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Sunday, May 1, 2022

जानिए क्या है लू और हीट स्ट्रोक में अंतर, इन उपायों को अपनाकर दें लू को मात



रेवांचन टाईम्स :इनदिनों गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है. लू के थपेड़ों की वजह से लोग घर से बाहर निकलने पर भी परहेज कर रहे हैं. जिससे लू लगने से बचा जा सके. हालांकि, तमाम लोग लू को हल्के में लेते हैं और भरी दुपहरी में ही घर से बाहर निकल जाते हैं. गर्मियों में अक्सर कई बार लू यानी हीट वेब के साथ हीटस्ट्रॉक के बारे में सुनने और पढ़ने को मिलता है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि हीटस्ट्रॉक और हीट वेब में क्या अंतर है. बता दें कि लू तब लगती है जब व्यक्ति के शरीर का तापमान सामान्य तापमान से बढ़ जाता है. समय पर लू का इलाज न कराने पर गंभीर स्थिति भी हो जाती है.

लू और हीट स्ट्रोक में क्या है अंतर

दरअसल, लू और हीट स्ट्रोक में अंतर होता है, हीट स्ट्रोक एक ऐसी स्थिति है, जिसमें एक मरीज लगातार अधिक हीट या गर्मी में रहने से बेहोश या बेसुध हो जाता है. लू तब लगती है, जब हवा में इतनी गर्मी आ जाती है कि व्यक्ति के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, इसमें हीट स्ट्रोक की तरह व्यक्ति बेहोशी या चक्कर आने जैसी समस्या नहीं होती है. लू लगने में शरीर का तापमान कम से कम 102 डिग्री से ऊपर तक जाता है.

लू लगने से कैसे बचें

बता दें कि गर्मी में अक्सर लोग लू लगने से परेशान रहते है. शुष्क और गर्म हवा चलने को लू कहा जाता है. हमारे देश में लू का जोर अप्रैल के दूसरे तीसरे सप्ताह से शुरू होकर जून के पहले दूसरे सप्ताह तक रहता है. इन दिनों पारा उच्च स्तर पर होता है बहुत गर्म और शुष्क हवाएं बहती हैं. व्यक्ति गर्म हवा और धूप के संपर्क में देर तक रहता है, या उसका चेहरा सिर देर तक धूप में गर्म हवा के संपर्क में आता है, तो लू लगने की संभावना बढ़ जाती है.



लू लगे व्यक्ति के शरीर का तापमान भी बहुत अधिक बढ़ जाता है. इसलिए 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे के बीच धूप में ज्यादा देर ना रहें. लू से बचने के लिए खूब पानी पिए और धूप से बचे. खुद को हाइड्रेट रखने के लिए ठंडी शिकंजी, ओआरएस, पानी, नारियल पानी जैसे तरल पदार्थ का सेवन जरूर करें. ताजे फल जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा, पपीता, संतरा, का सेवन करें. बाहर का और खुले खाने से बचना चाहिए.

ये हैं लू लगने के लक्षण

जब किसी को लू लगती है तो शख्स के शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है. इसके साथ ही सिर में तेज दर्द होने लगता है, नाड़ी और सांस की गति तेज हो जाती है साथ ही उल्‍टियां आना और डिहाइड्रेशन के लक्षण भी नजर आने लगते हैं. इसके साथ ही चक्कर आना, दस्त लगना, मिचली होना. त्वचा पर लाल दाने हो जाना. बार-बार पेशाब आना. शरीर में जकड़न होने लगती है. इसके साथ ही शरीर का तापमान लगभग 101 या 102 डिग्री से ऊपर हो जाता है और बार-बार प्यास लगने लगती है. बता दें कि लू लगने की संभावना युवाओं की तुलना में बच्चों और बुजुर्गों ज्यादा होती है. ऐसे में बुजुर्ग और बच्चे बहुत देर तक गर्मी में रहने से बचना चाहिए.

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