दैनिक रेवांचल टाईम्स - केवलारी मानसून सीजन के साथ ही चुनावों का भी माहौल बना हुआ है ऐसे में खेती बाड़ी की चर्चा के साथ ही चुनावी माहौल की गुणा गणित लगाने के लिए शराब के साथ चार यार मिल जाएं तो क्या बात है लेकिन केवलारी क्षेत्र में इन दिनों यारों के बीच जाम छलकाने में शौकीनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिसकी वजह है ठेके पर शराब का न मिल पाना
हर ठेके से नदारद हुई शराब--लोगों का कहना है कि बीते एक सप्ताह से केवलारी के ठेकों से देशी और प्लेन शराब मिल ही नहीं रही और रोज शराब पीने वालों के साथ ही कभी कभार जाम छलकाने वालों को ठेकों से बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है जो उनको नागवार गुजर रहा क्योंकि एक बार पीने का मूड बनाने के बाद शराब न मिलने से खुद को समझना इन्हें भारी पड़ रहा।
ज्यादा ढीली हो रही जेब--शराब के शौकीनों ने बताया कि 50 से 60 रुपये के बीच मिलने वाली शराब ठेकों पर है ही नहीं जिसकी वजह से उन्हें मजबूरन अंग्रेजी शराब लेना पड़ रहा और शराब के साथ ही चखना, डिस्पोजल गिलास और पानी पाउच को मिला कर बजट 150 से 200 रुपये के बीच पहुँच जा रहा और 4 यारों के साथ कि बात करें तो यह बजट 800 रुपये तक पहुँच रहा ऐसे में मजबूरन अकेले ही शराब पीना पड़ रहा वो भी ज्यादा जेब ढीली करने के बाबजूद भी।
ऊपर से ही नहीं हो रही सप्लाई--शराब की कमी और लोगों को हो रही परेशानी को लेकर जब शराब ठेकेदारों से बात की गई तो उनका कहना है कि लगातार ही ऑर्डर और डिमांड भेजे जाने के बाद भी ऊपर से ही शराब की आपूर्ति नहीं हो पा रही वहीं आबकारी विभाग को भी लगातार आवेदन निवेदन कर शराब की कमी की बात रखी जा रही लेकिन आज के हालत यह हैं कि प्लेन और देशी की एक भी बॉटल इनके पास नहीं ऐसे में ग्राहक अलग उन पर गुस्सा उतार रहे जिन्हें लग रहा कि ठेकेदार ही पूरा स्टॉक कहीं दबा कर रख दिया है।
अखिल बन्देवार के साथ रेवांचल टाईम्स की एक रिपोर्ट

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