गतिविधियां बढ़ाने के लिए ईको टूरिज्म बोर्ड से काम कराए जा रहे हैं यहीं भी पन्ना टाइगर रिजर्व की तरह टूरिस्ट को तमाम सुविधाएं मिलें ऐसा प्रयास है इस दिशा में काम आगे बढ़ रहा है पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह प्रस्ताव लंबे समय से तैयार था।

                     अमित कुमार दुबे 

                      सीसीएफ सागर


इनका कहना

            नौरादेही अभ्यारण्य में अभी कुल 10 बाघ है नौरादेही में बाघों के लिए अनुकूल आवास और शिकार के लिए पर्याप्त वन्यप्राणी है अभ्यारण्य प्रबंधन द्वारा वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है और इसके लिए दो हाथियों के साथ नियमित गश्त की जाती है अभ्यारण्य में बाघो के विचरण क्षेत्र में उनकी निगरानी के लिए कैमरे लगाए गए हैं      

                     सेवाराम मलिक 

              एसडीओ नौरादेही अभ्यारण्य


इनका कहना-

        नौरादेही अभ्यारण्य की विशेषता यह है कि यहां विविध प्राकृतिक संरचनाएं जैसी नदी पहाड़ पोखर घना जंगल वनस्पति वन्यजीव व पक्षियों की अलग अलग प्रजाति देखने को मिलती है सर्दी के मौसम में यहां प्रवासी पक्षियों को बसेरा रहता है बाघों का बढ़ता कुनबा और टूरिज्म को लेकर सुविधाएं बढ़ने से यहां टूरिस्ट खुद ही खिचें चलें आएंगे

               अमित सांकल्या वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट

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