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Tuesday, May 3, 2022

गौरवशाली वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य के लिए इतिहास का स्मरण आवश्यक: रविन्द्र किरकोले





रेवांचल टाईम्स - स्वाधीनता के अमृत महोत्सव पर व्याख्यानमाला का हुआ आयोजन..

       जीवन में इतिहास का बहुत महत्व है जिस तरह कोई व्यक्ति यदि स्मरण खो देता है तो वह व्यक्ति, व्यक्ति नहीं रहता वैसे ही यदि समाज अपना इतिहास भूल जाए तो वह समाज ही नहीं रहता। जितनी महत्वपूर्ण घटना है, उतना ही उसे लिखना, पढ़ना और उससे सीख लेना भी महत्वपूर्ण है। यदि वर्तमान को गौरवशाली बनाना है और भविष्य को उज्जवल बनाना है तो उसमें इतिहास की महत्वपूर्ण भूमिका है। उक्त आशय के उद्गार पुणे से पधारे रविन्द्र किरकोले ने व्यक्त किये। वे स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर में स्वाधीनता के अमृत महोत्सव पर हीरानंद चंद्रवंशी की अध्यक्षता एवं डॉ मुकेश तिलगाम के मुख्यातिथ्य में आयोजित व्यख्यानमाला में मुख्यवक्ता के तौर पर बोल रहे थे। 




भारतीय सेना की वजह से अंग्रेजों को देश छोड़ना पड़ा 


उन्होंने कहा कि तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली ने भारत की स्वतंत्रता का प्रस्ताव रखते हुए दो कारण बताए थे। पहला भारतीय सेना अब ब्रिटिश के प्रति एकनिष्ठ नहीं रही और दूसरा भारत मे ब्रिटिश सेना रखने लायक हमारी आर्थिक स्थिति नहीं है। यह वीर सावरकर और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के कारण हुआ था। वीर सावरकर ने देश भर में घूम घूमकर हिन्दू युवाओं से ब्रिटिश सेना में भर्ती होने का आव्हान किया तब उन्हें ब्रिटिश एजेंट कहा गया। मगर इन्हीं युवाओं के कारण अंग्रेजों को देश छोड़ने मजबूर होना पड़ा।


धर्मयुद्ध में विजयी होना ही युद्धधर्म है 


उन्होंने कहा कि आज जब हम स्वाधीनता के अमृत महोत्सव में अंग्रेजों के विरुद्ध 150-200 वर्षों के संघर्ष को याद कर रहे हैं तो हमें 750-800 वर्ष के मुगलों सहित अन्य आक्रांताओं के साथ किये संघर्ष को भी नहीं भूलना है। इन वर्षों में हम कभी भी पूर्णतः पराभूत नहीं हुए, देश में दो राजधानियां रहीं, एक आक्रांताओं की और एक भूमिपुत्रों की। तब हमारे सामने ऐसा कपटी शत्रु था जिसे धर्म, मूल्यों में विश्वास नहीं था और धर्मयुद्ध में युद्ध का धर्म होता है विजयी होना, जो हुतात्मा होने या पराक्रम दिखाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए उस समय जिसने धर्मयुद्ध और युद्धधर्म के इस अंतर को जान लिया वह विजयी हुआ। 


सभी के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम है यह महोत्सव 


उन्होंने कहा कि स्वाधीनता का अमृत महोत्सव किसी व्यक्ति या समूह के योगदान को नकारने या कम दिखाने के लिए नहीं हैं बल्कि इसके माध्यम से हम भारत की स्वतंत्रता के लिए हर उस स्त्री, पुरुष एवं बाल द्वारा जिन-जिन मार्गों से प्रयास किए गए उनका स्मरण करते हुए उन सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने जा रहे हैं।



कार्यक्रम के संयोजक प्रवीर तिवारी ने बताया कि स्वाधीनता अमृत महोत्सव समिति द्वारा स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर में व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया था। जिसमें अतिथि परिचय रितेश अग्रवाल, जिले के स्वाधीनता संग्राम की जानकारी विवेक अग्निहोत्री, सामूहिक गीत दुर्गेश बैरागी, एकल गीत अभिजय झा, अतिथि स्वागत साजिश यादव एवं अतिथियों से दीप प्रज्वलन कमलेश अग्रहरी ने कराया। कार्यक्रम का संचालन प्रवीण वर्मा एवं आभार प्रवीर तिवारी ने किया। इस दौरान सच्चिदानंद महाराज, नीलू महाराज, शरदात्मानंद महाराज सहित बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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