रेवांचल टाईम्स - बालाघाट नगर पालिका बालाघाट के द्वारा कबाड़ से जुगाड़ को लेकर तो सुर्खियों में थी ही वही अब कचरा से भी जुगाड़ कर जैविक खाद बनाने में सुर्खियों में आ गई है। नगर पालिका प्रशासन के द्वारा रेंगाटोला मार्ग पर स्थित कचरा घर बनाया गया है, जहां पर बालाघाट नगर मुख्यालय के सभी वेस्ट कचरा एवं कुड़ा से जैविक खाद बना रही है जिसको बनाने में लगभग डेढ़ माह का समय लगता है।
खाद विक्रय की तैयारी में नपा
नगर पालिका बालाघाट के द्वारा घरों से निकलने वाले कचरे को इक_ा कर जैविक खाद बना रही है। जिससे कि जैविक खाद को बेचने पर नगर पालिका की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा और किसानों को भी इस जैविक खाद से फायदा मिलेगा जहां किसान रासायनिक खेती कर रहा है और जैविक किसानी को पीछे छोड़ रहा है। जिसको लेकर नगर पालिका प्रशासन के द्वारा किसानों को जैविक खेती के प्रति प्रेरित करने के लिए जैविक खाद बना रही है।
कर्मचारियों ने दी जानकारी
वही इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया है कि जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया एवं जैविक खाद बनकर तैयार होने में पूरे डेढ़ माह लगते हैं। जहां नगर पालिका द्वारा इक_ा किए कचरा में से खाद बनाने वाले अपशिष्ट को बाहर निकाल कर टाके में रख दिया जाता है, जो सड़ गलकर डेढ़ माह में एक जैविक खाद बनकर तैयार होती है, जिसका उपयोग किया जाता है।
वेस्ट कचरे से होगी आमदनी
नगर पालिका द्वारा बनाए गए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन ग्रह में रोजाना करीब 2 से 3 टन मुख्यालय का कचरा निकलता है। जिसमें से नगर पालिका कर्मचारी द्वारा गिला एवं सूखा कचरा को अलग - अलग किया जाता है। जिसमें से जो उपयोगी अपशिष्ट निकलते हैं उनका नगरपालिका भरपूर उपयोग कर रही है, जिससे नगरपालिका एक बार फिर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में जुट गई है और वह वेस्ट कचरे से आमदनी बढ़ा रही है।
खाद का नहीं किया गया तय रेट
वही जानकारी देते हुए नगर पालिका कर्मचारी द्वारा बताया गया है कि जो ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन ग्रह में खाद बनाई जा रही है उसे बनाने में करीब डेढ़ माह लग जाते हैं, लेकिन अभी उसे मार्केट में बेचा नहीं गया है एवं उसका रेट भी तय नहीं किया गया है कि खाद कैसे रुपए किलो बेची जाएगी, अगर इसका रेट तय हो जाता है तो लोगों को जैविक खाद आसानी से उपलब्ध हो जाएगी और वेस्ट कचरे से यह खाद बनाई जा रही है।
लोगों में दिख रहा जानकारी का अभाव
वही आपको बता दें कि नगर पालिका द्वारा बनाई जा रही जैविक खाद की लोगों को जानकारी तक नहीं है, ऐसा माना जा रहा है कि जिले में लोगों को इस जैविक खाद की जानकारी नहीं है। जिसके चलते लोग आज भी रासायनिक खेती करने में लगे हुए हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति तो कम होती ही है साथ ही भूमि में उगने वाली फसल भी साल ब साल कम होते जाती है। वहीं जानकारों का कहना है कि जैविक खाद से खेती करने में किसानों एवं भूमि दोनों को ही फायदा होता है जिससे फसल में भी बढ़ोतरी होती है और इसका लाभ भी किसानों को मिलता है लेकिन जैविक खाद न होने के कारण लोग रासायनिक खाद के पीछे भाग रहे हैं जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम हो रही है।
बाउंड्री वॉल बाहर रही आंसू
वही नगर पालिका के द्वारा ठोस अपशिष्ट ग्रह तो बना लिया गया है साथ ही उसके लिए बाउंड्री वाल भी तैयार कर ली गई है। लेकिन बाउंड्री वाल मजबूत नहीं होने के चलते बारिश से बाउंड्री वॉल की मजबूती पर सवाल खड़ा कर दिया है, जो टूट चुकी है। जिससे गाय अंदर प्रवेश कर रही है और पॉलिथीन सहित अन्य प्लास्टिको का सेवन करने से गाय के स्वास्थ्य पर भी असर देखा जा रहा है। वही इस संबंध में नगर पालिका कर्मचारी से चर्चा की गई तो उनके द्वारा कहा गया है कि पशु मालिकों को कई बार चेतावनी भी दी गई है लेकिन उसके बावजूद वह खुले में अपनी गाय छोड़ देते हैं और गाय सीधे कचरा घर में घुस आती है जिसके चलते गाय के स्वास्थ्य पर भी पॉलिथीन एवं प्लास्टिक खाने से असर देखा जाता है।
बारिश से कार्य प्रभावित
वही मिली जानकारी के अनुसार बारिश के कारण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से बनाए जाने वाले सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं जहां पॉलिथीन से बोरिया एवं अन्य चीजें नगर पालिका के द्वारा बनाया जा रहा है। लेकिन बारिश के कारण वह सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें नहीं बना पा रहे हैं, इसके साथ ही बारिश में कचरा भी कम निकलता है जिससे खाद एवं अन्य सभी प्रकार के ठोस एवं तरल अपशिष्ट जो अलग अलग कर उपयोगी सामान को उपयोग में लाते हैं वह भी नहीं हो पाता है जिसके चलते बारिश में जैविक खाद व प्लास्टिक से बनाने वाली बोरियों के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

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