BREAKING
जवाहर नवोदय विद्यालय से दो छात्र लापता | एमपी में बड़ा प्रशासनिक फैसला | जबलपुर में सनसनीखेज वारदात
जिले के सरकारी स्कूलों की छतों की स्थिति जर्जर और जिले शिक्षा समिति के खुले रहे प्राइवेट स्कूल... - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

aaj ka akhbar padhen

आज का ई-पेपर

पूरा अखबार पढ़ने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।

ई-पेपर Viewer

Friday, July 1, 2022

जिले के सरकारी स्कूलों की छतों की स्थिति जर्जर और जिले शिक्षा समिति के खुले रहे प्राइवेट स्कूल...




रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहूल्य जिला मंडला में शिक्षा का स्तर सुधारने अधिकारियों को जिला कलेक्टर के द्वारा लगातार निर्देश दिये जा रहे हैं, साथ ही कलेक्टर द्वारा अपील की जा रही है कि अधिक से अधिक बच्चों को अभिभावक स्कूल भेजें। जिसका व्यापक पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। अब सवाल ये उठता है कि अभिभावक सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ने के लिए कैसे भेंजे? जहां शाला भवन जर्जर अवस्था में हैं छतों से पानी टपक रहा दिवाले जर्जर हो चुकी है मैदान भी भगवान भरोसे बने हुए कोने कोने से पानी स्कूलों में पहुँच रहा है ।         

           वही अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने शासन पर्याप्त आवंटन उपलब्ध करा रही है, लेकिन सरकारी तंत्र के सामने ये आवंटन बंदरबांट हो रहा है। और जिम्मेदार चैन की नीद सो रहे है यही कारण है वही आज शिक्षा का स्तर प्राइवेट स्कूलों का क्यों सुधारा हुआ आज मोटी फीस होने के बाद भी हर अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों को छोड़ प्राइवेट स्कूलों भेजना चाह रहे है क्योंकि जब जिला शिक्षा समिति का अध्यक्ष स्वयं ही प्राइवेट स्कूलों को महत्व देते हुए प्राइवेट स्कूल खोल रहे है और उनका खुलेआम प्रचार प्रसार का रहे है, तो आप ही सोचे कि सरकारी स्कूलों का स्तर कैसे सुधरेगा और क्यो न सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने से आम आदमी भी अपने कदम पीछे हटा लेता है। जबकि प्राइवेट स्कूलों से ज्यादा सरकारी स्कूलों में सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास केंद्र व प्रदेश सरकार कर रही है, फिर भी सरकारी स्कूल की हालात बद से बदतर होते जा रही हैं। वर्तमान सरकार तो स्कूलों में खेल सामग्री से लेकर गणवेश, साईकिल एवं खाने के लिए मध्याह्न भोजन जैसी तमाम सुविधाएं दे रही हैं, फिर सरकारी स्कूलों में अभिभावक प्रवेश क्यों नहीं दिला रहे हैं? सरकारी स्कूलों में दर्ज संख्या दिन व दिन घट रही है तो, वहीं प्राईवेट स्कूलों की दर्ज संख्या में वृद्धि हो रही है।



           वही जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा केंद्र के अंतर्गत संचालित सरकारी स्कूलों की स्थिति कुछ ठीक नहीं है।

जबकि इस विभाग के अंतर्गत स्कूलों को बेहतर बनाने एवं उसके रखरखाव के लिए निर्माण एजेंसी भी बनी हुई है और ये डीपीसी के दिशा निर्देश पर ही काम करती है। प्रतिवर्ष स्कूलों के मरम्मती कार्य एवं अतिरिक्त कक्ष निर्माण व मरम्मत कार्य के लिए पर्याप्त राशि भी राज्य शिक्षा केंद्र के द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन इस राशि से विभाग के लोग अपना मेंटेनेनस कर रहे हैं। आज जिस भी क्षेत्र में नजर दौड़ाई जाये तो वहां के सरकारी स्कूल बद से बदत्तर हालात में नजर आ जायेंगे। स्कूलों के अलावा शिक्षकों की स्थिति भी अपने आप में चर्चा का विषय रहती है। जहां शिक्षकों की आवश्यकता है वहां पर शिक्षक नहीं और जहां आवश्यकता नहीं, वहां जरूरत से ज्यादा शिक्षकों की पदस्थापना रहती है। व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए सहायक आयुक्त से लेकर बीएसी, बीआरसी, एपीसी, डीपीसी और बीईओ फिर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग एक लम्बी श्रृंखला है जो मैदानी स्तर पर काम कर शिक्षा के स्तर को सुधारने और उसे बेहतर बनाने का काम कर सकते है।

क्या कहते हैं विभाग के उपयंत्री ने नाम न छापने की स्तिथि में बताया कि जिले में जो भी राशि निर्माण कार्य, मरम्मत कार्य के लिए आती है उसका सही तरीके उपयोग नही किया जाता है कार्यालय में पदस्थ अधिकारी कर्मचारीयो चल रहे निर्माण कार्यों को देखने की भी फुर्सत नही रहती है जो राशि आती है वह अपना कमीशन निकाल कर स्कूलों के प्राचार्य को दे दी जाती है और प्राचार्य जो कार्य करता है वह टेक्नीशियन तो होता नही वह भी मनमाने तरीके से काम करके अपना पलड़ा झाड़ लेता है वही जिले में अस्त व्यक्त स्कूलों के संबंध मे उपयंत्री से जानकारी ली तो उन्होंने बताया की जिले में बहुत से भवन जर्जर होने की स्थिति मे वर्ष 2018 में मेरे द्वारा भवन की मरम्मत का एस्टीमेट बनाकर दिया गया था। जिस पर शासन से स्वीकृति मिल गई है। भवन में सैट लगवा दिया जाये तो भवन में मजबूती आ जायेगी और वहीं कक्षा लगाने मे कोई परेशानी नही होगी, लेकिन शाला प्रबंधन को जल्द काम करवा लेना चाहिए लेकिन शाला प्रबंधन काम कराने में हीलाहवाली कर रहा है। अगर जल्द काम नही होगा तो खुली दीवालो में अधिक नुकसान हो जायेगा। फिर मरम्मत कराने का औचित्य नही रहेगा।

    मण्डला जिला शिक्षा केंद्र के द्वारा आदेश जारी किया गया है कि यात्रा देयक / भ्रमण है भत्ता के संबंध में प्रायः पाया गया है कि यात्रा देयक बिना वरिष्ठ कार्यालय के प्रमाणीकरण के ही भुगतान किये जा रहे हैं। अवगत हो कि उक्त प्रक्रिया तत्काल प्रतिबंधित की जाती है एवं आपके द्वारा जो भी यात्रा, भ्रमण किया जाता है। उस आशय का डयूटी प्रमाण-पत्र यात्रा देयक के साथ संलग्न किया जाना अनिवार्य होगा उसके बाद जिला कार्यालय के प्रमाणीकरण उपरांत ही यात्रा, भ्रमण भत्तों का भुगतान किया जावें। साथ ही उपयंत्री के लिए स्पष्ट है कि आप संभावित भ्रमण डायरी सहायक यंत्री के द्वारा अनुमोदित करायेगें एवं माह के अंतिम दिवस वेतन भुगतान के पूर्व वास्तविक भ्रमण डायरी मय फोटोग्राफ्स आपके द्वारा किस साइट का भ्रमण किया गया उनके स्पष्ट फोटोग्राफर एवं प्रतिदिन की दैनंदिनी का उल्लेख विकास खण्ड स्त्रोत समन्वयक से प्रमाणित कराकर संबंधित शाखा जिला कार्यालय को प्रेषित करना सुनिश्चित करेंगे तभी आपका भ्रमण मान्य होगा, अन्यथा भ्रमण भत्ता का भुगतान संभव नहीं होगा। विकासखण्ड स्तर से उक्त भुगतान जिला कार्यालय के सत्यापन के बाद करना सुनिश्चित करें। समस्त एमआरसी एवं अन्य कार्यरत कर्मचारियों पर भी उपरोक्तानुसार प्रक्रिया लागू होगी। समस्त सहायक यंत्री से नवीन सत्र प्रारम्भ होने से पूर्व प्राथमिक, माध्यमिक शालाओं की ऑडिट रिर्पोट चाही गई थी जो कि आज दिनांक तक अप्राप्त है वही पूर्व में जारी पत्रानुसार ऑडिट रिर्पोट मय प्रत्येक विद्यालय का. ऑडिट पूर्णता प्रमाण पत्र संहितं समय-सीमा में प्रस्तुत करें। शाला निमार्ण से संबंधित समस्त प्रकार की त्रुटियों के लिए आप स्वयं निम्मेदार होंगे। अतः आपको निर्देशित किया जाता है कि उपरोक्तानुसार कार्यवाही करते हुये इस कार्यालय को अवगत करना  सुनिश्चित करें। वही कागजी कार्यवाही कर खानापूर्ति कर विभाग चल रहा है और बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके जिसको लेकर कलेक्टर अधिकारियों को आये दिन निर्देश दे रही।

No comments:

Post a Comment